नई दिल्ली. देश में सोने की लगातार ऊंची कीमतों के बीच उपभोक्ताओं का रुझान तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है. जहां पहले लोग पुराने आभूषणों को नए गहनों से बदलना अधिक पसंद करते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग अपने पुराने सोने को सीधे नकदी के बदले बेचकर मुनाफा सुरक्षित कर रहे हैं. उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जून 2026 की तिमाही के दौरान भारतीयों ने लगभग 50 टन पुराना सोना बेचा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 43 प्रतिशत अधिक है. विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में संभावित गिरावट की आशंका और ऊंचे दाम पर लाभ लेने की मानसिकता इस बदलाव का प्रमुख कारण है.
भारत बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के आधार पर सामने आई जानकारी के अनुसार हाल के महीनों में सोने के दाम रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने के बाद अब बड़ी संख्या में लोग अपने पुराने आभूषण बेचकर नकदी जुटा रहे हैं. पहले उपभोक्ता पुराने गहनों के बदले नए आभूषण खरीदना पसंद करते थे, लेकिन अब नकद भुगतान प्राप्त करने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है. इससे सर्राफा बाजार में पुराने सोने की आपूर्ति में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है.
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष की शुरुआत में सोने की कीमतें लगभग 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थीं. इसके बाद कीमतों में गिरावट आने से कई निवेशकों को यह आशंका है कि आने वाले समय में सोना और सस्ता हो सकता है. इसी संभावना को देखते हुए लोग वर्तमान कीमतों पर अपने आभूषण बेचकर लाभ सुरक्षित करना चाहते हैं. उनका मानना है कि यदि भविष्य में कीमतें और नीचे आती हैं तो वे कम कीमत पर फिर से सोना खरीद सकेंगे.
भारत बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता के अनुसार भारतीय उपभोक्ता इस समय सोने की ऊंची कीमतों का लाभ उठाकर नकदी प्राप्त करने की रणनीति अपना रहे हैं. उन्होंने बताया कि वर्ष की शुरुआत में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद कीमतों में कुछ गिरावट आई है, लेकिन बाजार में यह धारणा बनी हुई है कि भाव और नीचे जा सकते हैं. इसी कारण बड़ी संख्या में लोग पुराने आभूषण बेचकर लाभ अर्जित कर रहे हैं. इससे बाजार में पुराने सोने की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है.
दूसरी ओर मंगलवार को वायदा बाजार में सोने की कीमतों में शुरुआती गिरावट के बाद फिर तेजी दर्ज की गई. बहु-वस्तु विनिमय पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले 196 रुपये की बढ़त के साथ लगभग 1,42,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया. कारोबारियों के अनुसार शुरुआती कमजोरी के बाद निवेशकों ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों का दोबारा आकलन किया, जिससे सोने में खरीदारी लौट आई.
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी वैश्विक परिस्थितियां भी सोने की कीमतों को प्रभावित कर रही हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने के भाव में हल्की मजबूती देखी गई है, जिससे घरेलू बाजार में भी कीमतों को समर्थन मिला.
विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों की नजर अब अमेरिका के रोजगार संबंधी आगामी आंकड़ों और केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति पर टिकी हुई है. यदि ब्याज दरों में बदलाव होता है तो उसका सीधा असर वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों पर पड़ सकता है. इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर बनी अनिश्चितता भी सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को प्रभावित कर सकती है.
सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि इस समय बाजार में दो तरह की प्रवृत्तियां देखने को मिल रही हैं. एक ओर निवेशक भविष्य की संभावित गिरावट की आशंका को देखते हुए पुराने आभूषण बेच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ खरीदार कीमतों में आई नरमी को निवेश का अवसर मानकर नई खरीदारी भी कर रहे हैं. ऐसे में बाजार में मांग और आपूर्ति दोनों का संतुलन लगातार बदल रहा है.
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारतीय परिवारों के पास बड़ी मात्रा में घरेलू सोना सुरक्षित रहता है. जब भी कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचती हैं, तब उसका एक हिस्सा बाजार में बिक्री के लिए आने लगता है. इससे लोगों को नकदी उपलब्ध होती है और बाजार में पुराने सोने की आपूर्ति बढ़ जाती है. इस बार भी ठीक यही प्रवृत्ति देखने को मिली है, जिसके कारण अप्रैल से जून के बीच पुराने सोने की बिक्री में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया.
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में सोने की दिशा काफी हद तक वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, ब्याज दरों, डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और घरेलू मांग पर निर्भर करेगी. यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां स्थिर रहती हैं तो कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. फिलहाल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में भारतीय निवेशक और उपभोक्ता ऊंची कीमतों का लाभ उठाकर अपने पुराने सोने को नकदी में बदलने की रणनीति अपनाते दिखाई दे रहे हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

