नई दिल्ली. अमेरिकी रक्षा विभाग ने एक ऐसा चौंकाने वाला कदम उठाया है, जिसने भारत में भारी विवाद खड़ा कर दिया है. अमेरिका ने हाल ही में अपने सैन्य कमांड इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर वापस पुराना नाम यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया है, लेकिन सबसे ज्यादा आपत्तिजनक बात नाम के बदलाव के साथ जारी किया गया नया नक्शा है. इस नक्शे में भारत की क्षेत्रीय अखंडता को सिरे से नकारते हुए पूरे जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं दिखाया गया है. हद तो तब हो गई जब इस आधिकारिक अमेरिकी नक्शे में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) को सीधे तौर पर पाकिस्तान के इलाके के रूप में दर्शा दिया गया.
अक्साई चिन को भी किया अलग, संप्रभुता का सीधा उल्लंघन
16 जून 2026 को अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा जारी की गई जानकारी के साथ इस्तेमाल किए गए इस नक्शे में भारत को हल्के हरे रंग से दर्शाया गया है. इसमें जम्मू-कश्मीर के उत्तरी और पश्चिमी हिस्से (पीओके) को भारत के मुख्य नक्शे से बाहर कर पाकिस्तान के हिस्से के रूप में दिखाया गया है, जबकि अक्साई चिन क्षेत्र को भी भारत से अलग कर दिया गया है. इसके अलावा, भारत की सीमा के बीच से एक काली रेखा गुजरती दिख रही है, जो संभवत: अमेरिकी सैन्य कमांड क्षेत्रों का विभाजन करती है. भारतीय नजरिए से यह नक्शा पूरी तरह से गलत है और यह भारत की संप्रभुता पर सीधा प्रहार है.
इंडो शब्द हटाकर अहमियत कम करने की कोशिश
यह बदलाव ऐसे नाजुक समय में सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात हो रही है. गौरतलब है कि साल 2018 में ट्रंप प्रशासन ने ही अपने पहले कार्यकाल के दौरान भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका और दबदबे को देखते हुए इस कमांड का नाम पैसिफिक से बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांडÓ किया था. अब ट्रंप 2.0 सरकार के तहत फिर से इंडो शब्द हटाकर इसे वापस यूएस पैसिफिक कमांड कर देना भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक अहमियत को कम करने के स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
भारत का स्पष्ट स्टैंड, क्या पाकिस्तान से बढ़ रही नजदीकी है वजह?
इस गंभीर मुद्दे पर भारत सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विदेश और रक्षा मंत्रालय ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर अमेरिका के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं. भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा से यह स्पष्ट करता रहा है कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उसका अभिन्न अंग है और दुनिया का कोई भी नक्शा इस सच्चाई को चुनौती नहीं दे सकता. कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में हालिया समय में आई गर्मजोशी भी इस विवादास्पद नक्शे का एक बड़ा कारण हो सकती है. भले ही अमेरिका अपने रक्षा नक्शे वास्तविक नियंत्रण के आधार पर बनाता हो, लेकिन क्वाड और मजबूत भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के बीच ट्रंप प्रशासन की यह हरकत कूटनीतिक रूप से एक बेहद गलत संदेश दे रही है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

