नीट पेपर लीक मामले में संजीव मुखिया को CBI से राहत, जांच में साजिश से जुड़े सबूत नहीं मिले

नीट पेपर लीक मामले में संजीव मुखिया को CBI से राहत, जांच में साजिश से जुड़े सबूत नहीं मिले

प्रेषित समय :20:37:27 PM / Thu, Jul 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अनिल मिश्र/ पटना 
पटना. देशभर में चर्चित नीट यूजी-2024 पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच ने नया मोड़ ले लिया है. जांच एजेंसी ने अपनी जांच में कहा है कि परीक्षा माफिया के रूप में चर्चित संजीव कुमार उर्फ संजीव मुखिया के खिलाफ ऐसे पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं, जिनसे यह साबित हो सके कि वह नीट यूजी प्रश्नपत्र की चोरी, उसे हल कराने अथवा अभ्यर्थियों तक पहुंचाने की साजिश में शामिल था. हालांकि संजीव मुखिया फिलहाल बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है. सीबीआई की इस जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है.

देशभर में नीट पेपर लीक को लेकर पिछले लंबे समय से विरोध-प्रदर्शन जारी हैं. बिहार की राजधानी पटना में बुधवार को छात्रों ने उग्र प्रदर्शन किया था, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई. इस दौरान कई पुलिसकर्मी और मीडियाकर्मी घायल हुए थे. वहीं गुरुवार को सीमांचल के कटिहार जिले में भी छात्रों ने समाहरणालय के बाहर प्रदर्शन किया, जहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया.

इसी बीच सीबीआई ने अपनी जांच की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि विस्तृत अनुसंधान के दौरान ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला, जिससे यह सिद्ध हो सके कि संजीव मुखिया प्रश्नपत्र चोरी करने, उसे हल कराने या अभ्यर्थियों तक पहुंचाने की पूरी साजिश का हिस्सा था. एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्य संजीव मुखिया की भूमिका को इस षड्यंत्र से जोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं हैं.

सीबीआई ने यह भी बताया कि उसने मामले की गहन जांच के दौरान पेपर लीक की पूरी साजिश का खुलासा किया है तथा इसमें शामिल प्रमुख आरोपियों की पहचान कर ली है. जांच एजेंसी के अनुसार, उन अभ्यर्थियों की भी पहचान की गई है जिन्हें चोरी हुए प्रश्नपत्र का लाभ मिला था. कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनके खिलाफ आरोपपत्र भी न्यायालय में दाखिल किए जा चुके हैं.

जांच एजेंसी के अनुसार, नीट यूजी-2024 पेपर लीक की साजिश का केंद्र झारखंड के हजारीबाग स्थित ओएसिस स्कूल को माना गया. जांच में सामने आया कि वहीं से प्रश्नपत्रों के अवैध रूप से बाहर आने और उन्हें हल कराने की प्रक्रिया शुरू हुई थी. बाद में हल किए गए प्रश्नपत्र कुछ अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए. इसी आधार पर प्रारंभिक जांच बिहार आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने की थी.

शुरुआती जांच के दौरान संजीव मुखिया पर संदेह इसलिए गया था क्योंकि उसका नाम पहले भी अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के कथित पेपर लीक मामलों में सामने आ चुका था. इसी आधार पर बिहार पुलिस ने उसे आरोपी बनाया था और ईओयू ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी प्रस्तुत की थी. बाद में यही रिपोर्ट आगे की जांच के लिए सीबीआई को सौंप दी गई.

सीबीआई ने जांच संभालने के बाद तकनीकी और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच की. एजेंसी ने कई संदिग्धों से पूछताछ की, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण किया तथा अनेक आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. लेकिन एजेंसी का कहना है कि संजीव मुखिया के संबंध में उपलब्ध साक्ष्य यह साबित नहीं करते कि उसने प्रश्नपत्र चोरी कराया, लीक कराया या अभ्यर्थियों तक पहुंचाने में कोई प्रत्यक्ष भूमिका निभाई.

हालांकि सीबीआई की इस जांच का अर्थ यह नहीं है कि संजीव मुखिया अन्य मामलों से मुक्त हो गया है. वह अभी भी बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में न्यायिक हिरासत में है और उस मामले की जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया अलग से जारी है. ऐसे में उसकी कानूनी स्थिति फिलहाल उसी प्रकरण से निर्धारित होगी.

सीबीआई की इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. नीट पेपर लीक मामले को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर रहा है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग करता रहा है. दूसरी ओर, सीबीआई की ताजा जांच रिपोर्ट ने संजीव मुखिया की भूमिका को लेकर पहले लगाए गए आरोपों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत सीबीआई की जांच रिपोर्ट को किस रूप में देखती है और बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों के निष्कर्ष क्या सामने आते हैं. यदि उस मामले में भी पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते हैं तो संजीव मुखिया को राहत मिल सकती है, जबकि साक्ष्य मिलने की स्थिति में उसे अलग कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा. फिलहाल नीट यूजी-2024 पेपर लीक मामले में सीबीआई की जांच ने इस बहुचर्चित प्रकरण को नया मोड़ दे दिया है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-