नए एलपीजी गैस कनेक्शन रोकने पर हाईकोर्ट ने बीपीसीएल से मांगा जवाब, पूछा सरकारी आदेश नहीं तो कनेक्शन क्यों बंद

नए एलपीजी गैस कनेक्शन रोकने पर हाईकोर्ट ने बीपीसीएल से मांगा जवाब, पूछा सरकारी आदेश नहीं तो कनेक्शन क्यों बंद

प्रेषित समय :20:26:01 PM / Wed, Jul 8th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. घरेलू एलपीजी गैस के नए कनेक्शन जारी करने पर कथित रोक का मामला अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंच गया है. अदालत ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) से सवाल किया कि यदि नए गैस कनेक्शन बंद करने संबंधी केंद्र या राज्य सरकार का कोई आदेश नहीं है, तो उपभोक्ताओं को कनेक्शन देने से क्यों रोका जा रहा है. न्यायालय ने बीपीसीएल को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय दिया है और स्पष्ट किया है कि मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी.

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ में हुई. याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी अनुकृति दीक्षित की ओर से अधिवक्ता राहुल राजपूत ने पक्ष रखा, जबकि बीपीसीएल की ओर से अधिवक्ता कपिल जैन न्यायालय में उपस्थित हुए. याचिका में आरोप लगाया गया है कि भारत पेट्रोलियम और उसके अधिकृत वितरक बिना किसी वैधानिक आदेश के नए घरेलू एलपीजी गैस कनेक्शन जारी करने से इनकार कर रहे हैं, जबकि ऐसा करने का कोई कानूनी आधार मौजूद नहीं है.

याचिका में कहा गया है कि नए गैस कनेक्शन पर रोक लगाने संबंधी न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार द्वारा कोई अधिसूचना, परिपत्र अथवा आदेश जारी किया गया है. इसके बावजूद उपभोक्ताओं को नया एलपीजी कनेक्शन देने से मना किया जा रहा है. याचिकाकर्ता का दावा है कि यह कार्रवाई आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 तथा एलपीजी (रेगुलेशन ऑफ सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन) ऑर्डर, 2000 के प्रावधानों के विपरीत है.

याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि एलपीजी नियंत्रण आदेश, 2000 के तहत पात्र उपभोक्ताओं को नए गैस कनेक्शन के पंजीयन अथवा वितरण से इनकार करना प्रतिबंधित श्रेणी में आता है. यदि सरकार ने किसी विशेष परिस्थिति में कनेक्शन रोकने का निर्णय लिया होता, तो उसके लिए स्पष्ट अधिसूचना या आदेश जारी किया जाता. ऐसी स्थिति में बिना किसी आधिकारिक निर्देश के उपभोक्ताओं को गैस कनेक्शन से वंचित रखना मनमाना और कानून के विरुद्ध माना जाना चाहिए.

सुनवाई के दौरान बीपीसीएल की ओर से अदालत को बताया गया कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और एलपीजी की सीमित उपलब्धता के कारण यह कदम अस्थायी रूप से उठाया गया है. कंपनी का कहना है कि वर्तमान समय में उसकी प्राथमिकता पहले से पंजीकृत उपभोक्ताओं को निर्बाध और नियमित गैस आपूर्ति सुनिश्चित करना है. सीमित आपूर्ति की स्थिति में नए कनेक्शन जारी करने से मौजूदा उपभोक्ताओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, इसलिए अस्थायी रूप से नए कनेक्शन देने की प्रक्रिया रोकी गई है.

हालांकि, अदालत ने इस तर्क पर तत्काल कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की, लेकिन बीपीसीएल से पूरे मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए. न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि कंपनी अपने उत्तर में यह भी बताए कि यदि कोई सरकारी आदेश नहीं है तो नए कनेक्शन रोकने का अधिकार किस आधार पर प्रयोग किया गया. अदालत ने कंपनी को 15 दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है.

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में घरेलू एलपीजी की मांग लगातार बनी हुई है और नए परिवारों तथा पात्र उपभोक्ताओं द्वारा नियमित रूप से नए गैस कनेक्शन के लिए आवेदन किए जा रहे हैं. ऐसे में यदि बिना किसी औपचारिक सरकारी आदेश के नए कनेक्शन रोके जाते हैं तो इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिन्हें पहली बार घरेलू गैस कनेक्शन की आवश्यकता है.

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में हाई कोर्ट का फैसला भविष्य में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की कार्यप्रणाली और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है. अदालत को यह तय करना होगा कि क्या किसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को केवल प्रशासनिक या व्यावसायिक कारणों से बिना किसी वैधानिक आदेश के नए एलपीजी कनेक्शन जारी करने से इनकार करने का अधिकार है, या फिर इसके लिए सरकार की स्पष्ट अनुमति आवश्यक है.

फिलहाल हाई कोर्ट ने मामले में कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया है, लेकिन बीपीसीएल से जवाब तलब कर यह संकेत जरूर दिया है कि बिना स्पष्ट सरकारी आदेश के उपभोक्ताओं को आवश्यक सेवा से वंचित किए जाने के आरोपों की न्यायिक जांच होगी. अब सभी की निगाहें दो सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां बीपीसीएल अपना विस्तृत पक्ष न्यायालय के समक्ष रखेगा और उसके आधार पर आगे की सुनवाई की दिशा तय होगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-