दिल्ली की बसें कचरे से बने हाइड्रोजन पर दौड़ेंगी, गडकरी ने बताया 2027 तक देश को कचरा मुक्त बनाने का विजन

दिल्ली की बसें कचरे से बने हाइड्रोजन पर दौड़ेंगी, गडकरी ने बताया 2027 तक देश को कचरा मुक्त बनाने का विजन

प्रेषित समय :19:29:27 PM / Tue, Jul 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश में स्वच्छ ऊर्जा और कचरा प्रबंधन को लेकर बड़ा विजन सामने रखते हुए कहा है कि भविष्य में दिल्ली की बसें नगर निगम के कचरे से तैयार हाइड्रोजन ईंधन पर चल सकती हैं. उन्होंने कहा कि यदि ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से पृथक्करण कर बायोडाइजेस्टर तकनीक के माध्यम से हाइड्रोजन तैयार किया जाए तो सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है. उन्होंने विश्वास जताया कि यह केवल कल्पना नहीं, बल्कि पूरी तरह संभव योजना है और आने वाले समय में इसे धरातल पर उतारा जा सकता है.

दिल्ली भाजपा द्वारा आयोजित एक युवा सम्मेलन को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि शहरों में प्रतिदिन निकलने वाले ठोस कचरे को अब समस्या नहीं बल्कि संसाधन के रूप में देखने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर बायोडाइजेस्टर के जरिए हाइड्रोजन गैस तैयार की जा सकती है. यही हाइड्रोजन भविष्य में दिल्ली की सार्वजनिक बसों के संचालन में इस्तेमाल होगी. उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से कचरे को ऊर्जा में बदलना पूरी तरह संभव है और इससे प्रदूषण कम होने के साथ-साथ ईंधन आयात पर निर्भरता भी घटेगी.

गडकरी ने भविष्य की परिवहन व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका सपना ऐसा भारत बनाने का है, जहां वाहन स्वच्छ ऊर्जा पर आधारित हों. उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में ऐसी तकनीक विकसित होगी, जिसमें पानी से हाइड्रोजन तैयार कर वाहनों का संचालन किया जा सकेगा. इस विचार पर संदेह जताने वालों को जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों में उन्होंने जो भी भविष्यवाणियां कीं, उनमें से अधिकांश समय के साथ सच साबित हुई हैं. उनका मानना है कि विज्ञान और तकनीक के बेहतर उपयोग से भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है.

उन्होंने दिल्ली के लैंडफिल स्थलों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब तक लगभग 80 लाख टन कचरे का उपयोग एक्सप्रेस-वे निर्माण में किया जा चुका है. यह उदाहरण बताता है कि यदि वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाए तो वर्षों से जमा कचरा भी विकास परियोजनाओं में उपयोगी साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक देश को बड़े पैमाने पर कचरा मुक्त बनाने का है. इसके लिए नगर निकायों, राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के बीच समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं.

गडकरी ने कचरे के आर्थिक महत्व पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि उनके संसदीय क्षेत्र में नगर निगम उपचारित अपशिष्ट जल की बिक्री से प्रतिवर्ष लगभग 325 करोड़ रुपये की आय अर्जित कर रहा है. उनका कहना था कि यदि देश के अन्य शहर भी इसी मॉडल को अपनाएं तो कचरा और अपशिष्ट जल आय का बड़ा स्रोत बन सकते हैं. इससे स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा.

इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने ई-20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण वाहनों में खराबी आने के दावे निराधार हैं. उन्होंने आलोचकों को चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी एक भी कार में ई-20 पेट्रोल के कारण तकनीकी खराबी आई हो तो उसका उदाहरण सामने रखा जाए. उनके अनुसार अब तक ऐसा कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है.

गडकरी ने आरोप लगाया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के खिलाफ झूठे प्रचार और भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और लोगों को गुमराह करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि ई-20 ईंधन को लागू करने से पहले वर्षों तक परीक्षण किए गए हैं और इसके बाद ही इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू किया गया है.

उन्होंने कहा कि भारत हर वर्ष पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर लगभग 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है. यदि वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग बढ़ाया जाए तो विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत संभव है. साथ ही जीवाश्म ईंधनों के उपयोग में कमी आने से कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि एथेनॉल, बायोफ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोत भारत के भविष्य की आवश्यकता हैं.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास को साथ लेकर चलने के लिए नई तकनीकों को तेजी से अपनाना होगा. उन्होंने विश्वास जताया कि कचरे से हाइड्रोजन उत्पादन, अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण, एथेनॉल मिश्रित ईंधन और अन्य हरित तकनीकें आने वाले वर्षों में भारत की परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकती हैं. उनका कहना था कि यदि वैज्ञानिक सोच और आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जाए तो कचरा भी देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण संसाधन बन सकता है.

उन्होंने युवाओं से भी नवाचार और स्वच्छ तकनीकों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल सरकार के प्रयासों से नहीं बल्कि समाज, उद्योग और नई पीढ़ी की भागीदारी से संभव होगा. गडकरी ने भरोसा जताया कि स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास के क्षेत्र में भारत आने वाले वर्षों में दुनिया के लिए एक नया मॉडल प्रस्तुत करेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-