नई दिल्ली. पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ छह महिला पहलवानों द्वारा दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. अदालत अब इस मामले में 3 अगस्त को फैसला सुनाएगी.
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने अभियोजन और बचाव पक्ष को दो सप्ताह के भीतर अपने लिखित तर्क प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया है.
बृजभूषण शरण सिंह पर भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने के उद्देश्य से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), धारा 354ए (यौन उत्पीड़न) तथा धारा 506(1) (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप तय किए गए हैं. वहीं, सह-आरोपी एवं डब्ल्यूएफआई के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर पर आपराधिक धमकी देने का आरोप है. इन धाराओं में अधिकतम पांच वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है.
यह मामला वर्ष 2023 में जंतर-मंतर पर कई प्रमुख महिला पहलवानों के लंबे आंदोलन के बाद सामने आया था. महिला खिलाड़ियों ने बृजभूषण शरण सिंह पर वर्षों तक कई महिला पहलवानों का यौन उत्पीड़न करने के आरोप लगाए थे और उनकी गिरफ्तारी व डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की थी.
आरोपों के बाद बृजभूषण शरण सिंह को भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद से हटाया गया, जबकि उनके करीबी सहयोगी विनोद तोमर को भी निलंबित कर दिया गया. केंद्रीय खेल मंत्रालय द्वारा जांच समिति गठित करने का आश्वासन मिलने पर आंदोलन कुछ समय के लिए स्थगित हुआ, लेकिन कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए पहलवानों ने अप्रैल 2023 में फिर प्रदर्शन शुरू कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 28 अप्रैल 2023 को दिल्ली पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की थीं. पहली एफआईआर छह वयस्क महिला पहलवानों की शिकायत पर दर्ज हुई, जबकि दूसरी एफआईआर एक नाबालिग पहलवान की शिकायत के आधार पर पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज की गई थी. दोनों एफआईआर में आरोप वर्ष 2012 से 2022 के बीच की घटनाओं से जुड़े बताए गए थे.
हालांकि, नाबालिग पहलवान द्वारा बाद में अपने आरोप वापस लेने और जांच में पर्याप्त पुष्ट साक्ष्य नहीं मिलने के आधार पर दिल्ली पुलिस ने पॉक्सो मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसे अदालत ने मई 2025 में स्वीकार कर लिया था.
दिल्ली पुलिस ने जून 2023 में बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करते हुए कहा था कि अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं. मई 2024 में अदालत ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए, जिन्हें उन्होंने अस्वीकार करते हुए मुकदमे का सामना करने का निर्णय लिया.
जुलाई 2024 से बंद कमरे (इन-कैमरा) में शुरू हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 32 गवाहों के बयान दर्ज कराए, जिनमें छह शिकायतकर्ता महिला पहलवानों के अलावा भारतीय कुश्ती महासंघ और भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) के अधिकारी भी शामिल थे.
अभियोजन पक्ष का कहना है कि सभी गवाहों के बयान शिकायतकर्ता महिला पहलवानों के आरोपों की पुष्टि करते हैं. वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपों को राजनीतिक और पद से हटाने की साजिश बताते हुए इन्हें निराधार करार दिया तथा गवाहों के बयानों में बदलाव का भी दावा किया. अब इस बहुचर्चित मामले में अदालत 3 अगस्त को अपना फैसला सुनाएगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

