कान्हा में बाघों की मौत पर हाई कोर्ट ने सभी टाइगर रिजर्व से मांगी रिपोर्ट, दो हजार कुत्तों का हुआ वैक्सीनेशन

कान्हा में बाघों की मौत पर हाई कोर्ट ने सभी टाइगर रिजर्व से मांगी रिपोर्ट, दो हजार कुत्तों का हुआ वैक्सीनेशन

प्रेषित समय :18:56:47 PM / Thu, Jul 9th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) की आशंका के बीच बाघों की मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब करते हुए प्रदेश के सभी नौ टाइगर रिजर्व की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए. प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि बाघों की सुरक्षा से जुड़े सभी वैधानिक और प्रशासनिक प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया जाए तथा सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों को अक्षरशः लागू किया जाए.

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि कान्हा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में अब तक करीब दो हजार कुत्तों का वैक्सीनेशन किया जा चुका है. इसके साथ ही संक्रमण की रोकथाम के लिए इन कुत्तों को बूस्टर डोज देने की तैयारी भी की जा रही है. सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि वन्यजीवों में संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए निगरानी और बचाव के उपाय लगातार किए जा रहे हैं.

हाई कोर्ट ने केवल कान्हा टाइगर रिजर्व तक ही मामले को सीमित नहीं रखा, बल्कि प्रदेश के सभी नौ टाइगर रिजर्व में कुत्तों के वैक्सीनेशन, संक्रमण रोकथाम और वन्यजीव सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए. अदालत ने कहा कि सभी टाइगर रिजर्व में वाइल्ड लाइफ वेटरनरी डॉक्टरों के रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके. इसके अलावा डॉग्स बर्थ कंट्रोल कार्यक्रम को भी प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं.

यह सुनवाई मुंबई निवासी अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती द्वारा दायर जनहित याचिका पर हुई. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह और प्रतीक रूसिया ने पक्ष रखा. याचिका में अप्रैल और मई 2026 के दौरान कान्हा टाइगर रिजर्व में हुई आठ बाघों की मौत पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है. इनमें बाघिन टी-122 (सुनैना), टी-141 (अमाही), उसके चार अर्धवयस्क शावक तथा युवा नर बाघ टी-220 (महावीर) शामिल हैं. याचिका में आशंका जताई गई है कि इन मौतों के पीछे कैनाइन डिस्टेंपर वायरस संक्रमण एक संभावित कारण हो सकता है. साथ ही वैज्ञानिक निगरानी, जैव-सुरक्षा उपायों को मजबूत करने और पशु चिकित्सा व्यवस्था सुदृढ़ करने की मांग भी की गई है.

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि टाइगर रिजर्व से जुड़े मामलों में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए. साथ ही वन्यजीव संरक्षण से संबंधित सभी व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा कर प्रभावी कदम उठाए जाएं. मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को निर्धारित की गई है, जिसमें राज्य सरकार को सभी टाइगर रिजर्व की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट और अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-