दिल्ली हाई कोर्ट की बड़ी कार्रवाई जिला जज वीणा रानी निलंबित, सतर्कता जांच के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू

दिल्ली हाई कोर्ट की बड़ी कार्रवाई जिला जज वीणा रानी निलंबित, सतर्कता जांच के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू

प्रेषित समय :19:59:33 PM / Sat, Jul 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. दिल्ली न्यायपालिका में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई के तहत दिल्ली हाई कोर्ट ने दक्षिण-पूर्व जिला, साकेत कोर्ट में कार्यरत जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीणा रानी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय द्वारा आदेशित सतर्कता (विजिलेंस) जांच के बाद की गई है. हालांकि, फिलहाल हाई कोर्ट ने उन विशिष्ट कारणों का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया है, जिनके आधार पर यह जांच शुरू की गई और निलंबन का निर्णय लिया गया. न्यायालय ने केवल इतना स्पष्ट किया है कि उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित है.

सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय 10 जुलाई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्ण पीठ (फुल कोर्ट) की बैठक में लिया गया था. इसी बैठक में एक अन्य जिला न्यायाधीश विनय सिंघल को भी निलंबित करने का निर्णय लिया गया. न्यायपालिका में कम समय के भीतर दो वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध की गई यह कार्रवाई न्यायिक प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

वीणा रानी दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा (Delhi Higher Judicial Service) की वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी हैं. निलंबन से पहले वह नई दिल्ली स्थित साकेत न्यायालय परिसर के दक्षिण-पूर्व जिला न्यायालय में जिला न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थीं. वह वाणिज्यिक न्यायालय (Commercial Court) की अध्यक्षता कर रही थीं और व्यावसायिक विवादों से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही थीं. न्यायिक सेवा में लंबे अनुभव के कारण उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों में गिना जाता रहा है.

दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा उनके निलंबन की औपचारिक घोषणा 15 जुलाई 2026 को की गई. हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल अरुण भारद्वाज द्वारा जारी आधिकारिक प्रस्ताव (Resolution) में कहा गया कि वीणा रानी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित है. इसी कारण उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है.

जारी आदेश में कहा गया है कि यह कार्रवाई ऑल इंडिया सर्विसेज (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के नियम 3(1)(क) तथा दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा नियम, 1970 के नियम 27 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए की गई है. आदेश के अनुसार, जब तक निलंबन प्रभावी रहेगा, वीणा रानी का मुख्यालय दक्षिण-पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश (मुख्यालय), साकेत न्यायालय का कार्यालय रहेगा.

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि निलंबन की अवधि के दौरान वीणा रानी बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के दिल्ली की सीमा से बाहर नहीं जा सकेंगी. यह शर्त अनुशासनात्मक जांच के दौरान आवश्यक प्रशासनिक नियंत्रण और उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लगाई गई है.

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय द्वारा सतर्कता जांच के आदेश दिए जाने के बाद यह कार्रवाई सामने आई है. हालांकि, हाई कोर्ट ने अभी तक यह नहीं बताया है कि जांच किन शिकायतों, आरोपों या घटनाओं के आधार पर प्रारंभ की गई थी. न ही अनुशासनात्मक कार्यवाही की प्रकृति अथवा संभावित आरोपों का कोई आधिकारिक विवरण सार्वजनिक किया गया है. इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जांच का विषय क्या है और न्यायिक अधिकारी पर किस प्रकार के आरोपों की जांच की जा रही है.

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी न्यायिक अधिकारी का निलंबन दोष सिद्ध होने के समान नहीं माना जाता. यह केवल एक प्रशासनिक कदम होता है, जिससे प्रस्तावित अनुशासनात्मक जांच निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से पूरी की जा सके. जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाता है.

दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा हाल के दिनों में लगातार की गई प्रशासनिक कार्रवाइयों को न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे यह संकेत भी मिलता है कि न्यायिक संस्थान अपने अधिकारियों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों या संदिग्ध मामलों में सतर्कता जांच और अनुशासनात्मक प्रक्रिया अपनाने से पीछे नहीं हट रहे हैं.

फिलहाल वीणा रानी के विरुद्ध सतर्कता जांच जारी है और अनुशासनात्मक कार्यवाही पर अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा. जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों या संभावित अनियमितताओं पर कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है. ऐसे में इस मामले को केवल प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्रवाई और लंबित जांच के रूप में ही देखा जाना चाहिए. न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-