झारखंड के वित्त मंत्री ने लौटाई वाई श्रेणी की सुरक्षा, गरिमा का हवाला देकर हटवाए आवास के बाहर तैनात गार्ड

झारखंड के वित्त मंत्री ने लौटाई वाई श्रेणी की सुरक्षा, गरिमा का हवाला देकर हटवाए आवास के बाहर तैनात गार्ड

प्रेषित समय :19:45:24 PM / Sun, Jul 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

रांची. झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा और असामान्य फैसला लेते हुए वाई श्रेणी की सुरक्षा वापस करने का निर्णय लिया है. उन्होंने अपने सरकारी आवास के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों को भी हटाने का आग्रह किया और स्पष्ट कहा कि उन्हें अब इस तरह की सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है. मंत्री के इस कदम के बाद पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा प्रोटोकॉल को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय सुरक्षाकर्मियों को कुछ दूरी पर तैनात कर दिया, ताकि उनकी सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे और सरकारी नियमों का भी पालन हो सके. इस फैसले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है.

जानकारी के अनुसार वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने शनिवार को स्पेशल ब्रांच के आईजी प्रभात कुमार और जैप-1 डोरंडा के कमांडेंट सह रांची के एसएसपी राकेश रंजन को पत्र लिखकर अपने आवास पर तैनात वाई श्रेणी की सुरक्षा वापस लेने का अनुरोध किया. उन्होंने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि उनके आवास के बाहर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती भी उन्हें स्वीकार नहीं है. इसके बाद उनकी सुरक्षा में लगे वाई श्रेणी के 16 पुलिसकर्मियों को वहां से हटा लिया गया. मंत्री ने सुरक्षा के लिए उपलब्ध कराई गई तीन बोलेरो और एक जिप्सी वाहन भी प्रशासन को लौटा दिए.

हालांकि मंत्री की सुरक्षा को लेकर निर्धारित सरकारी प्रोटोकॉल को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पूरी सुरक्षा व्यवस्था समाप्त नहीं की. सुरक्षा एजेंसियों ने सुरक्षाकर्मियों को कुछ दूरी पर तैनात रखा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके. शनिवार दोपहर जब वित्त मंत्री प्रोजेक्ट भवन पहुंचे, तब भी सुरक्षाकर्मी दूरी बनाकर उनके पीछे-पीछे चलते रहे. इसके बाद प्रदेश कांग्रेस कार्यालय जाने के दौरान भी पुलिसकर्मियों ने बिना प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की. शाम को जब मंत्री अशोक नगर स्थित अपने आवास पर लौटे, तब भी सुरक्षाबल के जवान कुछ दूरी पर तैनात रहे और पूरे क्षेत्र पर नजर बनाए रखी.

वित्त मंत्री ने अपने पत्र में कहा कि उन्होंने 29 जून को ही राज्य की पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्र को सुरक्षा वापस लेने संबंधी पत्र भेज दिया था. उन्होंने लिखा कि अब उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी वाई श्रेणी के सुरक्षाकर्मियों की नहीं होगी. मंत्री का कहना है कि वह उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र से आते हैं और लंबे समय से कठिन परिस्थितियों में काम करते रहे हैं. उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि वह उग्रवादियों और अपराधियों से मुकाबला करना जानते हैं तथा उनके लिए व्यक्तिगत गरिमा किसी भी सुरक्षा प्रोटोकॉल से अधिक महत्वपूर्ण है. इसी कारण उन्होंने सुरक्षा हटाने का फैसला लिया.

शनिवार को कुछ समय के लिए मंत्री के आवास के बाहर जैप और स्पेशल ब्रांच का कोई सुरक्षाकर्मी दिखाई नहीं दिया. हालांकि बाद में पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करते हुए फिर से कुछ दूरी पर सुरक्षा व्यवस्था कायम कर दी. रांची जिला बल की ओर से भी मंत्री की सुरक्षा के लिए न्यूनतम आवश्यक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से एक पुलिस अधिकारी ने उनके निजी सचिव से संपर्क किया. हालांकि इस संबंध में मंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई.

राधाकृष्ण किशोर के इस फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में विभिन्न तरह की चर्चाएं हो रही हैं. एक ओर इसे मंत्री के व्यक्तिगत निर्णय और सादगीपूर्ण कार्यशैली के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि संवैधानिक पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा केवल व्यक्तिगत इच्छा का विषय नहीं होती, बल्कि यह प्रशासनिक जिम्मेदारी और सुरक्षा प्रोटोकॉल का भी हिस्सा है. ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या अंतिम निर्णय लेते हैं और मंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को किस स्वरूप में आगे जारी रखा जाता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-