भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व गहरे गम, अकीदत और धार्मिक श्रद्धा के माहौल में मनाया गया. यौमे आशूरा के अवसर पर हजरत इमाम हुसैन और करबला के शहीदों की याद में शहर के विभिन्न हिस्सों से मातमी जुलूस और ताजिए निकाले गए. पुराने भोपाल की गलियां दिनभर "या हुसैन" की सदाओं से गूंजती रहीं. शिया समुदाय ने मातम, सीना-ज़नी और नौहाख्वानी के माध्यम से शहीद-ए-करबला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया, जबकि सुन्नी समुदाय के लोगों ने रोजा रखकर इबादत की और मुल्क में अमन, भाईचारे तथा खुशहाली की दुआ मांगी.
मोहर्रम की दसवीं तारीख पर शहर का धार्मिक वातावरण पूरी तरह आस्था में डूबा नजर आया. फतेहगढ़, जहांगीराबाद, इतवारा, शाहजहांनाबाद, टीला जमालपुरा सहित पुराने शहर के विभिन्न इलाकों से पारंपरिक मातमी जुलूस निकाले गए. इन जुलूसों में सजे-धजे ताजिए, बुर्राक, सवारियां और इस्लामी परचम श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने रहे. बड़ी संख्या में अकीदतमंद नंगे पैर जुलूस में शामिल होकर करबला की शहादत को याद करते हुए आगे बढ़ते रहे.
मुख्य मातमी जुलूस फतेहगढ़ से प्रारंभ होकर मोती मस्जिद, इमामीगेट, पीरगेट, भवानी चौक, रॉयल मार्केट, हमीदिया अस्पताल और कोहेफिजा होते हुए वीआईपी रोड स्थित करबला पहुंचा. शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से निकले अन्य जुलूस भी पीरगेट क्षेत्र में एकत्र हुए और वहां से सामूहिक रूप से करबला के लिए रवाना हुए. जुलूस के समापन पर अकीदतमंदों ने हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश और दुनिया में शांति, सौहार्द और मानवता की रक्षा की दुआ की.
मोहर्रम के अवसर पर इंसानियत और सेवा की भावना भी देखने को मिली. जुलूस मार्ग पर विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने सबीलें लगाकर श्रद्धालुओं को ठंडा पानी, शरबत और अन्य पेय पदार्थ वितरित किए. कई स्थानों पर लोगों ने गर्म सड़कों पर पानी का छिड़काव किया ताकि नंगे पैर चल रहे अकीदतमंदों को किसी प्रकार की असुविधा न हो. यह दृश्य धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहयोग और मानवीय संवेदनाओं का भी परिचायक बना.
जुलूस मार्ग पर जगह-जगह धार्मिक तकरीरों का आयोजन किया गया. उलेमा-ए-किराम ने अपने संबोधनों में करबला की घटना, हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी, सत्य, इंसाफ, सब्र और मानवता के मूल्यों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि करबला का संदेश अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है.
इस वर्ष निकले जुलूसों में कुछ युवाओं ने विशेष संदेशों वाली टी-शर्ट और तख्तियां भी धारण कीं. इनमें करबला के संदेशों के साथ विश्व के विभिन्न संघर्षग्रस्त क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए आतंकवाद को मानवता और विश्व शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया गया. जुलूस के दौरान सामाजिक सौहार्द, शांति और भाईचारे का संदेश प्रमुख रूप से दिखाई दिया.
मोहर्रम के मद्देनजर भोपाल पुलिस ने पुराने शहर में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी. संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल, महिला पुलिस, यातायात पुलिस और क्विक रिस्पॉन्स फोर्स की तैनाती की गई. वरिष्ठ अधिकारी लगातार जुलूस मार्ग की निगरानी करते रहे. सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरों तथा ड्रोन के माध्यम से पूरे मार्ग पर नजर रखी गई. यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई प्रमुख मार्गों पर डायवर्जन लागू किया गया और भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई.
धार्मिक अनुशासन, शांतिपूर्ण माहौल और प्रशासन की सतर्क व्यवस्था के बीच मोहर्रम के सभी प्रमुख आयोजन सकुशल संपन्न हुए. आस्था, त्याग, सेवा और भाईचारे का संदेश देते हुए निकले मातमी जुलूसों ने एक बार फिर भोपाल की साझा सांस्कृतिक विरासत और गंगा-जमुनी तहजीब की मजबूत परंपरा को जीवंत कर दिया.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

