नीट पुनर्परीक्षा पर रोक की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की याचिका पर तत्काल सुनवाई से किया इनकार

नीट पुनर्परीक्षा पर रोक की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की याचिका पर तत्काल सुनवाई से किया इनकार

प्रेषित समय :21:28:28 PM / Fri, Jun 19th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 को लेकर चल रहे विवाद के बीच शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्परीक्षा को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया. सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से 21 जून को प्रस्तावित पुनर्परीक्षा आयोजित होने का रास्ता साफ हो गया है. अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में किसी भी प्रकार की तात्कालिक सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी और याचिका पर अन्य लंबित मामलों के साथ जुलाई में विचार किया जाएगा.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष 11 नीट अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिका का उल्लेख किया गया था. याचिकाकर्ताओं ने पुनर्परीक्षा की तारीख आगे बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि परीक्षा से जुड़े घटनाक्रमों ने छात्रों के बीच भारी तनाव, मानसिक दबाव और असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है. हालांकि अदालत ने इस दलील को तत्काल सुनवाई योग्य नहीं माना और स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह इस प्रकार की अर्जेंट सुनवाई की मांग पर विचार नहीं करेगी.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अदील अहमद ने अदालत को बताया कि छात्र पुनर्परीक्षा के विरोध में नहीं हैं, लेकिन हालिया घटनाओं के कारण वे गंभीर मानसिक दबाव से गुजर रहे हैं. उन्होंने कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर लगातार चर्चाएं और कथित प्रश्नपत्र लीक की अफवाहों ने विद्यार्थियों की चिंता और बढ़ा दी है. इसके अलावा पुनर्परीक्षा की घोषणा कम समय के भीतर किए जाने से अभ्यर्थियों को पर्याप्त तैयारी का अवसर नहीं मिल पाया.

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि देशभर के अनेक छात्रों ने उनसे संपर्क कर पुनर्परीक्षा की तिथि आगे बढ़ाने की मांग की है. छात्रों का तर्क है कि पहले आयोजित परीक्षा को रद्द किए जाने के बाद उन्हें फिर से उसी विशाल पाठ्यक्रम की तैयारी करनी पड़ रही है, जिससे मानसिक और शैक्षणिक दोनों स्तरों पर दबाव बढ़ा है. उनका कहना है कि परीक्षा समाप्त होने के बाद अधिकांश अभ्यर्थी अपनी तैयारी की दिनचर्या से बाहर आ चुके थे, लेकिन अचानक पुनर्परीक्षा की घोषणा ने उन्हें दोबारा उसी कठिन प्रक्रिया में धकेल दिया.

अदालत के समक्ष यह भी कहा गया कि विद्यार्थियों के बीच परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर संदेह का माहौल बना हुआ है. कई अभ्यर्थियों को यह आशंका है कि यदि प्रश्नपत्र सुरक्षा से संबंधित आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो परीक्षा की साख प्रभावित हो सकती है. याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि ऐसी परिस्थितियों में विद्यार्थियों का मनोबल प्रभावित हुआ है और उनकी तैयारी पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ा है.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग को खारिज करते हुए टिप्पणी की कि न्यायिक मंचों का किस प्रकार उपयोग किया जा रहा है, अदालत इससे भली-भांति परिचित है. इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि यह याचिका नीट परीक्षा से जुड़े अन्य लंबित मामलों के साथ जुलाई में सूचीबद्ध की जाए. अदालत के इस रुख से स्पष्ट संकेत मिला कि वह परीक्षा प्रक्रिया में अंतिम समय पर हस्तक्षेप करने के पक्ष में नहीं है.

याचिका में कहा गया था कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा तीन मई को आयोजित मूल परीक्षा को बाद में रद्द कर दिया गया था, जिसके कारण लाखों छात्र पहले ही मानसिक आघात और अनिश्चितता का सामना कर चुके हैं. याचिकाकर्ताओं का दावा है कि परीक्षा रद्द होने के बाद पुनर्परीक्षा का निर्णय लगभग पांच सप्ताह के भीतर लिया गया, जिससे छात्रों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गईं. उन्होंने इसे शैक्षणिक कार्यक्रमों में व्यवधान और विद्यार्थियों के हितों के लिए नुकसानदायक बताया.

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि अनेक अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र डाउनलोड करने में तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा. वेबसाइट पर अत्यधिक दबाव, सर्वर संबंधी त्रुटियां, लॉगिन विफलता और समय सीमा समाप्त होने जैसी शिकायतों के कारण कई छात्र परेशान रहे. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि परीक्षा से ठीक पहले भी यह अनिश्चितता बनी रही कि सभी विद्यार्थी समय पर आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर पाएंगे या नहीं. इससे तनाव और चिंता का स्तर और बढ़ गया.

नीट-यूजी 2026 इस वर्ष देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक है. इस परीक्षा में लगभग 22.7 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया था. इन सभी छात्रों का लक्ष्य देश के विभिन्न सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस तथा अन्य चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त करना है. ऐसे में परीक्षा से जुड़ा कोई भी विवाद सीधे लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों को प्रभावित करता है.

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा 10 मई को परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद यह मामला लगातार न्यायिक जांच और सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ है. इस बीच विभिन्न चिकित्सक संगठनों और छात्र समूहों ने परीक्षा संचालन प्रणाली में सुधार तथा स्वतंत्र निगरानी तंत्र की मांग भी उठाई है. इसी संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय पहले से लंबित कुछ याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें परीक्षा की पारदर्शिता और एजेंसी की कार्यप्रणाली से जुड़े प्रश्न शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब 21 जून को प्रस्तावित नीट पुनर्परीक्षा के आयोजन पर किसी तत्काल न्यायिक रोक की संभावना समाप्त हो गई है. लाखों अभ्यर्थियों की निगाहें अब पुनर्परीक्षा की प्रक्रिया और उसके परिणामों पर टिकी हैं. वहीं जुलाई में होने वाली आगामी सुनवाई में परीक्षा प्रबंधन, कथित अनियमितताओं और भविष्य की व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत बहस होने की संभावना है. फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय के आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पुनर्परीक्षा आयोजित होगी और छात्रों को उसी के अनुरूप अपनी तैयारी जारी रखनी होगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-