सीएम की बेटी को फिर ईडी का समन, सीएमआरएल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 29 जून को होगी पूछताछ

सीएम की बेटी को फिर ईडी का समन, सीएमआरएल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 29 जून को होगी पूछताछ

प्रेषित समय :15:41:00 PM / Sun, Jun 21st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

तिरुवनंतपुरम. केरल की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चित सीएमआरएल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की पुत्री वीणा टी को एक बार फिर पूछताछ के लिए तलब किया है. जांच एजेंसी ने उन्हें 29 जून को उपस्थित होने का नोटिस जारी किया है. यह इस मामले में ईडी द्वारा की जाने वाली दूसरी विस्तृत पूछताछ होगी. मामले को लेकर राज्य की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है और विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है.

सूत्रों के अनुसार वीणा टी से इससे पहले 17 जून को कोच्चि स्थित ईडी कार्यालय में करीब नौ घंटे तक पूछताछ की गई थी. पूछताछ के दौरान जांच अधिकारियों ने वित्तीय लेनदेन, कारोबारी गतिविधियों और संबंधित कंपनियों के बीच हुए समझौतों को लेकर कई सवाल पूछे थे. ईडी का मानना है कि पहली पूछताछ के दौरान प्राप्त जानकारी और जांच में जुटाए गए दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद कई नए बिंदु सामने आए हैं, जिन पर और अधिक स्पष्टीकरण की आवश्यकता है. इसी कारण उन्हें दोबारा समन जारी किया गया है.

मामले की जांच के तहत ईडी ने 19 जून को तिरुवनंतपुरम में वीणा टी के बैंक लॉकरों का भी निरीक्षण किया था. जांच एजेंसी इस पूरे मामले में वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े पहलुओं की गहन पड़ताल कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि बैंकिंग रिकॉर्ड, कंपनियों के वित्तीय दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

यह मामला कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड तथा वीणा टी की अब बंद हो चुकी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुए वित्तीय लेनदेन से जुड़ा हुआ है. ईडी का आरोप है कि खनन क्षेत्र से जुड़ी कंपनी सीएमआरएल ने एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को लगभग 2.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया था, जबकि इसके बदले किसी प्रकार की वास्तविक सेवा प्राप्त नहीं हुई. जांच एजेंसी इन भुगतानों की प्रकृति और उद्देश्य की जांच कर रही है.

ईडी के अनुसार मामले में एक अन्य कंपनी एम्पावर इंडिया कैपिटल इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड की भूमिका भी जांच के दायरे में है. यह कंपनी सीएमआरएल के प्रबंध निदेशक ससिधरन कर्था से जुड़ी बताई जाती है. आरोप है कि इस कंपनी ने एक्सालॉजिक को लगभग 50 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध कराया था. जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन लेनदेन का वास्तविक उद्देश्य क्या था और क्या इनके माध्यम से अवैध वित्तीय लाभ अर्जित किए गए.

प्रवर्तन निदेशालय का दावा है कि उपलब्ध दस्तावेजों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया अपराध से अर्जित आय के संकेत मिले हैं. इसी आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है. हालांकि आरोपित पक्ष की ओर से अब तक किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि से जुड़े आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है.

इस मामले की पृष्ठभूमि गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय द्वारा दायर अभियोजन शिकायत से जुड़ी हुई है. कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन कार्यरत इस केंद्रीय जांच एजेंसी ने अप्रैल 2025 में एर्नाकुलम की एक अदालत में शिकायत प्रस्तुत की थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक्सालॉजिक और सीएमआरएल के बीच ऐसा वित्तीय समझौता किया गया, जिसके तहत भुगतान तो किए गए, लेकिन उसके अनुरूप कोई वास्तविक सेवा उपलब्ध नहीं कराई गई.

गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय की रिपोर्ट के आधार पर ही ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था. इसके बाद से लगातार दस्तावेजों की जांच, वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है. सूत्रों का कहना है कि अब तक इस मामले में चार अन्य आरोपित व्यक्तियों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं.

मामले की जड़ें वर्ष 2019 में आयकर विभाग द्वारा की गई कार्रवाई तक पहुंचती हैं. उस समय सीएमआरएल समूह से जुड़े परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया गया था. जांच के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं और लगभग 130 करोड़ रुपये के संदिग्ध खर्च से जुड़े दस्तावेज सामने आने का दावा किया गया था. इसके बाद विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों ने मामले की अलग-अलग स्तर पर जांच शुरू की थी.

राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला काफी संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इसमें राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार का नाम सामने आया है. विपक्षी दल लगातार मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं. वहीं सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा.

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ईडी द्वारा दूसरी बार पूछताछ के लिए बुलाया जाना इस बात का संकेत है कि एजेंसी मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और पूर्व में दर्ज बयानों का मिलान कर रही है. आने वाले दिनों में जांच की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि पूछताछ के दौरान क्या नई जानकारी सामने आती है और दस्तावेजी साक्ष्यों से उसका कितना मेल बैठता है.

फिलहाल पूरे मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है. 29 जून को होने वाली पूछताछ को जांच प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है. ईडी की आगे की कार्रवाई और उससे निकलने वाले निष्कर्ष इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय कर सकते हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-