हिंदी सृजन को नई उड़ान, 23वें सृजनगाथा सम्मान के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित

हिंदी सृजन को नई उड़ान, 23वें सृजनगाथा सम्मान के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित

प्रेषित समय :22:01:34 PM / Fri, Jun 26th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं होता, वह समय की स्मृति, समाज की संवेदना और मनुष्य के आत्मबोध का दस्तावेज भी होता है। जब किसी सम्मान का उद्देश्य केवल पुरस्कार देना नहीं, बल्कि सृजनशीलता को पहचान देना और साहित्य की गरिमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना हो, तब वह सम्मान रचनाकारों के लिए उपलब्धि से कहीं अधिक विश्वास का प्रतीक बन जाता है। हिंदी साहित्य के ऐसे ही प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल 'सृजनगाथा डॉट कॉम सम्मान' के 23वें संस्करण की औपचारिक घोषणा के साथ ही देश और विदेश के साहित्यिक जगत में उत्साह का नया वातावरण बन गया है। संस्था ने कथाकारों, कवियों, प्रकाशकों, आलोचकों, साहित्य-प्रेमी पाठकों तथा साहित्यिक संस्थाओं से प्रविष्टियां आमंत्रित की हैं।

वर्षों से हिंदी साहित्य की सृजनधारा को नई ऊर्जा देने वाला यह सम्मान अपनी निष्पक्ष चयन प्रक्रिया, निरंतरता और साहित्य-केंद्रित दृष्टि के कारण विशिष्ट पहचान बना चुका है। यही कारण है कि इस सम्मान का इंतजार केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अनेक देशों में सक्रिय हिंदी रचनाकार भी करते हैं। हर वर्ष यह सम्मान किसी एक ऐसे रचनाकार को समर्पित किया जाता है, जिसने अपने लेखन से हिंदी साहित्य को नई दृष्टि, नई संवेदना और नई वैचारिक ऊर्जा प्रदान की हो।

संस्था के अनुसार इस वर्ष चयनित रचनाकार को 11 हजार रुपये की सम्मान राशि, शॉल, श्रीफल तथा प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि किसी भी सम्मान की वास्तविक प्रतिष्ठा उसकी राशि से नहीं, बल्कि उसके चयन की विश्वसनीयता और साहित्यिक स्वीकार्यता से तय होती है। यही कारण है कि सृजनगाथा सम्मान आज अनेक रचनाकारों के लिए विशेष महत्व रखता है।

23वें सृजनगाथा सम्मान के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक रचनाकार अपनी प्रविष्टियां 30 जुलाई 2026 तक भेज सकते हैं। चयन प्रक्रिया और नियमावली से संबंधित विस्तृत जानकारी संस्था के आधिकारिक ईमेल srijan2samman@gmail.com से प्राप्त की जा सकती है। आयोजकों ने अधिकाधिक साहित्यकारों से इस सम्मान में सहभागिता करने का आग्रह किया है।

इस वर्ष सम्मान समारोह भी विशेष महत्व का होगा। चयनित रचनाकार को 20 सितंबर 2026 को अंडमान-निकोबार के पोर्ट ब्लेयर में आयोजित होने वाले 26वें अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन के भव्य मंच पर सम्मानित किया जाएगा। समुद्र की गोद में बसे इस ऐतिहासिक नगर में देश-विदेश के साहित्यकारों का संगम एक बार फिर हिंदी भाषा और साहित्य की वैश्विक उपस्थिति को नई पहचान देगा। सम्मेलन में विभिन्न साहित्यिक विमर्श, काव्य पाठ, कहानी पाठ और संवाद सत्रों के साथ सम्मान समारोह भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगा।

सृजनगाथा डॉट कॉम सम्मान का इतिहास हिंदी साहित्य की अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियों का साक्षी रहा है। पिछले बाईस वर्षों में इस सम्मान से अनेक प्रतिष्ठित कवि, कथाकार और साहित्यकार सम्मानित हो चुके हैं। सम्मान प्राप्त करने वालों में डॉ. सुधीर सक्सेना, गीताश्री, एकांत श्रीवास्तव, संतोष श्रीवास्तव, डॉ. हरिसुमन बिष्ट, प्रबोध कुमार गोविल, कृष्ण बिहारी, पूर्णिमा वर्मन, असंग घोष, राकेश पांडे, राजेश श्रीवास्तव, कुमुद अधिकारी, शरद पगारे, गोविंद माथुर, शंभु बादल, सवाई सिंह शेखावत, निर्मला भुरड़िया, डॉ. मंजुला दास, डॉ. बीना बुदकी, डॉ. के. के. प्रजापति, डॉ. भीष्म उप्रेती और जयवर्धन जैसे प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं। यह सूची स्वयं इस सम्मान की साहित्यिक विश्वसनीयता और व्यापक स्वीकार्यता का परिचय देती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का उत्सव नहीं होते, बल्कि वे नई पीढ़ी के लेखकों को गंभीर साहित्य सृजन के लिए प्रेरित भी करते हैं। ऐसे आयोजनों से हिंदी साहित्य का दायरा निरंतर विस्तृत होता है और देश-विदेश में सक्रिय रचनाकारों के बीच संवाद की नई संभावनाएं विकसित होती हैं।

सृजनगाथा डॉट कॉम ने वर्षों से अपने ध्येय वाक्य "सृजन की गरिमा, साहित्य की प्रतिष्ठा" को केवल शब्दों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अपने कार्यों के माध्यम से सार्थक भी किया है। संस्था का प्रयास रहा है कि साहित्य के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले रचनाकारों को एक ऐसा मंच मिले, जहां उनके लेखन का सम्मान निष्पक्षता और गरिमा के साथ हो।

साहित्यिक जगत में 23वें सृजनगाथा सम्मान की घोषणा के बाद अनेक लेखकों, कवियों और साहित्य प्रेमियों के बीच सकारात्मक चर्चा शुरू हो गई है। सोशल मीडिया से लेकर साहित्यिक मंचों तक इस सम्मान को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। अनेक वरिष्ठ साहित्यकारों का मानना है कि ऐसे सम्मान हिंदी साहित्य की सृजन परंपरा को मजबूत करते हैं और नए लेखकों के लिए प्रेरणा का माध्यम बनते हैं।

अब साहित्य जगत की निगाहें 30 जुलाई 2026 पर टिक गई हैं, जब प्रविष्टियों का क्रम पूरा होगा। इसके बाद चयन प्रक्रिया प्रारंभ होगी और अंततः 20 सितंबर को पोर्ट ब्लेयर में वह क्षण आएगा, जब एक और रचनाकार सृजनगाथा सम्मान की गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनेगा। यह केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य के प्रति समर्पण, सृजनशीलता और सांस्कृतिक उत्तरदायित्व का सार्वजनिक सम्मान है, जिसकी प्रतिष्ठा वर्ष दर वर्ष और अधिक व्यापक होती जा रही है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-