नई दिल्ली. राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के सनसनीखेज मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए एक बड़ा आदेश पारित किया है. शीर्ष अदालत ने किसी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की अगुवाई में मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) का पुनर्गठन करने का सख्त निर्देश दिया है.
सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है. उन्होंने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि मामले की जांच तेज गति से जारी है और पुलिस अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है.
अदालत ने पूछा- किसके हाथों में है जांच की कमान
मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से सीधे तौर पर पूछा कि वर्तमान में इस मामले की जांच कौन कर रहा है. इस पर तुषार मेहता ने जवाब देते हुए कहा कि सच्चाई का पता लगाने के लिए ही एसआईटी बनाई गई थी और अब पुलिस इसकी जांच कर रही है. एसजी ने अदालत को बताया कि जांच एजेंसी ने अपनी तफ्तीश में पाया है कि यह पूरी तरह से एक संज्ञेय अपराध (कॉग्निजेबल ऑफेंस) है, जिसमें पुलिस को बिना वारंट के गिरफ्तारी करने का अधिकार होता है.
सीजेआई की दो टूक- राजनीतिकरण न करें
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने मामले को लेकर हो रही बयानबाजी पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि इस पूरे मुद्दे का किसी भी तरह से राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए. चीफ जस्टिस ने सख्त लहजे में कहा कि अदालतें राजनीति करने की जगह नहीं हैं, यह सीधे तौर पर अपराध को अंजाम देने का एक साधारण मामला है. उन्होंने एसजी तुषार मेहता से कहा कि एसआईटी में वरिष्ठ सदस्य शामिल थे, ऐसे में पता करें कि क्या जांच के लिए नई एसआईटी बनाई जा सकती है, जिस पर एसजी ने सहमति जताते हुए नई टीम बनाकर रिकॉर्ड पर रखने की बात कही. अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी, जहां उत्तर प्रदेश सरकार अदालत को एसआईटी जांच के बारे में विस्तृत जानकारी देगी.
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