मुंबई। वर्ष 2012 में रिलीज हुई फिल्म ‘कॉकटेल’ ने बॉलीवुड को एक यादगार प्रेम त्रिकोण, शानदार संगीत और कई चर्चित किरदार दिए थे। करीब 14 वर्ष बाद निर्देशक होमी अदजानिया ‘कॉकटेल 2’ के साथ दर्शकों के बीच लौटे हैं। फिल्म से उम्मीद थी कि यह पहले भाग की लोकप्रियता और भावनात्मक गहराई को नए अंदाज में आगे बढ़ाएगी, लेकिन शुरुआती समीक्षाओं के अनुसार फिल्म अपने भव्य दृश्यों और संगीत के बावजूद दर्शकों पर वैसा प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं दिखती। हालांकि पूरी फिल्म में कृति सेनन का प्रदर्शन सबसे अधिक चर्चा बटोर रहा है और उन्हें इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।
फिल्म की कहानी एक आधुनिक रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है। शाहिद कपूर और रश्मिका मंदाना एक साथ रहते हैं और एक-दूसरे से प्रेम भी करते हैं, लेकिन उनके रिश्ते में स्थायित्व को लेकर लगातार सवाल बने रहते हैं। रश्मिका का किरदार विवाह को लेकर गंभीर है, जबकि शाहिद का पात्र इस निर्णय से बचता हुआ दिखाई देता है। रिश्ते में बढ़ती दूरी और उलझनों के बीच दोनों छुट्टियां मनाने के लिए सिसिली पहुंचते हैं। यहीं उनकी मुलाकात कृति सेनन के किरदार से होती है, जिसके बाद तीनों के जीवन में भावनात्मक जटिलताएं और नए मोड़ आने लगते हैं।
फिल्म का कथानक प्रेम, प्रतिबद्धता और आधुनिक रिश्तों के बीच संतुलन खोजने की कोशिश करता है, लेकिन कहानी का विकास कई स्थानों पर अनुमानित लगता है। दर्शकों को ऐसे कई मोड़ पहले से ही समझ आने लगते हैं, जिससे फिल्म में रोमांच और उत्सुकता का स्तर सीमित हो जाता है। यही कारण है कि फिल्म को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
अभिनय की बात करें तो कृति सेनन फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी बनकर उभरती हैं। समीक्षकों का मानना है कि वह लगभग हर दृश्य में प्रभाव छोड़ने में सफल रही हैं। उनका आत्मविश्वास, स्क्रीन प्रेजेंस और भावनात्मक दृश्यों में संतुलित अभिनय दर्शकों का ध्यान आकर्षित करता है। फिल्म के कई महत्वपूर्ण क्षणों में कृति की मौजूदगी कहानी को गति देती दिखाई देती है। यही वजह है कि कई समीक्षाओं में उन्हें फिल्म का सबसे प्रभावशाली कलाकार बताया गया है।
शाहिद कपूर अपने किरदार में सहज नजर आते हैं, लेकिन पटकथा उन्हें पर्याप्त गहराई नहीं दे पाती। कई महत्वपूर्ण दृश्यों में उनका पात्र प्रभावशाली बनने के बजाय सामान्य महसूस होता है। अभिनय के स्तर पर वह संतुलित प्रदर्शन करते हैं, लेकिन कहानी की सीमाओं के कारण उनका किरदार यादगार नहीं बन पाता।
रश्मिका मंदाना के प्रदर्शन को लेकर प्रतिक्रियाएं मिश्रित रही हैं। फिल्म के शुरुआती हिस्से में उनका अभिनय अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाता। कुछ समीक्षकों का मानना है कि संवाद अदायगी और भावनात्मक दृश्यों में वह पूरी तरह सहज नजर नहीं आतीं। इसके अलावा शाहिद कपूर और रश्मिका के बीच वह केमिस्ट्री भी दिखाई नहीं देती, जो दर्शकों को उनके रिश्ते से भावनात्मक रूप से जोड़ सके। यही कारण है कि फिल्म का केंद्रीय रिश्ता उतना प्रभावशाली नहीं बन पाता जितनी उम्मीद की गई थी।
सहायक कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय करने की कोशिश की है। अनुभवी अभिनेता टीकू तलसानिया सहित अन्य कलाकार सीमित भूमिका में भी प्रभाव छोड़ते हैं और फिल्म को आवश्यक समर्थन प्रदान करते हैं।
फिल्म का संगीत इसकी प्रमुख खूबियों में शामिल है। संगीतकार प्रीतम ने एक बार फिर मधुर और आकर्षक धुनों के माध्यम से फिल्म को ऊर्जा देने का प्रयास किया है। जब कहानी कहीं-कहीं धीमी पड़ती हुई महसूस होती है, तब गीत और संगीत दर्शकों की रुचि बनाए रखने में मदद करते हैं। कई समीक्षकों का मानना है कि फिल्म का संगीत उसके सबसे मजबूत पक्षों में से एक है।
दृश्य प्रस्तुति की बात करें तो निर्देशक होमी अदजानिया ने सिसिली की खूबसूरत लोकेशनों को प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा है। समुद्र तट, ऐतिहासिक इमारतें और प्राकृतिक दृश्य फिल्म को एक आकर्षक दृश्य अनुभव प्रदान करते हैं। कैमरा वर्क और छायांकन फिल्म को भव्यता देने में सफल रहे हैं। कई दर्शकों के लिए फिल्म का दृश्य पक्ष इसकी कहानी से अधिक प्रभावशाली साबित हो सकता है।
हालांकि आलोचकों का मानना है कि खूबसूरत लोकेशन और आकर्षक संगीत के बावजूद फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी कहानी है। प्रेम त्रिकोण और रिश्तों की जटिलताओं जैसे विषय पहले भी कई फिल्मों में देखे जा चुके हैं। ‘कॉकटेल 2’ इन विषयों को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाती। परिणामस्वरूप फिल्म कई जगहों पर पुरानी और दोहराव वाली प्रतीत होती है।
फिल्म का दूसरा भाग पहले हिस्से की तुलना में कुछ अधिक रोचक माना जा रहा है। कहानी में भावनात्मक संघर्ष और रिश्तों की उलझनें बढ़ती हैं, लेकिन तब भी दर्शकों को कोई बड़ा आश्चर्य या अप्रत्याशित मोड़ देखने को नहीं मिलता। इस दौरान भी कृति सेनन का प्रदर्शन फिल्म को संभाले रखता है और दर्शकों की रुचि बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
फिल्म समीक्षकों का निष्कर्ष है कि ‘कॉकटेल 2’ एक ऐसी फिल्म है जो तकनीकी रूप से आकर्षक दिखती है, अच्छा संगीत प्रस्तुत करती है और कृति सेनन जैसा मजबूत प्रदर्शन देती है, लेकिन कमजोर कहानी, सीमित भावनात्मक जुड़ाव और अपेक्षाकृत फीकी केमिस्ट्री इसे यादगार बनने से रोक देती है। यह फिल्म उन दर्शकों को पसंद आ सकती है जो रोमांटिक ड्रामा और शानदार लोकेशनों वाली फिल्मों का आनंद लेते हैं, लेकिन जो लोग पहले भाग जैसी ताजगी और भावनात्मक प्रभाव की उम्मीद लेकर सिनेमाघरों में जाएंगे, उन्हें कुछ हद तक निराशा का सामना करना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर ‘कॉकटेल 2’ एक बार देखी जा सकने वाली फिल्म है, जिसकी सबसे बड़ी उपलब्धि कृति सेनन का प्रभावशाली अभिनय और आकर्षक दृश्य प्रस्तुति है। वहीं इसकी सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसी कहानी है जो दर्शकों को चौंकाने और लंबे समय तक याद रहने वाला अनुभव देने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाती।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

