देहरादून. उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस वर्ष नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ रही है. यात्रा शुरू होने के महज 67 दिनों के भीतर चारधाम और उससे जुड़े तीर्थस्थलों में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 40 लाख का आंकड़ा पार कर गई है. हालांकि इस उपलब्धि के साथ एक चिंताजनक तथ्य भी सामने आया है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अब तक 201 श्रद्धालुओं की मृत्यु हो चुकी है. इसके बाद राज्य सरकार ने श्रद्धालुओं से स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा से पहले अनिवार्य स्वास्थ्य परीक्षण कराने की अपील की है.
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार 25 जून तक चारधाम यात्रा में कुल 40 लाख 3 हजार 158 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं. बुधवार को अकेले 37 हजार 617 श्रद्धालुओं ने सुरक्षित रूप से चारों धामों के दर्शन किए. इनमें बदरीनाथ धाम में सबसे अधिक 17 हजार 332 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि केदारनाथ धाम में 8 हजार 618 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए. गंगोत्री धाम में 3 हजार 674 और यमुनोत्री धाम में 3 हजार 98 श्रद्धालु पहुंचे. पहाड़ी जिलों में बीच-बीच में मौसम की बाधाओं के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बना हुआ है.
आंकड़ों के अनुसार इस यात्रा सत्र में अब तक केदारनाथ धाम सबसे अधिक श्रद्धालुओं वाला तीर्थस्थल बना हुआ है. यहां 13 लाख 21 हजार 67 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं. इसके बाद बदरीनाथ धाम में 12 लाख 85 हजार 167 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं. गंगोत्री धाम में 6 लाख 50 हजार 294 तथा यमुनोत्री धाम में 6 लाख 9 हजार 382 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं. अधिकारियों का मानना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा तो इस वर्ष यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों के सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है.
यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण होने वाली मौतों की संख्या में वृद्धि प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. 19 अप्रैल से 25 जून तक कुल 201 श्रद्धालुओं की मौत स्वास्थ्य संबंधी कारणों से दर्ज की गई है. इनमें सबसे अधिक 94 मौतें केदारनाथ धाम में हुई हैं. बदरीनाथ धाम में 63, यमुनोत्री धाम में 26 तथा गंगोत्री धाम में 18 श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई है. पिछले वर्ष यात्रा के शुरुआती 67 दिनों में यह संख्या 142 थी. इस वर्ष मौतों की संख्या बढ़ने के बाद प्रशासन ने चिकित्सा व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत किया है.
उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा मार्ग पर व्यापक स्वास्थ्य प्रबंधन योजना लागू की है. यात्रा मार्ग पर 178 चिकित्सा अधिकारी, 25 विशेषज्ञ चिकित्सक और 414 पैरामेडिकल कर्मियों की तैनाती की गई है. रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिलों में स्थित 47 स्थायी स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ किया गया है, जबकि यात्रा मार्ग पर 25 चिकित्सा राहत केंद्र पूरी क्षमता के साथ संचालित किए जा रहे हैं. प्रमुख पड़ावों और संवेदनशील स्थानों पर भी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को तत्काल उपचार मिल सके.
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने से पहले श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने के लिए देहरादून, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिलों में 57 स्वास्थ्य जांच केंद्र स्थापित किए गए हैं. इन केंद्रों पर उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह और अन्य गंभीर बीमारियों की जांच की जा रही है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ विशेष रूप से बुजुर्गों, हृदय रोगियों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही यात्रा करने की सलाह दे रहे हैं.
आपातकालीन सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए यात्रा मार्ग पर 177 एम्बुलेंस तैनात की गई हैं. उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के सहयोग से हेलीकॉप्टर रेस्क्यू सेवाओं को सक्रिय रखा गया है, जबकि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश द्वारा हेली एम्बुलेंस सेवा भी संचालित की जा रही है. इसके अलावा देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 13 भाषाओं में स्वास्थ्य परामर्श जारी किए गए हैं. यात्रा मार्ग पर महत्वपूर्ण स्थानों पर सावधानियों से जुड़े सूचना बोर्ड लगाए गए हैं और जागरूकता संबंधी पुस्तिकाओं का भी वितरण किया जा रहा है.
चारधाम यात्रा का शुभारंभ इस वर्ष 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुआ था. इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 24 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए. पर्यटन विभाग के अनुसार पिछले वर्ष चारधाम यात्रा के लिए 51 लाख से अधिक पंजीकरण हुए थे और इस वर्ष यह संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है. वर्ष 2024 में लगभग 48 लाख श्रद्धालुओं ने चारधाम और हेमकुंड साहिब के दर्शन किए थे, जबकि वर्ष 2023 में श्रद्धालुओं की संख्या 56 लाख से अधिक पहुंचकर नया रिकॉर्ड बना चुकी थी. प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा, स्वास्थ्य और यातायात व्यवस्थाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है ताकि यात्रा सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित होती रहे.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

