जबलपुर. केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने पति के निधन के लगभग दस वर्ष बाद विधवा पेंशन भोगी से की जा रही 12.44 लाख रुपये की रिकवरी पर अंतरिम रोक लगाते हुए महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है. अधिकरण ने अगली सुनवाई तक पारिवारिक पेंशन से हर माह की जा रही 6,398 रुपये की कटौती तत्काल प्रभाव से स्थगित करने के आदेश दिए हैं. इसके साथ ही केंद्र सरकार, रक्षा लेखा विभाग और संबंधित बैंक सहित पांच प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर पूरे मामले में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं.
मामले की सुनवाई केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के न्यायिक सदस्य अखिल कुमार श्रीवास्तव की एकलपीठ में हुई. जबलपुर निवासी आशा पिल्ले ने मूल आवेदन प्रस्तुत कर बताया कि उनके पति चंद्रशेखर पिल्ले गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) जबलपुर में कार्यरत थे. 21 नवंबर 2015 को उनके निधन के बाद नियमानुसार उन्हें पारिवारिक पेंशन स्वीकृत की गई थी और वह लगातार पेंशन प्राप्त कर रही थीं.
आवेदन के अनुसार वर्ष 2022 में रक्षा लेखा विभाग ने यह कहते हुए 12,44,462 रुपये की रिकवरी का आदेश जारी कर दिया कि पूर्व में अतिरिक्त भुगतान हुआ है. इसके बाद विभाग ने पारिवारिक पेंशन से प्रत्येक माह 6,398 रुपये की कटौती शुरू कर दी. आवेदिका का कहना है कि पति के निधन के कई वर्षों बाद इस प्रकार बड़ी राशि की वसूली का आदेश जारी करना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे उनकी आजीविका पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है.
आवेदिका की ओर से अधिवक्ता अनिरुद्ध पांडे ने अधिकरण के समक्ष दलील दी कि विधवा पेंशनभोगी किसी प्रकार की त्रुटि या अतिरिक्त भुगतान के लिए जिम्मेदार नहीं है. यदि विभागीय स्तर पर भुगतान में कोई गलती हुई है तो उसका भार वर्षों बाद पारिवारिक पेंशन प्राप्त कर रही महिला पर नहीं डाला जा सकता. उन्होंने यह भी कहा कि मासिक पेंशन से लगातार कटौती किए जाने के कारण आवेदिका आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रही हैं.
प्रारंभिक सुनवाई के दौरान अधिकरण ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक यदि पेंशन से किसी प्रकार की रिकवरी की जा रही है तो उसे तत्काल प्रभाव से स्थगित रखा जाए. अधिकरण ने स्पष्ट किया कि अंतरिम अवधि में पेंशन से की जा रही मासिक कटौती जारी नहीं रखी जाएगी, ताकि आवेदिका को राहत मिल सके.
इस आदेश के बाद फिलहाल आशा पिल्ले की पारिवारिक पेंशन से होने वाली 6,398 रुपये प्रतिमाह की कटौती रुक जाएगी. अब केंद्र सरकार, रक्षा लेखा विभाग, संबंधित बैंक और अन्य प्रतिवादियों को अपने जवाब प्रस्तुत करने होंगे. मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है. उस दौरान सभी पक्षों के तर्क और दस्तावेजों के आधार पर अधिकरण आगे का निर्णय करेगा कि 12.44 लाख रुपये की रिकवरी विधिसम्मत है या नहीं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

