कर्क रेखा पर गायब हुआ साया, रायसेन में दुर्लभ खगोलीय नजारा देखने उमड़ा सैलानियों का सैलाब

कर्क रेखा पर गायब हुआ साया, रायसेन में दुर्लभ खगोलीय नजारा देखने उमड़ा सैलानियों का सैलाब

प्रेषित समय :15:29:08 PM / Mon, Jun 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

रायसेन/दीवानगंज. मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित कर्क रेखा स्थल रविवार को उस समय आकर्षण का केंद्र बन गया जब कुछ पलों के लिए लोगों की परछाई लगभग गायब हो गई. साल में एक बार दिखाई देने वाले इस दुर्लभ खगोलीय घटनाक्रम को देखने के लिए प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से सैकड़ों लोग यहां पहुंचे. दोपहर के समय जब सूर्य लगभग सिर के ठीक ऊपर पहुंचा तो लोगों की परछाई उनके पैरों के नीचे सिमट गई. इस अनोखे दृश्य को देखने के बाद लोगों में उत्साह का माहौल बन गया और कर्क रेखा स्थल पर सेल्फी तथा वीडियो बनाने की होड़ मच गई.

भोपाल-विदिशा राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित कर्क रेखा स्थल पर सुबह से ही लोगों का आना शुरू हो गया था. विज्ञान और भूगोल में रुचि रखने वाले विद्यार्थी, पर्यटक, परिवार और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में यहां पहुंचे. सभी की निगाहें घड़ी की सुइयों पर टिकी थीं और लोग उस विशेष क्षण का इंतजार कर रहे थे जब सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पड़ने के कारण परछाई लगभग समाप्त हो जाती है.

दोपहर करीब 12 बजे के बाद लोगों में उत्सुकता और बढ़ गई. अनेक लोग सड़क किनारे निर्धारित बिंदुओं पर खड़े होकर अपनी परछाई को देखने लगे. हालांकि बीच-बीच में बादलों की आवाजाही ने कुछ समय के लिए दृश्य को प्रभावित किया, लेकिन जैसे ही सूर्य बादलों से बाहर निकला, लोगों ने उस दुर्लभ खगोलीय घटना को महसूस किया. लगभग 12 बजकर 10 मिनट पर कई लोगों की परछाई इतनी छोटी हो गई कि वह लगभग दिखाई ही नहीं दी. इसके बाद दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक सूर्य की तीव्र किरणों के कारण लोगों का साया उनके पैरों के ठीक नीचे सिमटा हुआ दिखाई देता रहा.

यह दृश्य देखते ही वहां मौजूद लोगों में उत्साह की लहर दौड़ गई. युवाओं ने मोबाइल फोन निकालकर तस्वीरें और वीडियो बनाना शुरू कर दिया. कई लोग अपनी परछाई के गायब होने के अनुभव को कैमरे में कैद करने के लिए अलग-अलग प्रयोग करते दिखाई दिए. कुछ लोग जमीन पर खड़े होकर तस्वीरें खिंचवा रहे थे तो कुछ वीडियो रिकॉर्ड कर सामाजिक माध्यमों पर साझा कर रहे थे. पूरे क्षेत्र में मेले जैसा माहौल दिखाई दिया.

रायसेन का यह कर्क रेखा स्थल वर्षों से वैज्ञानिक और पर्यटन दृष्टि से विशेष महत्व रखता है. यहां हर वर्ष जून महीने में सूर्य की स्थिति ऐसी बनती है जब वह कर्क रेखा के ऊपर लगभग लंबवत दिखाई देता है. इस दौरान दोपहर के समय सूर्य की किरणें धरती पर लगभग 90 डिग्री के कोण पर पड़ती हैं. परिणामस्वरूप किसी भी वस्तु की परछाई अत्यंत छोटी हो जाती है और कई बार कुछ क्षणों के लिए लगभग अदृश्य प्रतीत होती है. इसी घटना को सामान्य भाषा में "नो शैडो डे" कहा जाता है.

इस अनूठे दृश्य को देखने के लिए भोपाल, विदिशा, सीहोर, शाजापुर, बेरसिया और रायसेन के अलावा उत्तर प्रदेश तथा कर्नाटक जैसे राज्यों से भी पर्यटक पहुंचे. कई लोगों ने बताया कि उन्होंने इस घटना के बारे में किताबों और इंटरनेट पर पढ़ा था, लेकिन पहली बार इसे प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिला. कुछ पर्यटकों ने कहा कि यह अनुभव उनके लिए किसी वैज्ञानिक प्रयोग से कम नहीं था.

कई विद्यार्थियों ने इसे भूगोल की पढ़ाई को वास्तविक रूप में समझने का अवसर बताया. उनका कहना था कि पाठ्यपुस्तकों में पढ़ी जाने वाली कर्क रेखा और सूर्य की स्थिति को प्रत्यक्ष रूप से देखना बेहद रोमांचक अनुभव रहा. शिक्षकों और अभिभावकों ने भी बच्चों को इस घटना के वैज्ञानिक महत्व के बारे में जानकारी दी.

विशेषज्ञों के अनुसार पृथ्वी अपनी धुरी पर लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है. इसी झुकाव के कारण वर्ष भर सूर्य की स्थिति बदलती रहती है. जून महीने में सूर्य उत्तर दिशा की ओर अपनी अधिकतम स्थिति पर पहुंचता है और कर्क रेखा के ऊपर चमकता है. जब किसी स्थान पर सूर्य लगभग सिर के ऊपर होता है तो वहां वस्तुओं की परछाई न्यूनतम हो जाती है. यही कारण है कि कर्क रेखा के आसपास स्थित क्षेत्रों में इस तरह का दृश्य देखने को मिलता है.

रायसेन का कर्क रेखा स्थल पिछले कुछ वर्षों में विज्ञान पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है. सांची स्तूप, उदयगिरि गुफाओं और विदिशा के ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा करने वाले पर्यटक भी यहां रुककर इस विशेष भौगोलिक स्थान को देखने आते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष "नो शैडो डे" के अवसर पर यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है.

इस बार भी पूरे दिन क्षेत्र में रौनक बनी रही. स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों को भी इसका लाभ मिला. सड़क किनारे कई स्थानों पर लोगों के लिए पेयजल और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी. प्रशासन और स्थानीय संस्थाओं ने भी लोगों को सुरक्षित तरीके से इस घटना का अवलोकन करने की सलाह दी.

वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि प्रकृति और ब्रह्मांड से जुड़े कई रहस्य हमारे आसपास ही मौजूद हैं. जिन तथ्यों को विद्यार्थी वर्षों तक किताबों में पढ़ते हैं, वे कभी-कभी वास्तविक जीवन में भी अद्भुत रूप में सामने आते हैं. रायसेन में रविवार को दिखाई दिया यह दृश्य उसी का एक जीवंत उदाहरण था.

कुछ मिनटों के लिए साया गायब होने की इस दुर्लभ घटना ने न केवल लोगों को रोमांचित किया, बल्कि विज्ञान और भूगोल के प्रति उनकी जिज्ञासा भी बढ़ाई. यही कारण है कि कर्क रेखा का यह स्थल अब केवल एक भौगोलिक बिंदु नहीं रह गया है, बल्कि मध्य प्रदेश के प्रमुख विज्ञान पर्यटन केंद्रों में अपनी पहचान बना चुका है. रविवार को यहां उमड़ी भीड़ और लोगों का उत्साह इस बात का प्रमाण रहा कि प्रकृति के ऐसे अनोखे चमत्कार आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-