जबलपुर. मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 का रास्ता आखिरकार साफ हो गया है. मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने मुख्य परीक्षा पर 25 मार्च 2025 से लागू अंतरिम स्थगन आदेश को समाप्त करते हुए परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी है. इस फैसले से लंबे समय से परीक्षा का इंतजार कर रहे हजारों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है.
यह महत्वपूर्ण आदेश हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने दिया. गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान एक अहम मोड़ तब आया, जब याचिकाकर्ताओं की ओर से स्वयं मुख्य परीक्षा पर लगी रोक हटाने का आग्रह किया गया. उनका तर्क था कि परीक्षा में लगातार हो रही देरी से अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, इसलिए परीक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए.
दरअसल, राज्य सेवा परीक्षा-2025 के परिणाम और आरक्षण से जुड़े विभिन्न नियमों को चुनौती देते हुए कई याचिकाएं हाई कोर्ट में दायर की गई थीं. इन याचिकाओं में आयोग द्वारा वर्गवार कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए जाने, आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों को अनारक्षित पदों पर चयनित नहीं करने तथा आयु सीमा जैसी छूट प्राप्त अभ्यर्थियों के अनारक्षित वर्ग में माइग्रेशन संबंधी नियमों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए थे.
इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने 25 मार्च और 2 अप्रैल 2025 को मुख्य परीक्षा के आयोजन पर अंतरिम रोक लगा दी थी. इसके बाद से परीक्षा प्रक्रिया ठप पड़ी हुई थी और अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी.
गुरुवार को मामला युगलपीठ के समक्ष सूचीबद्ध था, लेकिन देर शाम तक सुनवाई का क्रम नहीं आ सका. इसी दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने अदालत से निवेदन किया कि मुख्य परीक्षा पर लगी रोक समाप्त कर दी जाए और शेष कानूनी मुद्दों पर अलग से सुनवाई जारी रखी जाए. अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए परीक्षा आयोजन का मार्ग प्रशस्त कर दिया.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह और पुष्पेंद्र कुमार शाह ने पक्ष रखा. वहीं मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से अधिवक्ता पराग तिवारी उपस्थित हुए.
हालांकि अदालत ने मुख्य परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी है, लेकिन याचिकाओं में उठाए गए आरक्षण, मेरिट और माइग्रेशन से जुड़े मूल कानूनी प्रश्न अभी भी विचाराधीन रहेंगे. यानी परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, लेकिन विवादित मुद्दों पर अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है.
हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 निर्धारित की है. इस दौरान आरक्षण व्यवस्था, मेधावी अभ्यर्थियों के चयन और अनारक्षित वर्ग में माइग्रेशन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तृत सुनवाई होने की संभावना है.
अदालत के इस फैसले के बाद अब मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के लिए मुख्य परीक्षा आयोजित करने का रास्ता पूरी तरह खुल गया है. लंबे समय से परीक्षा की तारीखों की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों में फैसले के बाद राहत और उत्साह का माहौल देखा जा रहा है. अभ्यर्थियों का मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया शुरू होने से उनके करियर और चयन प्रक्रिया में आ रही अनिश्चितता समाप्त होगी.
राज्य सेवा परीक्षा मध्यप्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल है. इसके माध्यम से विभिन्न प्रशासनिक और राज्य स्तरीय सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है. ऐसे में मुख्य परीक्षा पर लगी रोक हटने को प्रदेश के प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि और राहत के रूप में देखा जा रहा है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

