पटना. बिहार में जमीन और जमाबंदी से जुड़े मामलों में पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि किसी सक्षम न्यायालय के आदेश के बिना केवल प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर न तो लगान रसीद रोकी जा सकती है और न ही जमाबंदी रद्द की जा सकती है. अदालत ने कहा कि यदि सरकार या उसके अधिकारियों को किसी जमाबंदी पर आपत्ति है तो उन्हें निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए सक्षम सिविल न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा.
यह फैसला न्यायमूर्ति सौरेंद्र पांडेय की एकलपीठ ने जमुई निवासी कृष्ण कुमार गोयनका द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया. मामले में अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता के पक्ष में लगभग 60 वर्षों से लगातार लगान रसीद जारी हो रही थी, लेकिन बाद में बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश के अचानक रसीद जारी करना बंद कर दिया गया और जमाबंदी रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई.
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल किया कि जब इतने वर्षों तक रिकॉर्ड में कोई विवाद नहीं था, तब अचानक किस आधार पर प्रशासनिक स्तर पर ऐसी कार्रवाई की गई. अदालत ने इस प्रक्रिया को कानून के अनुरूप नहीं माना.
मामले की सुनवाई के दौरान ही अंचल अधिकारी ने जमाबंदी रद्द करने की अनुशंसा आगे बढ़ा दी और अपर समाहर्ता ने उस पर कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी. इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि जब कोई मामला न्यायालय के विचाराधीन हो, तब कार्यपालिका ऐसा कोई कदम नहीं उठा सकती जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो.
अदालत ने अंचल अधिकारी और अपर समाहर्ता की कार्रवाई को अवैध करार देते हुए उसे तत्काल निरस्त कर दिया. साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के पक्ष में लगान रसीद जारी करने की प्रक्रिया तत्काल बहाल की जाए.
अपने फैसले में हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक अधिकारियों को किसी नागरिक के भूमि अधिकारों में हस्तक्षेप करने का असीमित अधिकार नहीं है. यदि सरकार को किसी जमाबंदी या भूमि अभिलेख पर संदेह है तो उसका समाधान न्यायालय के माध्यम से ही किया जाना चाहिए, न कि अधिकारियों के एकतरफा आदेश से.
अदालत ने कहा कि कानून के शासन में किसी व्यक्ति के वैध अधिकारों को केवल प्रशासनिक निर्णय के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता. ऐसी कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के भी विरुद्ध है. इसलिए राजस्व अधिकारियों को भविष्य में इस प्रकार के मामलों में विधिक प्रक्रिया का पूर्ण पालन करना होगा.
पटना हाईकोर्ट के इस फैसले को बिहार के लाखों भूमि स्वामियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. लंबे समय से राजस्व अधिकारियों द्वारा जमाबंदी रद्द करने और लगान रसीद रोकने की शिकायतें सामने आती रही हैं. अदालत के इस आदेश के बाद ऐसे मामलों में प्रशासनिक मनमानी पर रोक लगने और भूमि विवादों के समाधान के लिए न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

