पटना। बिहार की राजनीति में एक बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आने वाला है। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर जल्द ही पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ने का ऐलान कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार इस संबंध में आधिकारिक घोषणा 5 जुलाई को प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस में की जाएगी। यदि प्रशांत किशोर चुनावी मैदान में उतरते हैं तो यह मुकाबला केवल एक विधानसभा उपचुनाव नहीं रहेगा, बल्कि इसे बिहार की बदलती राजनीति और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले शक्ति परीक्षण के रूप में भी देखा जाएगा। खास बात यह है कि बांकीपुर विधानसभा सीट पिछले चार दशकों से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है और ऐसे में प्रशांत किशोर का यहां से चुनाव लड़ना सीधे तौर पर भाजपा को चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है।
बांकीपुर सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई है। नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी थी, जिसके चलते यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को होगी। इस चुनाव पर प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की भी नजर रहेगी।
प्रशांत किशोर पिछले कई वर्षों तक देश के चर्चित चुनावी रणनीतिकार के रूप में पहचान बना चुके हैं। विभिन्न राज्यों में कई राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और जन सुराज अभियान के माध्यम से बिहार में नया राजनीतिक विकल्प तैयार करने की कोशिश शुरू की। हालांकि अब तक वे स्वयं किसी चुनाव में उम्मीदवार नहीं बने थे। ऐसे में यदि वे बांकीपुर से चुनाव लड़ते हैं तो यह उनका पहला प्रत्यक्ष चुनावी मुकाबला होगा।
प्रशांत किशोर ने पिछले महीने ही संकेत दिए थे कि यदि उनकी पार्टी उन्हें उम्मीदवार बनाती है तो वह चुनाव लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा था कि यदि उनके चुनाव लड़ने से भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ टूट सकता है तो वह इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र पिछले 40 से 45 वर्षों से भाजपा का अभेद्य किला बना हुआ है और अब समय आ गया है कि वहां भी जनता को नया विकल्प मिले।
प्रशांत किशोर ने इस उपचुनाव को बिहार की नई एनडीए सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व की पहली बड़ी परीक्षा भी बताया था। उनका कहना था कि यह चुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं होगा, बल्कि यह तय करेगा कि नई सरकार के प्रति जनता का रुझान किस दिशा में है। उन्होंने दावा किया था कि यदि विपक्ष एकजुट होकर जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाए तो बांकीपुर जैसे पारंपरिक गढ़ में भी राजनीतिक बदलाव संभव है।
उधर भाजपा ने अभी तक इस सीट के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। हालांकि पार्टी के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का विषय मानी जा रही है। भाजपा पिछले कई चुनावों से यहां लगातार जीत दर्ज करती रही है और संगठन इस सीट को सुरक्षित बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है। ऐसे में प्रशांत किशोर की संभावित उम्मीदवारी से चुनावी मुकाबला पहले से कहीं अधिक रोचक होने की संभावना है।
वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा के नितिन नवीन ने यहां बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 98 हजार 299 मत प्राप्त हुए थे, जो कुल मतदान का लगभग 62.66 प्रतिशत था। राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार रेखा कुमारी को 46 हजार 363 वोट मिले थे और वह दूसरे स्थान पर रही थीं। वहीं जन सुराज पार्टी की उम्मीदवार वंदना कुमारी को केवल 7 हजार 717 मत मिले थे। इसके अलावा नोटा को 1 हजार 464 वोट मिले, जबकि आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार पंकज कुमार को 790 और निर्दलीय प्रत्याशी रवि कुमार को 666 मत प्राप्त हुए थे। अन्य सात उम्मीदवारों को मिलाकर कुल 1 हजार 586 वोट मिले थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रशांत किशोर स्वयं मैदान में उतरते हैं तो जन सुराज को इस सीट पर पिछली बार की तुलना में कहीं अधिक राजनीतिक बढ़त मिल सकती है। चुनावी रणनीतिकार के रूप में उनकी पहचान, बिहार में लगातार किए गए जनसंवाद अभियान और सरकार के खिलाफ उनके हमलों का असर मतदाताओं पर कितना पड़ता है, यह इस उपचुनाव में साफ दिखाई देगा। दूसरी ओर भाजपा अपने पारंपरिक वोट बैंक और संगठनात्मक मजबूती के भरोसे इस सीट को बचाने की कोशिश करेगी।
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का चुनाव परिणाम आगामी बिहार विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाले संकेत भी दे सकता है। यदि भाजपा यहां अपना गढ़ बचाने में सफल रहती है तो यह एनडीए सरकार के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त होगी। वहीं यदि प्रशांत किशोर इस सीट पर मजबूत चुनौती देते हैं या जीत हासिल करते हैं तो बिहार की राजनीति में जन सुराज एक नए और प्रभावशाली विकल्प के रूप में उभर सकती है।
फिलहाल सभी की निगाहें 5 जुलाई पर टिकी हैं, जब प्रशांत किशोर की संभावित उम्मीदवारी का आधिकारिक ऐलान होने की संभावना है। इसके बाद बांकीपुर उपचुनाव बिहार की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो जाएगा और राज्य की सियासत का केंद्र बन सकता है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

