नई दिल्ली. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अपने 7 करोड़ से अधिक खाताधारकों को बड़ी राहत देते हुए भविष्य निधि (पीएफ) निकासी और क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया में बड़े सुधारों की घोषणा की है. नए नियमों के तहत अब पात्र पीएफ दावों का निपटारा महज 3 दिनों के भीतर किया जाएगा. इसके साथ ही सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए सरकार ने एक पूरी तरह से डिजिटल सिस्टम तैयार किया है, जिससे कागजी कार्रवाई बेहद कम हो जाएगी.
देरी होने पर अधिकारियों पर लगेगा 12 प्रतिशत का जुर्माना
ईपीएफओ द्वारा जारी संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, तय समय सीमा के भीतर दावों को प्रोसेस करना अनिवार्य होगा. यदि कोई अधिकारी बिना किसी वैध कारण के निर्धारित समय सीमा (अधिकतम 20 दिन) से ज्यादा की देरी करता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर 12 प्रतिशत की दर से दंडात्मक ब्याज लगाया जा सकता है. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि आपातकालीन स्थितियों या बेरोजगारी के दौरान अंशदाताओं को उनके पैसों के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े.
सिर्फ तीन श्रेणियों में सिमटे निकासी के नियम
कर्मचारियों के लिए क्लेम फाइल करने की जटिल प्रक्रिया को खत्म करते हुए ईपीएफओ ने कई पुरानी श्रेणियों को मिलाकर अब केवल तीन व्यापक श्रेणियों में विभाजित कर दिया है.
अब अंशदात इन प्रमुख कारणों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं
बीमारी- चिकित्सा आपातकाल या इलाज के खर्च के लिए.
शिक्षा-बच्चों या स्वयं की उच्च शिक्षा के लिए.
विवाह-परिवार में शादी-ब्याह के खर्चों की पूर्ति के लिए.
इसके अलावा, नौकरी छूटने की स्थिति में भी पीएफ फंड तक पहुंच को आसान बनाया गया है और इसके लिए आवश्यक सेवा अवधि की शर्तों में भी ढील दी गई है.
डिजिटल प्रोसेसिंग पर विशेष जोर
इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य एंड-टू-एंड ऑनलाइन क्लेम प्रोसेसिंग को बढ़ावा देना है. नई प्रणाली में मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम किया गया है, जिससे त्रुटियों की संभावना कम होगी. हालांकि, विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन दावों में अतिरिक्त सत्यापन या दस्तावेजों की जांच की आवश्यकता होगी, उनके निपटारे में मानक 3 दिनों से अधिक का समय लग सकता है.
वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए क्या बदल जाएगा?
संगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए यह नया ढांचा पीएफ निकासी को अधिक सुविधाजनक और तनाव मुक्त बनाएगा. इससे पहले पीएफ का पैसा निकालने के लिए कर्मचारियों को हफ्तों दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन पूरी तरह डिजिटल इंटीग्रेशन होने से अब यह काम घर बैठे उंगलियों पर हो सकेगा. ईपीएफओ का यह सुधार डिजिटल गवर्नेंस के जरिए देश की सामाजिक सुरक्षा सेवाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
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