पेरिस में एस एस राजामौली का वैश्विक सम्मान, ऑस्कर विजेता कोस्टा गाव्रास ने लगातार आठ घंटे देखीं उनकी फिल्में

पेरिस में एस एस राजामौली का वैश्विक सम्मान, ऑस्कर विजेता कोस्टा गाव्रास ने लगातार आठ घंटे देखीं उनकी फिल्में

प्रेषित समय :19:35:39 PM / Sun, Jun 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

पेरिस. भारतीय सिनेमा के लिए एक और गौरवपूर्ण क्षण सामने आया है. विश्वभर में अपनी विशिष्ट फिल्म निर्माण शैली के लिए पहचाने जाने वाले निर्देशक एस एस राजामौली को फ्रांस की प्रतिष्ठित फिल्म संस्था सिनेमाथेक फ्रांसेज़ में स्थायी सम्मान प्रदान किया गया है. इस अवसर को और भी विशेष तब बना दिया जब ऑस्कर विजेता ग्रीक-फ्रांसीसी फिल्मकार कोस्टा गाव्रास ने राजामौली की फिल्मों का विशेष प्रदर्शन देखा और लगभग आठ घंटे तक उनकी फिल्मों तथा मास्टरक्लास में मौजूद रहे. इस सम्मान को भारतीय सिनेमा की वैश्विक स्वीकार्यता और बढ़ते प्रभाव का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है.

फ्रांस की ऐतिहासिक फिल्म संस्था सिनेमाथेक फ्रांसेज़ की स्थापना वर्ष 1936 में प्रसिद्ध फिल्म संरक्षक हेनरी लैंगलुआ ने की थी. यह संस्था विश्व सिनेमा की महान हस्तियों और उनकी कृतियों को संरक्षित एवं सम्मानित करने के लिए जानी जाती है. इसी संस्था में एस एस राजामौली को स्थायी स्थान दिया गया है. इस अवसर पर उनकी चर्चित फिल्में आरआरआर, ईगा और बाहुबली द बिगिनिंग का विशेष प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम का आयोजन भारतीय सिनेमा की वैश्विक यात्रा को समर्पित विशेष श्रृंखला के अंतर्गत किया गया, जिसमें मेलबर्न भारतीय फिल्म महोत्सव और भारत के विदेश मंत्रालय का भी सहयोग रहा.

सम्मान मिलने के बाद एस एस राजामौली ने सामाजिक माध्यम पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि पेरिस में उनकी फिल्मों का प्रदर्शन होना ही उनके लिए बड़े सम्मान की बात थी, लेकिन विश्व की सबसे प्रतिष्ठित फिल्म संस्थाओं में से एक में स्थायी स्थान मिलना उनके लिए अविस्मरणीय उपलब्धि है. उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहेगा. उन्होंने कोस्टा गाव्रास और सिनेमाथेक फ्रांसेज़ के सभी सदस्यों का भारतीय सिनेमा को मिले स्नेह और सम्मान के लिए आभार भी व्यक्त किया.

इस पूरे आयोजन का सबसे चर्चित क्षण तब सामने आया जब 93 वर्षीय ऑस्कर विजेता निर्देशक कोस्टा गाव्रास ने राजामौली की फिल्मों के प्रति असाधारण रुचि दिखाई. प्रारंभिक योजना के अनुसार वह केवल आरआरआर देखने वाले थे और अगले दिन ईगा देखने लौटने की बात कही थी. लेकिन पहली फिल्म देखने के बाद उन्होंने अपना कार्यक्रम बदल दिया. वह अपनी पत्नी के साथ दोबारा पहुंचे और लगातार लगभग आठ घंटे तक ईगा, बाहुबली द बिगिनिंग तथा राजामौली की मास्टरक्लास में उपस्थित रहे.

राजामौली के पुत्र एस एस कार्तिकेय ने इस अनुभव को साझा करते हुए बताया कि कोस्टा गाव्रास का यह व्यवहार पूरे दल के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा. उन्होंने कहा कि विश्व सिनेमा के इतने बड़े फिल्मकार का भारतीय फिल्मों के प्रति इतना सम्मान और उत्साह सभी कलाकारों के लिए गर्व का विषय है. कार्तिकेय ने कहा कि ऐसे क्षण फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों को लगातार बेहतर काम करने की प्रेरणा देते हैं.

एस एस राजामौली की फिल्मों ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सिनेमा की नई पहचान बनाई है. विशेष रूप से आरआरआर की वैश्विक सफलता और इसके गीत नाटू नाटू को मिला अकादमी पुरस्कार भारतीय फिल्म उद्योग के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जाता है. इसके बाद से राजामौली की फिल्मों और उनकी निर्देशन शैली को विश्व के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर सराहा जा रहा है.

वर्तमान में एस एस राजामौली अपनी अगली महत्वाकांक्षी फिल्म वाराणसी पर कार्य कर रहे हैं, जिसमें महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा जोनास और पृथ्वीराज सुकुमारन प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे. यह फिल्म वर्ष 2027 में वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित किए जाने की तैयारी में है. पेरिस में मिला यह सम्मान एक बार फिर इस बात का प्रमाण माना जा रहा है कि भारतीय सिनेमा अब केवल देश तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक और फिल्म संस्थाओं में भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर चुका है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-