होर्मुज पर ट्रंप की खुली धमकी, ईरान को चेतावनी दी, जलडमरूमध्य बंद किया तो देश नहीं बचेगा

होर्मुज पर ट्रंप की खुली धमकी, ईरान को चेतावनी दी, जलडमरूमध्य बंद किया तो देश नहीं बचेगा

प्रेषित समय :17:11:50 PM / Mon, Jun 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

वॉशिंगटन/तेहरान. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को कड़ी चेतावनी देकर वैश्विक राजनीति में हलचल बढ़ा दी है. ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कोशिश करता है तो उसके गंभीर परिणाम होंगे. उन्होंने यहां तक कहा कि यदि तेहरान ने इस रणनीतिक मार्ग को अवरुद्ध किया तो उसका अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है.

यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण वार्ता का पहला दौर संपन्न हुआ है. दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने मध्य पूर्व में बढ़ते संकट, लेबनान की स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चर्चा की. वार्ता के बाद मध्यस्थ देशों पाकिस्तान और कतर ने संयुक्त बयान जारी कर बताया कि दोनों पक्षों ने समुद्री मार्ग को खुला रखने और संभावित टकराव को रोकने के लिए संपर्क तंत्र स्थापित करने पर सहमति जताई है.

हालांकि वार्ता के समानांतर ट्रंप का आक्रामक रुख चर्चा का विषय बना हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक टेलीफोनिक बातचीत के दौरान कहा कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही में बाधा डाली तो अमेरिका न केवल जवाबी कार्रवाई करेगा, बल्कि उस समुद्री मार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में भी कदम उठा सकता है. ट्रंप के बयान को क्षेत्रीय तनाव के बीच अब तक की सबसे कड़ी चेतावनियों में से एक माना जा रहा है.

सूत्रों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का नेतृत्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ से जुड़े वरिष्ठ प्रतिनिधियों द्वारा किया गया. वार्ता का उद्देश्य हाल के सप्ताहों में बढ़े सैन्य और राजनीतिक तनाव को कम करना था. अमेरिकी पक्ष ने बातचीत को सकारात्मक शुरुआत बताया है और कहा है कि दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखना आवश्यक है.

ट्रंप ने अपने सामाजिक मंच पर भी ईरान को लेकर कई तीखे संदेश साझा किए. उन्होंने कहा कि तेहरान को लेबनान में सक्रिय हिज्बुल्लाह लड़ाकों पर नियंत्रण रखना चाहिए और क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों को रोकना चाहिए. ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका पहले से अधिक कठोर सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा. उनके इन बयानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता भी व्यक्त की जा रही है क्योंकि इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

दूसरी ओर ईरान ने भी अमेरिकी चेतावनियों का तीखा जवाब दिया है. ईरानी नेतृत्व ने कहा है कि देश किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है और उसकी सेनाएं हर परिस्थिति का जवाब देने के लिए तैयार हैं. ईरान के वरिष्ठ नेता मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका को अपने बयानों में सावधानी बरतनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ईरान केवल बयानबाजी नहीं करता बल्कि आवश्यक होने पर कार्रवाई करने में भी सक्षम है.

पिछले कुछ दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव लगातार बढ़ा है. यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. दुनिया के बड़े हिस्से में पहुंचने वाला कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है. यदि यहां किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर तत्काल प्रभाव पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग के अवरुद्ध होने से न केवल पश्चिम एशिया बल्कि एशिया, यूरोप और अमेरिका की अर्थव्यवस्थाओं पर भी असर पड़ सकता है.

हाल के दिनों में ईरान की ओर से यह संकेत दिए गए थे कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ता है तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने पर विचार कर सकता है. इसी संभावना ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता बढ़ा दी थी. हालांकि अमेरिकी सैन्य कमान ने हाल ही में कहा था कि वाणिज्यिक जहाज अभी भी सामान्य रूप से इस मार्ग से गुजर रहे हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.

इसी पृष्ठभूमि में स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में दोनों देशों ने एक विशेष संपर्क तंत्र स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की है. इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समुद्री क्षेत्र में किसी भी गलतफहमी या आकस्मिक घटना को तत्काल संवाद के माध्यम से सुलझाया जा सके. इससे जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच संबंध पिछले कई वर्षों से तनावपूर्ण रहे हैं, लेकिन हाल की घटनाओं ने स्थिति को और जटिल बना दिया है. लेबनान, इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों के कारण दोनों देशों के बीच टकराव की आशंकाएं लगातार बनी हुई हैं. ऐसे में संवाद और चेतावनियों का यह समानांतर दौर भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार भी इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं. तेल कंपनियां, समुद्री परिवहन क्षेत्र और निवेशक विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रमों को लेकर सतर्क हैं. किसी भी सैन्य या राजनीतिक तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है.

फिलहाल बातचीत का पहला दौर समाप्त हो चुका है और दोनों पक्ष आगे भी संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए हैं. हालांकि ट्रंप की तीखी चेतावनी और ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया यह संकेत दे रही है कि तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कूटनीतिक प्रयास क्षेत्र में स्थिरता लाने में सफल होते हैं या फिर बयानबाजी और शक्ति प्रदर्शन का दौर और तेज होता है. दुनिया की नजरें अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका प्रभाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-