नई दिल्ली. संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले शिवसेना (यूबीटी) के लिए बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के छह बागी सांसदों के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मान्यता दे दी. इस फैसले के साथ ही दल-बदल कानून के तहत इन सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने को औपचारिक वैधता मिल गई है.
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने वाला है. करीब एक महीने पहले इन छह सांसदों ने उद्धव ठाकरे गुट से अलग होकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया था. अब लोकसभा अध्यक्ष द्वारा उनके विलय को मान्यता मिलने के बाद लोकसभा में शिंदे गुट की संख्या बढ़कर 13 सांसद हो गई है.
जानकारी के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट से अलग हुए इन छह सांसदों ने अपने विलय को औपचारिक मान्यता देने के लिए लोकसभा सचिवालय में आवेदन प्रस्तुत किया था. उन्होंने अनुरोध किया था कि उनके एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को स्वीकार किया जाए. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस आवेदन पर निर्णय लेते हुए उनके विलय को मान्यता प्रदान कर दी.
जिन छह सांसदों के विलय को मान्यता मिली है, उनमें संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व), संजय जाधव (परभणी), संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम), ओमप्रकाश भूपालसिंह निम्बालकर (धाराशिव), नागेश बापुराव पाटिल अष्टीकर (हिंगोली) और भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे (शिर्डी) शामिल हैं. ये सभी सांसद पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) का हिस्सा थे और बाद में शिंदे गुट में शामिल हो गए थे.
लोकसभा अध्यक्ष के इस निर्णय से पहले इन सांसदों के दल बदलने को लेकर राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चा चल रही थी. अब औपचारिक मान्यता मिलने के बाद संसद में उनकी नई राजनीतिक स्थिति स्पष्ट हो गई है. यह घटनाक्रम संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले आया है, जिससे लोकसभा में शिवसेना की शक्ति संतुलन पर भी असर पड़ा है.
इसी घटनाक्रम के बीच एक अन्य महत्वपूर्ण राजनीतिक विकास भी सामने आया है. रिपोर्ट के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों को लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था दी गई है. हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ने अभी तक उनके प्रस्तावित नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय को मान्यता नहीं दी है. इस कारण उनकी अलग बैठक व्यवस्था तो की गई है, लेकिन उनके विलय पर अंतिम निर्णय अभी लंबित है.
लोकसभा अध्यक्ष के फैसले के साथ शिवसेना (यूबीटी) से अलग हुए छह सांसदों का एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय अब संसदीय स्तर पर आधिकारिक रूप से मान्य हो गया है. यह फैसला संसद के मानसून सत्र से पहले महाराष्ट्र की राजनीति और लोकसभा की शक्ति संरचना दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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