ग्वालियर. बेंगलुरु में 74 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका को डिजिटल अरेस्ट कर 24 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में मध्य प्रदेश का ग्वालियर कनेक्शन सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है. जांच में खुलासा हुआ है कि साइबर ठगी की रकम का एक हिस्सा ग्वालियर में सोना खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया. इस मामले में कोतवाली थाना पुलिस ने सराफा कारोबारी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली है. पुलिस ने बहोड़ापुर निवासी अभिषेक परिहार के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है, जिस पर म्यूल खाते के माध्यम से भुगतान कर सोना खरीदने का आरोप है.
जानकारी के अनुसार बेंगलुरु में 74 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका लक्ष्मी राममूर्ति को साइबर ठगों ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का अधिकारी बनकर संपर्क किया था. ठगों ने उन्हें कथित जांच का भय दिखाते हुए 20 फरवरी से 24 अप्रैल तक डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रखा और इस दौरान उनसे करीब 24 करोड़ रुपये की ठगी कर ली. मामले की एफआईआर बेंगलुरु में दर्ज की गई थी. जांच के दौरान सामने आया कि ठगी की रकम देश के विभिन्न राज्यों में संचालित म्यूल खातों में ट्रांसफर की गई थी.
जांच में ग्वालियर का कनेक्शन तब सामने आया जब साइबर ठगी की रकम का एक हिस्सा यहां सराफा बाजार में सोना खरीदने में इस्तेमाल होने की जानकारी मिली. पुलिस के अनुसार ग्वालियर स्थित गहना ज्वेलर्स से 50 ग्राम सोने का सिक्का खरीदा गया था. इस खरीद के लिए कुल 7.41 लाख रुपये का भुगतान किया गया, जिसमें से 5.10 लाख रुपये वही थे जो बेंगलुरु की शिक्षिका से हुई साइबर ठगी की राशि का हिस्सा बताए जा रहे हैं.
पुलिस के मुताबिक बहोड़ापुर निवासी अभिषेक परिहार एक अप्रैल को सराफा बाजार स्थित गहना ज्वेलर्स पहुंचा था. उसने 50 ग्राम सोने का सिक्का खरीदने के लिए पहले एक लाख रुपये का भुगतान किया. इसके बाद वह पांच अप्रैल को दोबारा शोरूम पहुंचा और शेष 6.41 लाख रुपये का भुगतान किया. इस दूसरी किश्त में 5.10 लाख रुपये ऑनलाइन उस बैंक खाते से भेजे गए, जिसे जांच में म्यूल खाता पाया गया.
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि जिस खाते से गहना ज्वेलर्स को भुगतान किया गया, उसी खाते में बेंगलुरु की शिक्षिका से ठगी गई रकम में से लगभग 10 लाख रुपये जमा हुए थे. इसी राशि में से 5.10 लाख रुपये का उपयोग ग्वालियर में सोने की खरीद के लिए किया गया. इस प्रकार साइबर अपराध से अर्जित धन को वैध लेनदेन के माध्यम से खपाने की कोशिश की गई.
पुलिस के अनुसार सोने की खरीदारी के समय सराफा कारोबारी को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि भुगतान जिस खाते से किया जा रहा है, वह साइबर ठगी से जुड़ा हुआ है. कारोबारी को पूरे मामले की जानकारी तब मिली, जब 24 अप्रैल को उनका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया. इसके बाद कर्नाटक पुलिस की ओर से उन्हें नोटिस भी प्राप्त हुआ. नोटिस मिलने के बाद उन्होंने पूरे मामले की जानकारी देते हुए कोतवाली थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
शिकायत और कर्नाटक पुलिस से प्राप्त जानकारी के आधार पर कोतवाली थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. जांच के बाद बहोड़ापुर निवासी अभिषेक परिहार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि साइबर ठगी की रकम को अन्य स्थानों पर भी इसी तरह इस्तेमाल किया गया या नहीं तथा इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह ग्वालियर में सामने आया ऐसा दूसरा मामला है, जिसमें साइबर अपराध से प्राप्त रकम को स्थानीय स्तर पर सोना खरीदकर खपाने का प्रयास किया गया है. जांच एजेंसियां अब म्यूल खातों के संचालन, धन के ट्रांजेक्शन और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं. इसके साथ ही बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.
साइबर अपराध के मामलों में म्यूल खातों का इस्तेमाल लगातार बढ़ता जा रहा है. ऐसे खातों के माध्यम से ठगी की रकम को अलग-अलग राज्यों में भेजकर उसका स्रोत छिपाने की कोशिश की जाती है. इसके बाद नकदी, सोना या अन्य मूल्यवान वस्तुओं की खरीद के जरिए उस धन को वैध स्वरूप देने का प्रयास किया जाता है. इस मामले में भी जांच एजेंसियां इसी पहलू पर विशेष रूप से जांच कर रही हैं.
फिलहाल ग्वालियर पुलिस और कर्नाटक पुलिस के बीच समन्वय बनाकर मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है. पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी की रकम के प्रवाह और उससे जुड़े सभी व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी. वहीं साइबर अपराध के इस बड़े मामले में ग्वालियर कनेक्शन सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं और साइबर ठगी से जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर विशेष निगरानी रखी जा रही है.
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