हिमाचल की राजनीति में तीसरे मोर्चे की हलचल, 2027 चुनाव से पहले नई पार्टी बनाने की तैयारी तेज

हिमाचल की राजनीति में तीसरे मोर्चे की हलचल, 2027 चुनाव से पहले नई पार्टी बनाने की तैयारी तेज

प्रेषित समय :19:33:02 PM / Sun, Jun 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले तीसरे राजनीतिक विकल्प की चर्चा तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित पूर्व मंत्री राम लाल मरकंडा ने संकेत दिए हैं कि अगले वर्ष मार्च-अप्रैल तक एक नई राजनीतिक पार्टी का गठन किया जा सकता है। उनका दावा है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के कई वरिष्ठ नेता तथा कार्यकर्ता वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों से असंतुष्ट हैं और एक ऐसे नए मंच की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं, जहां अनुभवी नेताओं को सम्मान मिले तथा जनता के मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए। इस घोषणा के बाद प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

राम लाल मरकंडा ने बताया कि वह पिछले कुछ समय से विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क में हैं। उनके अनुसार पंचायत चुनावों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब नई राजनीतिक पार्टी के गठन को लेकर बातचीत और तेज होगी। उन्होंने कहा कि केवल चुनाव के समय पार्टी बनाकर टिकट से वंचित नेताओं को मैदान में उतारने की रणनीति पहले भी सफल नहीं रही है। इसलिए इस बार समय रहते संगठन खड़ा करने, मजबूत स्थानीय नेतृत्व तैयार करने और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में गंभीर एवं सक्रिय कार्यकर्ताओं को जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।

मरकंडा का कहना है कि प्रदेश में लंबे समय से कांग्रेस और भाजपा के बीच सत्ता परिवर्तन का सिलसिला चलता रहा है, लेकिन दोनों दलों के भीतर अनेक वरिष्ठ नेता स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका आरोप है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों में संगठनात्मक निर्णयों के दौरान पुराने और अनुभवी नेताओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विचारधारा की जगह चुनाव जीतना प्राथमिक उद्देश्य बन गया है, जिससे समर्पित कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ा है।

पूर्व मंत्री ने दावा किया कि प्रस्तावित नई पार्टी का मुख्य फोकस रोजगार, विकास और प्रदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर रहेगा। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा, वन संसाधन, जल, विद्युत उत्पादन और स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर नीति बनाकर राज्य की आय बढ़ाई जा सकती है। नई पार्टी जनता के सामने केवल राजनीतिक विकल्प नहीं बल्कि विकास का व्यावहारिक खाका भी प्रस्तुत करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी के पंजीकरण से पहले योग्य और जीतने की क्षमता रखने वाले उम्मीदवारों की पहचान की जाएगी, उसके बाद विस्तृत घोषणा-पत्र जारी किया जाएगा।

राम लाल मरकंडा वर्ष 2024 में भाजपा से निष्कासित कर दिए गए थे। उन्होंने लाहौल-स्पीति विधानसभा उपचुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा था। इस चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर आए रवि ठाकुर को टिकट दिया था, जबकि मरकंडा निर्दलीय मैदान में उतरे। अंततः कांग्रेस प्रत्याशी ने चुनाव जीत लिया। इस घटनाक्रम के बाद भाजपा के भीतर भी टिकट वितरण को लेकर असंतोष की चर्चा रही थी।

उधर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने तीसरे मोर्चे की संभावनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में पहले भी कई बार तीसरे मोर्चे के गठन की कोशिशें हुई हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी संभावनाएं हमेशा बनी रहती हैं, लेकिन राज्य की राजनीति का इतिहास बताता है कि अधिकांश प्रयास लंबे समय तक टिक नहीं सके। मुख्यमंत्री ने यह भी टिप्पणी की कि यदि नया राजनीतिक मोर्चा बनता है तो उसका असर भाजपा पर अधिक पड़ सकता है, क्योंकि भाजपा पहले से ही विभिन्न गुटों में बंटी हुई दिखाई देती है।

हालांकि राम लाल मरकंडा ने मुख्यमंत्री के इस बयान पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व पार्टी के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के समर्थकों के प्रभाव को कमजोर करना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने भी कई पुराने नेताओं की उपेक्षा कर कांग्रेस से आए नेताओं को प्राथमिकता दी, जिससे संगठन के भीतर असंतोष बढ़ा है। उनके अनुसार यही परिस्थितियां नए राजनीतिक विकल्प की आवश्यकता को मजबूत करती हैं।

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में तीसरे मोर्चे के प्रयास पहले भी कई बार किए जा चुके हैं। वर्ष 1997 में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखराम ने कांग्रेस से अलग होकर हिमाचल विकास कांग्रेस का गठन किया था। पार्टी ने 1998 के विधानसभा चुनाव में पांच सीटें जीतकर प्रभाव भी छोड़ा, लेकिन बाद में उसका अस्तित्व समाप्त हो गया और वह कांग्रेस में विलय हो गई। वर्ष 2012 में भाजपा के असंतुष्ट नेताओं ने हिमाचल लोकहित पार्टी बनाई, लेकिन उसे केवल एक सीट मिली और बाद में वह भी भाजपा में शामिल हो गई। इसी प्रकार जनता दल और लोक राज पार्टी जैसे राजनीतिक प्रयोग भी प्रदेश में लंबे समय तक प्रभाव नहीं छोड़ सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हिमाचल प्रदेश में दशकों से कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होता रहा है। ऐसे में किसी तीसरे दल के लिए मजबूत जनाधार तैयार करना आसान नहीं होगा। फिर भी यदि दोनों प्रमुख दलों के असंतुष्ट नेता एक साझा मंच पर आते हैं और संगठनात्मक स्तर पर मजबूत तैयारी करते हैं तो वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। फिलहाल नई पार्टी के गठन की औपचारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन इस पहल ने हिमाचल की राजनीतिक हलचल को निश्चित रूप से तेज कर दिया है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-