नई दिल्ली. देश की सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सा प्रवेश परीक्षा मानी जाने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (स्नातक) का पुनर्परीक्षण रविवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित किया गया. लगभग 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा में भाग लिया. यह पुनर्परीक्षा ऐसे समय आयोजित की गई है जब पिछली परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों ने पूरे देश में व्यापक विवाद और आक्रोश को जन्म दिया था. परीक्षा रद्द होने के बाद लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए थे और अब यह पुनर्परीक्षा उनके लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है.
रविवार सुबह से ही देशभर के परीक्षा केंद्रों के बाहर अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों की भीड़ दिखाई देने लगी. कई केंद्रों पर परीक्षार्थी निर्धारित समय से तीन से चार घंटे पहले ही पहुंच गए थे. दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, पटना, भोपाल, जयपुर, लखनऊ, कोलकाता और बेंगलुरु सहित प्रमुख शहरों में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे. परीक्षा केंद्रों के बाहर पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारी और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े कर्मचारी लगातार निगरानी करते दिखाई दिए.
परीक्षा दोपहर दो बजे से शाम पांच बजकर पंद्रह मिनट तक आयोजित की गई. इस बार अभ्यर्थियों को अतिरिक्त पंद्रह मिनट का समय भी प्रदान किया गया. परीक्षा शुरू होने से पहले प्रत्येक अभ्यर्थी की पहचान का बहुस्तरीय सत्यापन किया गया. प्रवेश पत्र, फोटो पहचान पत्र, बायोमेट्रिक सत्यापन और शारीरिक जांच की प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही परीक्षार्थियों को परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया गया.
परीक्षा केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं. मोबाइल फोन, स्मार्ट घड़ी, ब्लूटूथ डिवाइस और अन्य संचार उपकरणों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया. कई केंद्रों पर धातु खोजी यंत्रों और विशेष स्कैनर का उपयोग किया गया. परीक्षा एजेंसियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी प्रकार की अनियमितता दोबारा न हो और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तथा निष्पक्ष बनी रहे.
पिछले कुछ महीनों से नीट परीक्षा देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई थी. प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आने के बाद विद्यार्थियों, अभिभावकों और विभिन्न छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे. कई राज्यों में प्रदर्शन हुए और न्यायिक हस्तक्षेप की मांग भी उठी. अंततः परीक्षा को रद्द कर पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया, जिससे लाखों विद्यार्थियों को दोबारा तैयारी करनी पड़ी.
पुनर्परीक्षा की घोषणा के बाद अभ्यर्थियों पर मानसिक दबाव भी बढ़ गया था. कई विद्यार्थियों ने कहा कि उन्हें फिर से तैयारी करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी. कुछ अभ्यर्थियों का मानना था कि दोबारा परीक्षा देना चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन वे चाहते थे कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष हो. अभिभावकों ने भी पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया.
परीक्षा केंद्रों के बाहर मौजूद अभिभावकों में मिश्रित भावनाएं दिखाई दीं. एक ओर बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता थी तो दूसरी ओर यह उम्मीद भी थी कि इस बार परीक्षा बिना किसी विवाद के संपन्न होगी. कई अभिभावकों ने कहा कि पिछले घटनाक्रम ने विद्यार्थियों का मनोबल प्रभावित किया था, लेकिन अब वे निष्पक्ष परिणाम की अपेक्षा कर रहे हैं.
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा केवल एक प्रवेश परीक्षा नहीं है, बल्कि लाखों विद्यार्थियों के भविष्य और चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था का आधार भी है. इसलिए इसकी विश्वसनीयता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है. विशेषज्ञों ने कहा कि हालिया घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा और निगरानी को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है.
देशभर के चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली यह परीक्षा हर वर्ष लाखों विद्यार्थियों के लिए सपनों का द्वार होती है. सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, बीडीएस और अन्य चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश इसी परीक्षा के माध्यम से दिया जाता है. यही कारण है कि परीक्षा से जुड़ी किसी भी अनियमितता का प्रभाव सीधे लाखों परिवारों पर पड़ता है.
परीक्षा अधिकारियों के अनुसार इस बार सुरक्षा प्रबंधन में कई अतिरिक्त कदम उठाए गए. परीक्षा केंद्रों के चयन से लेकर प्रश्नपत्रों के परिवहन और वितरण तक प्रत्येक स्तर पर विशेष निगरानी रखी गई. संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए थे. परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी के लिए नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किए गए, जहां से विभिन्न राज्यों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी.
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार बदलती परिस्थितियों और दोबारा परीक्षा की तैयारी ने विद्यार्थियों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव डाला है. ऐसे में अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को परिणाम की चिंता छोड़कर आत्मविश्वास बनाए रखने की सलाह दी है.
अब परीक्षा संपन्न होने के बाद सभी की निगाहें उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और परिणामों पर टिकी हैं. लाखों विद्यार्थी उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और विवादमुक्त रहेगी. शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि पुनर्परीक्षा का सफल आयोजन परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.
फिलहाल देशभर में परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने की खबरों के बीच अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली है. अब उनकी मेहनत का अंतिम मूल्यांकन परिणामों के रूप में सामने आएगा, जो यह तय करेगा कि चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश का उनका सपना कितना करीब है. लाखों विद्यार्थियों के लिए यह केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और भविष्य की आकांक्षाओं का निर्णायक पड़ाव है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

