नई दिल्ली. कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित साइबर हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और प्रमुख नियामक संस्थाओं को अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था तत्काल मजबूत करने के निर्देश दिए हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बदलते डिजिटल परिदृश्य में पारंपरिक सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं. ऐसे में सभी सरकारी संस्थानों को उन्नत सुरक्षा प्रणाली अपनाने के साथ-साथ भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल की सिफारिशों को तत्काल लागू करना होगा.
मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने 10 जून को सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तथा भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण तथा राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक सहित विभिन्न नियामक संस्थाओं को पत्र भेजकर साइबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा है.
पत्र में कहा गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जनरेटिव एआई, बड़े भाषा मॉडल, स्वायत्त डिजिटल एजेंट और एआई आधारित स्वचालन उपकरणों के तेजी से बढ़ते उपयोग ने साइबर सुरक्षा की चुनौतियों को पूरी तरह बदल दिया है. आधुनिक तकनीक जहां कार्यक्षमता बढ़ा रही है, वहीं साइबर अपराधियों को भी अधिक उन्नत और स्वचालित हमले करने की क्षमता प्रदान कर रही है. इस कारण सरकारी डिजिटल ढांचे की सुरक्षा पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल द्वारा जारी डिजिटल अवसंरचना को एआई आधारित कमजोरियों से सुरक्षित रखने संबंधी विस्तृत कार्ययोजना को तत्काल लागू करने की सिफारिश की है. इस कार्ययोजना में संस्थानों को समय-समय पर होने वाली सामान्य सुरक्षा जांच पर निर्भर रहने के बजाय निरंतर निगरानी, जोखिम मूल्यांकन, कमजोरियों की पहचान और तत्काल सुधार की प्रणाली अपनाने पर जोर दिया गया है.
नई कार्ययोजना के अनुसार इंटरनेट से जुड़े महत्वपूर्ण और संवेदनशील डिजिटल सिस्टम में यदि कोई ऐसी कमजोरी सामने आती है जिसका दुरुपयोग पहले से किया जा रहा हो, तो उसे यथासंभव 12 घंटे के भीतर दूर करने का प्रयास किया जाना चाहिए. वहीं बाहरी नेटवर्क से जुड़े अत्यंत संवेदनशील सिस्टम में पाई जाने वाली गंभीर सुरक्षा खामियों को अधिकतम एक दिन के भीतर ठीक करने या उनके प्रभाव को कम करने की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है.
मंत्रालय ने केवल सरकारी संस्थानों तक ही सुरक्षा उपाय सीमित नहीं रखे हैं, बल्कि सभी क्षेत्रों में कार्यरत उपकरण निर्माताओं और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के लिए भी नई साइबर सुरक्षा गाइडलाइन जारी करने के निर्देश दिए हैं. मंत्रालय ने राज्यों और विभागों से कहा है कि वे इन दिशा-निर्देशों को अपने अधीन कार्यरत सभी तकनीकी आपूर्तिकर्ताओं और मूल उपकरण निर्माताओं तक अनिवार्य रूप से पहुंचाएं, ताकि पूरे डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा मजबूत हो सके.
नई गाइडलाइन में उपकरण निर्माताओं और तकनीकी कंपनियों को अपने उत्पादों की नियमित सुरक्षा जांच करने, उनमें मौजूद संभावित कमजोरियों की पहचान करने तथा उपयोग किए जा रहे सभी सॉफ्टवेयर घटकों का अद्यतन विवरण सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है. इसके साथ ही किसी भी गंभीर सुरक्षा खामी का पता चलते ही उसकी जानकारी शीघ्र सार्वजनिक करने और आवश्यक सुरक्षा सुधार जारी करने पर विशेष बल दिया गया है.
मंत्रालय ने यह भी कहा है कि कंपनियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करते हुए अपने उत्पादों की नियमित जांच करें, संभावित साइबर हमलों का पूर्वानुमान लगाएं तथा सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत बनाएं. इससे नई तरह की डिजिटल चुनौतियों का तेजी से सामना किया जा सकेगा और साइबर हमलों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई आधारित साइबर हमले पारंपरिक हमलों की तुलना में कहीं अधिक तेज, स्वचालित और जटिल होते हैं. ऐसे हमलों में बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण कर कमजोरियों की पहचान कुछ ही समय में की जा सकती है. यही कारण है कि सरकार अब निरंतर निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया वाली सुरक्षा प्रणाली पर अधिक जोर दे रही है.
सरकार का मानना है कि देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था, सरकारी सेवाओं, वित्तीय प्रणाली और महत्वपूर्ण अवसंरचना को सुरक्षित बनाए रखने के लिए सरकारी विभागों, नियामक संस्थाओं, तकनीकी कंपनियों और उपकरण निर्माताओं के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं. नई गाइडलाइन इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य एआई आधारित साइबर खतरों से देश के डिजिटल ढांचे को अधिक सुरक्षित, सक्षम और लचीला बनाना है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

