ग्वालियर। मानसून के सक्रिय होते ही ग्वालियर जिले में सर्पदंश (सांप के काटने) के मामलों में अचानक तेजी आ गई है। लगातार हो रही बारिश के बीच खेतों और रिहायशी इलाकों में सांपों की आवाजाही बढ़ने से जिले में लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। जयारोग्य चिकित्सालय (जेएएच) के हजार बिस्तर अस्पताल स्थित मेडिसिन आईसीयू में सामान्य दिनों की तुलना में मरीजों की संख्या कई गुना बढ़ गई है। जहां आमतौर पर प्रतिदिन तीन से चार सर्पदंश के मरीज उपचार के लिए पहुंचते थे, वहीं एक ही दिन में रिकॉर्ड 17 मरीजों को गंभीर हालत में भर्ती किया गया। चिकित्सकों के अनुसार सभी मरीजों का उपचार जारी है और उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में एंटी स्नेक वीनम इंजेक्शन का अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध करा दिया है तथा लोगों से झाड़-फूंक के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचने की अपील की है।
जयारोग्य चिकित्सालय के आंकड़ों के अनुसार सर्पदंश के अधिकांश मामले ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आ रहे हैं। विशेष रूप से डबरा और भितरवार विकासखंड सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर सांपों के संपर्क में आने से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। लगातार बारिश के कारण सांप अपने बिलों से बाहर निकलकर खेतों, घरों और आसपास के इलाकों में पहुंच रहे हैं, जिससे सर्पदंश की घटनाओं में तेजी आई है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार भितरवार क्षेत्र में मानसून के दौरान हर वर्ष बड़ी संख्या में सर्पदंश के मरीज सामने आते हैं। यही कारण है कि केवल भितरवार अस्पताल में ही बारिश के मौसम में 100 से 150 एंटी स्नेक वीनम इंजेक्शन की खपत हो जाती है। इस बार भी मरीजों की संख्या बढ़ने के संकेत मिलने के बाद पहले से ही पर्याप्त दवाओं और इंजेक्शनों की व्यवस्था कर ली गई है, ताकि किसी भी मरीज को उपचार में देरी का सामना न करना पड़े।
मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात के तौर पर अस्पतालों में एंटी स्नेक वीनम का स्टॉक बढ़ा दिया है। विभाग के मेडिसिन स्टोर में वर्तमान में 230 एंटी स्नेक वीनम इंजेक्शन उपलब्ध हैं। इसके अलावा डबरा और भितरवार के सरकारी अस्पतालों को 50-50 अतिरिक्त इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर ही मरीजों का तत्काल उपचार शुरू किया जा सके और गंभीर स्थिति में उन्हें समय पर राहत मिल सके।
जेएएच के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. संजय धवले ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सांप के काटने पर घबराने या झाड़-फूंक जैसी पारंपरिक मान्यताओं के भरोसे समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सर्पदंश की स्थिति में प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण होता है। यदि मरीज को समय पर सरकारी अस्पताल पहुंचाकर एंटी स्नेक वीनम दिया जाए तो अधिकांश मामलों में उसकी जान बचाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में यह उपचार निशुल्क उपलब्ध है।
चिकित्सकों ने लोगों को प्राथमिक सावधानियां अपनाने की भी सलाह दी है। उनके अनुसार यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो सबसे पहले उसे शांत रखें और घबराने न दें। प्रभावित अंग को स्थिर रखने का प्रयास करें तथा घाव को साफ पानी और हल्के साबुन से धो लें। इसके बाद बिना किसी देरी के मरीज को निकटतम सरकारी अस्पताल पहुंचाना चाहिए, ताकि समय रहते उपचार शुरू हो सके।
डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया कि सर्पदंश की स्थिति में कई ऐसी गलतियां हैं जो मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती हैं। घाव पर चीरा नहीं लगाना चाहिए, जहर चूसने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और प्रभावित अंग को कसकर नहीं बांधना चाहिए। इसके अलावा सांप को पकड़ने या मारने के प्रयास में समय गंवाने के बजाय मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना सबसे आवश्यक है।
स्वास्थ्य विभाग ने मानसून के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। लोगों से कहा गया है कि घर और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई बनाए रखें, झाड़ियों और कचरे को जमा न होने दें तथा खेतों या अंधेरे स्थानों पर जाते समय जूते या गमबूट अवश्य पहनें। रात के समय घर से बाहर निकलते समय टॉर्च का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है, ताकि सांप दिखाई देने पर दुर्घटना से बचा जा सके।
लगातार बढ़ रहे सर्पदंश के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि विभाग का कहना है कि अस्पतालों में पर्याप्त एंटी स्नेक वीनम उपलब्ध है और चिकित्सा दल पूरी तरह तैयार हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि लोग जागरूक रहें, प्राथमिक सावधानियां अपनाएं और सर्पदंश की स्थिति में बिना देरी अस्पताल पहुंचें, तो अधिकांश मामलों में जान बचाई जा सकती है। मानसून के दौरान ग्वालियर जिले में बढ़ते सर्पदंश के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेने की अपील की है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

