आरपीएफ में दारोगा बनाने का झांसा देकर 14 लाख की ठगी, फर्जी जॉइनिंग लेटर से खुला बड़ा खेल

आरपीएफ में दारोगा बनाने का झांसा देकर 14 लाख की ठगी, फर्जी जॉइनिंग लेटर से खुला बड़ा खेल

प्रेषित समय :20:03:36 PM / Sun, Jul 12th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ग्वालियर. सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के मामलों के बीच ग्वालियर में एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. शहर के थाटीपुर क्षेत्र में रहने वाली एक नर्सिंग ऑफिसर से उनके बेटे और बेटी को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) में दारोगा बनवाने का झांसा देकर 14 लाख रुपये ठग लिए गए. आरोपितों ने दोनों युवाओं को फर्जी नियुक्ति पत्र भी सौंप दिए. जब भाई-बहन नियुक्ति पत्र लेकर बिहार के दानापुर स्थित आरपीएफ पोस्ट पर ज्वाइनिंग के लिए पहुंचे, तब पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ. मामले में पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कर आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है.

पुलिस के अनुसार थाटीपुर थाना क्षेत्र स्थित सिविल डिस्पेंसरी के स्टाफ क्वार्टर में रहने वाली चंद्रलेखा सिंह डिस्पेंसरी में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं. कुछ समय पहले विक्रम राणा नाम का व्यक्ति अपने परिवार की एक महिला को डिलीवरी के लिए अस्पताल लेकर आया था. इसी दौरान उसकी पहचान चंद्रलेखा से हुई. बाद में दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और विक्रम को यह जानकारी मिली कि चंद्रलेखा का बेटा सिद्धार्थ और बेटी स्वाती सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं.

इसी का फायदा उठाते हुए विक्रम ने दावा किया कि उसकी बड़े अधिकारियों तक सीधी पहुंच है और वह दोनों बच्चों की आरपीएफ में दारोगा के पद पर नियुक्ति करा सकता है. उसने चंद्रलेखा की मुलाकात अपने दो साथियों अनूप और जितेंद्र से भी कराई. तीनों ने भरोसा दिलाया कि नियुक्ति पूरी तरह पक्की है और नियुक्ति पत्र मिलने के बाद ही रकम ली जाएगी. आरोपितों ने दोनों बच्चों की नौकरी लगवाने के एवज में सात-सात लाख रुपये, यानी कुल 14 लाख रुपये की मांग की.

बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने की उम्मीद में चंद्रलेखा ने अपनी वर्षों की जमा पूंजी में से 10 लाख रुपये बैंक से निकाले, जबकि चार लाख रुपये अपनी बहन से उधार लेकर आरोपितों को दे दिए. कुछ समय बाद आरोपितों ने दोनों युवाओं को आरपीएफ के कथित नियुक्ति पत्र सौंप दिए. दस्तावेज देखने के बाद परिवार को विश्वास हो गया कि नौकरी मिल गई है.

लेकिन जब सिद्धार्थ और स्वाती नियुक्ति पत्र लेकर बिहार के दानापुर रेलवे स्टेशन स्थित आरपीएफ कार्यालय में ज्वाइनिंग के लिए पहुंचे, तब अधिकारियों ने जांच के बाद स्पष्ट कर दिया कि नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी हैं और विभाग की ओर से ऐसा कोई नियुक्ति आदेश जारी ही नहीं किया गया है. इसके बाद परिवार ने विक्रम राणा से संपर्क किया, लेकिन वह लगातार बहाने बनाकर टालता रहा और बाद में संपर्क से बाहर हो गया.

पीड़िता ने पुलिस से शिकायत की, लेकिन आरोप है कि करीब छह माह तक थाने और वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद मामला दर्ज नहीं किया गया. आखिरकार उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. अदालत के निर्देश के बाद थाटीपुर पुलिस ने विक्रम राणा सहित उसके दो साथियों के खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की.

पुलिस का कहना है कि आरोपित फिलहाल फरार हैं और उनके मोबाइल फोन बंद आ रहे हैं. उनकी तलाश के लिए विभिन्न स्थानों पर दबिश दी जा रही है. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपितों ने इसी तरह अन्य लोगों को भी सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगी तो नहीं की है.

यह मामला एक बार फिर इस बात की चेतावनी देता है कि सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बड़े-बड़े दावे करने वाले दलालों और ठगों से सावधान रहना जरूरी है. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सरकारी नियुक्ति की प्रक्रिया केवल संबंधित विभाग की आधिकारिक चयन प्रणाली के माध्यम से ही होती है. ऐसे में किसी व्यक्ति के झांसे में आकर धनराशि देना न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है, बल्कि लंबे कानूनी संघर्ष का भी सामना करना पड़ सकता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-