जबलपुर. एमपी के जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग अपने निर्माणाधीन अस्पताल भवनों में फाल्स सीलिंग का उपयोग नहीं करेगा. कारण इसे चूहों का घर माना गया है. यही कारण है कि इसकी शुरुआत जिला अस्पताल विक्टोरिया से हो रही है.
जिला अस्पताल विक्टोरिया में चार मंजिला नया भवन अंतिम दौर में है. जहां आधुनिक फाल सीलिंग का उपयोग वर्जित होगा. 50 करोड़ की लागत से चार मंजिला नया भवन को सुरक्षा की दृष्टि अनेक उपाय किए जा रहे हैं, ताकी अंदर चूहों के प्रवेश को रोका जा सके. अस्पताल में बिस्तरों की संख्या 275 से बढ़कर 500 हो जाएगी और मरीजों को एक ही छत के नीचे आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी. स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी दिशा निर्देशों के अनुसार, अस्पताल में मरीजों को भटकना न पड़े और एक ही छत के नीचे सभी गंभीर इलाज और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की सेवाएं मिल सकें, यह सुनिश्चित किया जाएगा. साथ ही सभी चार फ्लोर की छत फाल सीलिंग से मुक्त होगी.
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की फाल सीलिंग पूर्व में गिर चुकी है-
इससे पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की फाल सीलिंग पूर्व में गिर चुकी है. जिस वक्त यह गिरी उस समय ओपीडी में कोई मरीज नहीं था. साथ ही सरकारी अस्पतालों में चूहों के बढ़ते मामले से मेडिकल भी अछूता नहीं है.
वार्ड में चूहों की धमाचौकड़ी दिखने के बाद से विभाग सतर्क-
जिला अस्पताल के पुराने भवन में संचालित हड्डी वार्ड में चूहों की धमाचौकड़ी दिखने के बाद से विभाग सतर्क है. यही कारण है कि सभी सरकारी अस्पताल के नए भवन की डिजाइन इस तरह की होगी कि उसमें फाल सीलिंग का कहीं पर भी उपयोग नहीं होगा. मेडिकल कालेज, जिला अस्पताल सहित सरकारी अस्पतालों में पेस्ट कंट्रोल के उपायों पर जोर दिया जा रहा है. मानसून सिर पर है, ऐसे में तैयारियों पर स्वास्थ्य विभाग की नजर है.मरीजों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है.
निर्धारित स्थानों पर ही भोजन करने का नियम पर भी चर्चा संभावित-
नियमित रूप से पेस्ट कंट्रोल की समीक्षा व दवा छिडकाव, दरारों को सील करना, अपशिष्ट प्रबंधन तथा लाइसेंस प्राप्त एजेंसियों के जरिए चूहों, मच्छरों और कॉकरोच की रोकथाम सुनिश्चित की जाएगी.वार्डों में खानाखाने पर प्रतिबंध और केवल कैंटीन या निर्धारित स्थानों पर ही भोजन करने का नियम पर भी चर्चा संभावित है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

