आलीराजपुर. एमपी के आलीराजपुर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में वित्तीय अनियमितता का बड़ा मामला सामने आया है. बैंक की एक शाखा से 24 लाख 12 हजार 326 रुपये की नकद राशि गायब मिलने के बाद बैंक प्रबंधन और प्रशासन में हड़कंप मच गया.
प्रारंभिक जांच में कैशियर पर गबन का आरोप सामने आया है, जो घटना के बाद से फरार बताया जा रहा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक प्रबंधन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित कैशियर और शाखा प्रबंधक को निलंबित कर दिया है. अब पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
फंड की मांग से पैदा हुआ संदेह
बैंक के महाप्रबंधक आरजू इकबाल खान ने बताया कि संबंधित शाखा ने अतिरिक्त फंड जारी करने की मांग की थी. जबकि फंड मैनेजर के पास पहले से यह जानकारी थी कि शाखा में पर्याप्त नकदी उपलब्ध है. इस विरोधाभास के बाद बैंक प्रबंधन को संदेह हुआ और विशेष जांच दल को मौके पर भेजा गया. जांच के दौरान कैश का मिलान किया गया तो 24 लाख 12 हजार 326 रुपये की कमी सामने आई. इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ.
कैशियर फरार, शाखा प्रबंधक पर भी गिरी गाज
प्रारंभिक जांच में लेखापाल सह कैशियर वेलसिंह पलासिया पर गबन का आरोप लगा है. घटना सामने आने के बाद से वह फरार है. वहीं, शाखा के प्रभारी प्रबंधक जामसिंह भाभर को भी गंभीर लापरवाही और प्रभावी निगरानी नहीं रखने का दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. बैंक सेवा नियमों के तहत जारी आदेश में कहा गया है कि शाखा प्रबंधक अपने प्रशासनिक दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन करने में विफल रहे. निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय पेटलावद शाखा निर्धारित किया गया है.
एफआईआर की तैयारी
बैंक प्रबंधन ने आरोपित कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच के बाद अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी सामने लाई जाएगी. गौरतलब है कि करीब दो वर्ष पहले भी इसी बैंक में खाताधारकों की गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग कर खातों से अवैध निकासी का मामला सामने आया था. लगातार दूसरी बार वित्तीय अनियमितता उजागर होने से बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
खाताधारकों में बढ़ी चिंता
ताजा गबन के खुलासे के बाद बैंक के खाताधारकों में चिंता और नाराजगी बढ़ गई है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अनियमितताओं पर सख्ती नहीं की गई तो सहकारी बैंकिंग व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ सकता है. अब सभी की नजर पुलिस जांच और बैंक प्रबंधन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

