झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका, क्रॉस वोटिंग के बीच एनडीए समर्थित परिमल नथवानी की जीत

झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका, क्रॉस वोटिंग के बीच एनडीए समर्थित परिमल नथवानी की जीत

प्रेषित समय :19:22:57 PM / Thu, Jun 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

रांची. झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नया समीकरण खड़ा कर दिया है. दो सीटों के लिए हुए चुनाव में एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने अप्रत्याशित जीत दर्ज कर कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम दूसरी सीट पर निर्वाचित हुए हैं. चुनाव परिणाम सामने आते ही कांग्रेस खेमे में हलचल बढ़ गई है और पार्टी नेताओं ने क्रॉस वोटिंग की आशंका जताते हुए अपनी ही पंक्तियों में असंतोष और संगठनात्मक चुनौतियों की ओर संकेत किया है.

राज्यसभा की दो सीटों के लिए इस बार मुकाबला त्रिकोणीय रहा. मैदान में झामुमो के बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी थे. मतदान को लेकर पहले से ही राजनीतिक गलियारों में क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं तेज थीं. मतदान सुबह नौ बजे शुरू हुआ और दोपहर बाद तक चला. विधानसभा के कुल 81 सदस्यों ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लिया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर सहित सभी प्रमुख नेताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया.

मतगणना पूरी होने के बाद सामने आए आंकड़ों ने कई राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया. एनडीए समर्थित परिमल नथवानी को 28 वोट प्राप्त हुए, जबकि झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम को 30 मत मिले. कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा अपेक्षित समर्थन जुटाने में असफल रहे और चुनाव हार गए. चुनाव में तीन मत अमान्य घोषित किए गए, जिसने भी परिणामों को प्रभावित किया.

नतीजे सामने आते ही कांग्रेस नेताओं ने खुले तौर पर क्रॉस वोटिंग की संभावना जताई. पार्टी नेताओं का मानना है कि यदि गठबंधन के सभी विधायक निर्धारित रणनीति के अनुसार मतदान करते, तो परिणाम अलग हो सकते थे. कांग्रेस के भीतर इस बात को लेकर मंथन शुरू हो गया है कि आखिर किन परिस्थितियों में पार्टी उम्मीदवार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह परिणाम केवल एक चुनावी हार नहीं, बल्कि झारखंड में कांग्रेस की आंतरिक स्थिति और गठबंधन राजनीति की चुनौतियों को भी उजागर करता है.

वहीं एनडीए खेमे में जीत के बाद उत्साह का माहौल दिखाई दिया. भाजपा विधायक प्रदीप प्रसाद ने परिणाम को विधायकों की "अंतरात्मा की आवाज" का फैसला बताते हुए कहा कि कई विधायकों ने राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर मतदान किया. उन्होंने दावा किया कि यह परिणाम राज्य की राजनीति में बदलाव का संकेत है और इससे विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं.

परिमल नथवानी की जीत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे, लेकिन उन्हें एनडीए का पूरा समर्थन प्राप्त था. दूसरी ओर झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की जीत ने सत्तारूढ़ दल की स्थिति को मजबूत किया है, हालांकि कांग्रेस उम्मीदवार की हार ने गठबंधन के भीतर संतुलन और समन्वय को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के ये नतीजे आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले झारखंड की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डाल सकते हैं. कांग्रेस के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का अवसर बन गया है, जबकि एनडीए इसे अपनी रणनीतिक सफलता के रूप में प्रस्तुत कर रहा है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में क्रॉस वोटिंग हुई या फिर राजनीतिक गणित में कोई ऐसी चूक हुई जिसने कांग्रेस को हार के मुहाने पर पहुंचा दिया.

फिलहाल झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के परिणाम चर्चा का सबसे बड़ा विषय बने हुए हैं. कांग्रेस हार के कारणों की तलाश में जुट गई है, जबकि एनडीए और झामुमो अपने-अपने तरीके से इस जीत को राजनीतिक संदेश के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं. आने वाले दिनों में इस चुनाव के प्रभाव और इसके पीछे की राजनीतिक कहानी पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-