रायपुर. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाला मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि जब मामले की जांच पहले से सक्षम एजेंसियों द्वारा की जा रही है, तब अदालत की निगरानी में नई जांच या Special Investigation Team (SIT) गठित करने का कोई औचित्य नहीं बनता.
याचिका धमतरी निवासी वरिष्ठ पत्रकार खिलवन चंद्राकर की ओर से दायर की गई थी. इसमें राज्य की आबकारी व्यवस्था में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए स्वतंत्र जांच, डिस्टिलरी लाइसेंस पर कार्रवाई, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने और वर्ष 2019 के बाद संचालित शराब इकाइयों का फोरेंसिक व वित्तीय ऑडिट कराने की मांग की गई थी.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य जांच एजेंसियों ने अदालत को बताया कि आर्थिक अपराध शाखा (EOW), एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और ED पहले से मामले की जांच कर रहे हैं तथा कई मामलों में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है.
हाईकोर्ट ने कहा कि QR Code आधारित परमिट, GPS Tracking और Digital Verification System जैसी व्यवस्थाएं लागू करना सरकार की नीतिगत जिम्मेदारी है. न्यायपालिका ऐसे प्रशासनिक और नीतिगत फैसलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती, जब तक कोई स्पष्ट कानूनी आधार मौजूद न हो.
अदालत ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचारों और दस्तावेजों के आधार पर याचिका दाखिल की थी तथा उसे इस मामले में कोई प्रत्यक्ष कानूनी या व्यक्तिगत नुकसान नहीं हुआ है.
जनहित याचिकाओं के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायालय का समय केवल वास्तविक सार्वजनिक हित के मामलों के लिए होना चाहिए. केवल प्रचार या निजी उद्देश्य से दाखिल याचिकाएं न्यायिक व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ डालती हैं.
इन्हीं आधारों पर अदालत ने याचिका को पूरी तरह मेरिटहीन मानते हुए खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता द्वारा जमा की गई Security Deposit को राजसात (Forfeit) करने का भी आदेश दिया.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

