छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: TET और B.Ed. पास होने पर भी अनुकंपा नियुक्ति में मनचाहा पद मांगने का अधिकार नहीं

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: TET और B.Ed. पास होने पर भी अनुकंपा नियुक्ति में मनचाहा पद मांगने का अधिकार नहीं

प्रेषित समय :15:23:34 PM / Fri, Jul 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि केवल उच्च शैक्षणिक योग्यता होने के आधार पर कोई भी अभ्यर्थी अपनी पसंद के या उच्च पद पर नियुक्ति का कानूनी दावा नहीं कर सकता. अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का मूल उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है, न कि योग्यता के आधार पर नियमित रोजगार प्रदान करना.

जस्टिस बिभू दत्त गुरु की एकल पीठ ने सक्ती जिले की निवासी मीनाक्षी चंद्रा की याचिका को खारिज करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा चपरासी (वर्ग-4) पद पर दी गई अनुकंपा नियुक्ति को वैध और नियमसम्मत माना.

मामले के अनुसार, मीनाक्षी चंद्रा के पति हीरा राम चंद्रा शासकीय प्राथमिक शाला लहंगा (सक्ती) में प्रधान पाठक के पद पर कार्यरत थे. 29 नवंबर 2025 को सेवाकाल के दौरान उनके निधन के बाद मीनाक्षी ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया. जिला शिक्षा अधिकारी ने 18 मार्च 2026 को उन्हें चपरासी (वर्ग-4) पद पर नियुक्ति प्रदान की.

याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा कि वह B.Ed. डिग्रीधारी हैं और छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) भी उत्तीर्ण कर चुकी हैं. इसलिए उन्हें शिक्षक (वर्ग-3) पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जानी चाहिए, न कि चपरासी के पद पर.

वहीं राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 15 अप्रैल 2024 की अनुकंपा नियुक्ति नीति के तहत वर्ग-3 के केवल 25 प्रतिशत पद ही अनुकंपा नियुक्ति के लिए आरक्षित हैं. संबंधित संभाग में उस समय शिक्षक पद के अनुकंपा कोटे की कोई रिक्ति उपलब्ध नहीं थी. ऐसे में नियमानुसार उपलब्ध रिक्त पद पर नियुक्ति दी गई.

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि किसी अभ्यर्थी के पास आवश्यक योग्यता होने मात्र से उसे उच्च पद पर नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता. अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सकीं कि शिक्षक पद पर अनुकंपा कोटे की कोई रिक्ति उपलब्ध थी या विभाग ने नीति का उल्लंघन किया.

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि अनुकंपा कोटे में संबंधित पद उपलब्ध नहीं है, तो विभाग द्वारा नियमों के अनुसार दिए गए पद को ही स्वीकार करना होगा. इस आधार पर हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए चपरासी पद पर दी गई नियुक्ति को बरकरार रखा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-