लंदन. भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विकेटकीपर-बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदान लॉर्ड्स पर ऐसा इतिहास रच दिया, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा. यास्तिका महिला टेस्ट क्रिकेट में लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर शतक बनाने वाली पहली बल्लेबाज बन गई हैं. उनके शानदार और संयमपूर्ण शतक ने न केवल भारतीय महिला क्रिकेट को नई ऊंचाई दी, बल्कि विश्व महिला क्रिकेट के इतिहास में भी एक नया अध्याय जोड़ दिया.
लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे महिला टेस्ट मैच में यास्तिका भाटिया ने जिम्मेदारी भरी पारी खेलते हुए भारतीय टीम की बल्लेबाजी को मजबूती प्रदान की. उन्होंने शुरुआत से ही धैर्य, तकनीक और बेहतरीन शॉट चयन का परिचय दिया तथा इंग्लैंड के गेंदबाजों को लंबे समय तक सफलता से दूर रखा. उनकी यह पारी ऐसे मैदान पर आई है, जिसे क्रिकेट की दुनिया में "होम ऑफ क्रिकेट" कहा जाता है और जहां हर खिलाड़ी यादगार प्रदर्शन का सपना देखता है.
भारतीय पारी के दौरान यास्तिका तब बल्लेबाजी के लिए उतरीं जब सलामी बल्लेबाजों ने टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई थी. उन्होंने उपकप्तान स्मृति मंधाना के साथ तीसरे विकेट के लिए 73 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की. स्मृति मंधाना ने 130 गेंदों में शानदार 70 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया. मंधाना के आउट होने के बाद यास्तिका ने पारी की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली और दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरने के बावजूद धैर्य नहीं खोया.
मध्यक्रम में जेमिमा रोड्रिग्स केवल तीन रन और कप्तान हरमनप्रीत कौर 16 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं, लेकिन यास्तिका ने एक छोर संभाले रखा. इसके बाद उन्होंने दीप्ति शर्मा के साथ 52 रन की अहम साझेदारी कर भारतीय टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया. हालांकि दीप्ति शर्मा भी बड़ी पारी नहीं खेल सकीं, लेकिन यास्तिका अंत तक क्रीज पर टिककर इंग्लैंड के गेंदबाजों के सामने दीवार बनकर खड़ी रहीं.
अपनी पूरी पारी के दौरान यास्तिका ने संयम और तकनीकी दक्षता का शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने इंग्लैंड की प्रमुख गेंदबाज लॉरेन बेल और सोफी एक्लेस्टोन समेत पूरे गेंदबाजी आक्रमण का आत्मविश्वास के साथ सामना किया. बिना किसी अनावश्यक जोखिम के उन्होंने धीरे-धीरे रन जुटाए और शानदार अंदाज में अपना ऐतिहासिक शतक पूरा किया. जैसे ही उन्होंने तीन अंकों का आंकड़ा पार किया, लॉर्ड्स के मैदान पर मौजूद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनकी इस उपलब्धि का स्वागत किया.
यह शतक केवल यास्तिका भाटिया के करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव नहीं है, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के लिए भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि है. लॉर्ड्स जैसे प्रतिष्ठित मैदान पर महिला टेस्ट क्रिकेट में पहली बार किसी बल्लेबाज द्वारा शतक लगाए जाने का रिकॉर्ड अब उनके नाम दर्ज हो गया है. इससे पहले इस मैदान पर महिला टेस्ट क्रिकेट में कोई भी बल्लेबाज तीन अंकों तक नहीं पहुंच सकी थी.
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यास्तिका की यह पारी आने वाले वर्षों तक भारतीय महिला क्रिकेट की प्रेरणादायक पारियों में गिनी जाएगी. उन्होंने साबित किया कि बड़े मंच पर धैर्य, तकनीक और आत्मविश्वास के दम पर इतिहास रचा जा सकता है. उनकी बल्लेबाजी ने न केवल भारतीय टीम की स्थिति मजबूत की, बल्कि यह भी दिखाया कि महिला क्रिकेट का स्तर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है.
भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए यह उपलब्धि ऐसे समय आई है जब महिला क्रिकेट विश्वभर में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. लॉर्ड्स पर बना यह रिकॉर्ड युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा. क्रिकेट इतिहास में लॉर्ड्स पर कई महान बल्लेबाजों ने यादगार पारियां खेली हैं और अब यास्तिका भाटिया का नाम भी उसी प्रतिष्ठित सूची में शामिल हो गया है.
यास्तिका की यह ऐतिहासिक पारी भारतीय महिला क्रिकेट की बढ़ती ताकत और आत्मविश्वास का प्रतीक मानी जा रही है. उनके इस प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि भारतीय महिला टीम दुनिया के किसी भी मैदान पर बड़े रिकॉर्ड बनाने का माद्दा रखती है. अब क्रिकेट प्रेमियों की नजर इस बात पर रहेगी कि भारतीय टीम इस मजबूत बल्लेबाजी प्रदर्शन को जीत में बदलने में कितनी सफल होती है, लेकिन इतना तय है कि लॉर्ड्स के इतिहास में यास्तिका भाटिया का यह शतक हमेशा सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगा.
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