नई दिल्ली। इंग्लैंड के खिलाफ जारी टी-20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में भारतीय टीम के खराब प्रदर्शन के बीच विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने का फैसला विवाद का विषय बन गया है। तीसरे टी-20 मुकाबले में भारत को 125 रन की बड़ी हार झेलने के बाद मुख्य कोच गौतम गंभीर से संजू सैमसन की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल पूछे गए। गंभीर ने कहा कि इस फैसले के पीछे की पूरी जानकारी उन्होंने निजी तौर पर संजू सैमसन को दे दी है, लेकिन वह उस बातचीत का विवरण सार्वजनिक नहीं करेंगे। हालांकि, उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर क्रिकेट प्रशंसकों और विशेषज्ञों ने टीम चयन की पारदर्शिता और निरंतरता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी-20 श्रृंखला में भारतीय टीम लगातार दो मुकाबले हार चुकी है। पहला मैच बारिश के कारण धुल गया था, जबकि दूसरे मुकाबले में भारत को चार विकेट से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद तीसरे टी-20 में टीम को 125 रन की करारी शिकस्त मिली। लगातार निराशाजनक प्रदर्शन के बाद टीम प्रबंधन के फैसलों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
संजू सैमसन को पहले टी-20 मैच में केवल एक रन बनाने के बाद टीम से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद उनकी जगह 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को दूसरे मुकाबले में पदार्पण का अवसर दिया गया। इस फैसले के बाद संजू सैमसन और मुख्य कोच गौतम गंभीर के बीच लंबी बातचीत भी हुई थी। हालांकि टीम प्रबंधन ने उस समय चयन के कारणों का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया था।
तीसरे टी-20 के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब गंभीर से सैमसन को बाहर रखने का कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस विषय पर उनकी संजू सैमसन से स्पष्ट और ईमानदार बातचीत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि एक मुख्य कोच और खिलाड़ी के बीच हुई बातचीत गोपनीय होती है और वह उसके विषय में सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बताएंगे। गंभीर ने यह भी कहा कि टीम प्रबंधन इस बात से पूरी तरह अवगत है कि संजू सैमसन ने भारत के लिए, विशेष रूप से टी-20 विश्व कप के दौरान, शानदार प्रदर्शन किया है। लेकिन किसी खिलाड़ी के मौजूदा फॉर्म को भी ध्यान में रखना पड़ता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि सैमसन इस श्रृंखला में वापसी नहीं कर सकते।
गौरतलब है कि इसी वर्ष खेले गए टी-20 विश्व कप में संजू सैमसन ने भारतीय टीम की खिताबी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने सुपर-8 चरण में वेस्टइंडीज के खिलाफ, सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ और फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ अहम पारियां खेली थीं। पूरे टूर्नामेंट में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार भी मिला था। ऐसे में हालिया श्रृंखला में केवल कुछ कम स्कोर के बाद उन्हें टीम से बाहर किए जाने पर कई पूर्व क्रिकेटरों और प्रशंसकों ने सवाल उठाए हैं।
गौतम गंभीर के बयान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स सहित विभिन्न माध्यमों पर बड़ी संख्या में प्रशंसकों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। कई लोगों का कहना है कि तीन असफल पारियों के आधार पर किसी खिलाड़ी को बाहर करना उचित नहीं है, खासकर तब जब उसने हाल ही में विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में मैच विजेता प्रदर्शन किया हो। कई प्रशंसकों ने चयन प्रक्रिया में एकरूपता और समान मानकों की मांग करते हुए कहा कि अन्य खिलाड़ियों को लगातार अवसर दिए जाते हैं, जबकि संजू सैमसन को बार-बार खुद को साबित करने की स्थिति में ला दिया जाता है।
क्रिकेट प्रेमियों का यह भी मानना है कि सवाल केवल सैमसन की वापसी का नहीं, बल्कि उन्हें पर्याप्त अवसर दिए जाने का है। सोशल मीडिया पर कई प्रतिक्रियाओं में चयन नीति को लेकर निराशा व्यक्त की गई और टीम प्रबंधन से पारदर्शी निर्णय लेने की अपेक्षा जताई गई।
संजू सैमसन के टी-20 अंतरराष्ट्रीय करियर पर नजर डालें तो उन्होंने अब तक 65 मैचों में 1405 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके नाम तीन शतक और छह अर्धशतक दर्ज हैं। उनका औसत 27.01 और स्ट्राइक रेट 155.42 रहा है, जो उनकी आक्रामक बल्लेबाजी शैली को दर्शाता है।
अब सभी की नजरें इंग्लैंड के खिलाफ श्रृंखला के शेष दो मुकाबलों पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि टीम प्रबंधन संजू सैमसन को दोबारा प्लेइंग इलेवन में मौका देता है या नहीं। दूसरी ओर भारतीय टीम भी बाकी बचे मुकाबलों में जीत दर्ज कर श्रृंखला में सम्मानजनक वापसी करने की कोशिश करेगी। फिलहाल संजू सैमसन को बाहर रखने का फैसला भारतीय क्रिकेट में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है और चयन नीति को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

