फुटपाथ पर बैग बेचने वाले पिता के बेटे ने पहली ही कोशिश में पास की नीट परीक्षा, संघर्ष से लिखी सफलता की नई कहानी

फुटपाथ पर बैग बेचने वाले पिता के बेटे ने पहली ही कोशिश में पास की नीट परीक्षा, संघर्ष से लिखी सफलता की नई कहानी

प्रेषित समय :18:32:58 PM / Mon, Jul 20th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर। मेहनत, लगन और कठिन परिस्थितियों के सामने कभी हार न मानने का जज्बा किसी भी मंजिल को हासिल करा सकता है। इसका प्रेरक उदाहरण संस्कारधानी जबलपुर के ओम चौकसे ने पेश किया है। आर्थिक तंगी के बीच पले-बढ़े ओम ने पहली ही कोशिश में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) उत्तीर्ण कर अपने माता-पिता का सपना साकार कर दिया। ओम की इस उपलब्धि ने न केवल परिवार, बल्कि पूरे शहर और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।

फुटपाथ की दुकान से बेटे के सपनों को मिली उड़ान
ओम चौकसे के पिता स्कूल के सामने फुटपाथ पर स्कूल बैग की दुकान लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। परिवार की आर्थिक स्थिति कठिन होने के बावजूद ओम ने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया और लगातार मेहनत जारी रखी।

पहले ही प्रयास में नीट परीक्षा में सफलता
ओम ने पहली बार में ही नीट परीक्षा उत्तीर्ण कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्हें परीक्षा में 720 में से 521 अंक प्राप्त हुए। इससे पहले आयोजित नीट परीक्षा में भी उन्होंने 625 अंक हासिल किए थे, लेकिन पेपर लीक की घटना के कारण परिस्थितियां बदल गईं। इसके बावजूद उन्होंने निराश होने के बजाय दोबारा पूरी लगन से तैयारी जारी रखी और सफलता हासिल की।

12वीं में भी प्रदेश के टॉप-10 विद्यार्थियों में बनाई थी जगह
ओम पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे हैं। उन्होंने कक्षा 12वीं की परीक्षा में मध्य प्रदेश के टॉप-10 विद्यार्थियों में स्थान बनाया था। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां बताती हैं कि उन्होंने हर स्तर पर मेहनत और अनुशासन को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।

मॉडल स्कूल से पढ़ाई, संघर्षों के बीच बनाई पहचान
ओम ने अपनी पढ़ाई मॉडल स्कूल से पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों को भी निभाया। हर दिन स्कूल जाने से पहले वह अपने पिता की फुटपाथ पर लगने वाली दुकान खोलने में मदद करते थे और शाम को दुकान बंद कराकर घर लौटते थे। परिवार के संघर्ष को बेहद करीब से देखने वाले ओम ने कभी कठिनाइयों को अपनी पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया।

दादी की मौत के बाद डॉक्टर बनने का लिया संकल्प
ओम के जीवन में एक ऐसा मोड़ भी आया जिसने उनके भविष्य की दिशा तय कर दी। उनकी दादी का हार्ट अटैक से निधन हो गया था। इस घटना ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया और तभी उन्होंने डॉक्टर बनने का संकल्प लिया। उन्होंने तय किया कि भविष्य में एक सक्षम चिकित्सक बनकर लोगों की सेवा करेंगे।

संघर्ष और सफलता की बनी मिसाल
फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले पिता के संघर्ष, परिवार के सीमित संसाधन और कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बीच ओम चौकसे की सफलता हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो तो सफलता अवश्य मिलती है। ओम की उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादे और निरंतर प्रयास किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-