जबलपुर. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने छतरपुर जिले की एक 9वीं कक्षा की नाबालिग छात्रा के 41 दिनों से लापता होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन से जवाब तलब किया है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान छतरपुर के पुलिस अधीक्षक और बड़ामलहरा थाना प्रभारी को मामले की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जैसे ही बालिका बरामद होती है, उसे तत्काल न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए ताकि उसकी सुरक्षा और परिस्थितियों का आकलन किया जा सके.
मामला छतरपुर जिले के बड़ामलहरा क्षेत्र का है, जहां रहने वाली 9वीं कक्षा की छात्रा 5 जून 2026 को सीएम राइज स्कूल में पूरक परीक्षा देने के लिए घर से निकली थी, लेकिन परीक्षा के बाद वापस नहीं लौटी. परिजनों ने उसी दिन उसकी तलाश शुरू की और पुलिस में गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई. बाद में मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई, लेकिन घटना के 41 दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस छात्रा का कोई सुराग नहीं लगा सकी. इससे निराश होकर परिजनों ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
याचिका में छात्रा की मां ने आरोप लगाया है कि उनकी नाबालिग बेटी को एक युवक बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया. यह भी आरोप लगाया गया कि इस घटना में अन्य लोगों ने भी उसका सहयोग किया. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक जैन, नितिन जैन, अभय सोहगौरा, सृजन नारंग, सुजीत चक्रवर्ती और अंकिता अग्रवाल ने पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित अधिकारियों को कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण अब तक छात्रा का पता नहीं चल सका. उन्होंने अदालत से मामले में त्वरित हस्तक्षेप की मांग की.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता राजवर्धन दत्त पधरिया उपस्थित हुए. अदालत ने पुलिस प्रशासन से पूछा कि घटना के इतने लंबे समय बाद भी छात्रा की बरामदगी क्यों नहीं हो सकी और अब तक जांच में क्या प्रगति हुई है. युगलपीठ ने निर्देश दिया कि पुलिस जांच की वर्तमान स्थिति, की गई कार्रवाई और आगे की रणनीति से संबंधित विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट निर्धारित समय के भीतर न्यायालय में प्रस्तुत की जाए.
हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह भी निर्देश दिया कि छात्रा के बरामद होने पर उसे तुरंत न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए. साथ ही, मामले में नामजद निजी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं. अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में जांच में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी.
इस मामले ने एक बार फिर नाबालिग बच्चों की सुरक्षा, पुलिस जांच की गति और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सभी की निगाहें छतरपुर पुलिस द्वारा हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जाने वाली स्टेटस रिपोर्ट और जांच की आगामी प्रगति पर टिकी हैं. अदालत की सख्ती के बाद उम्मीद की जा रही है कि पुलिस छात्रा की शीघ्र बरामदगी के लिए प्रयास तेज करेगी और मामले की निष्पक्ष एवं प्रभावी जांच सुनिश्चित करेगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

