10–15 साल की देरी पर भड़के प्राध्यापक, नई वरिष्ठता सूची के खिलाफ प्रदेशभर में बढ़ा विरोध

10–15 साल की देरी पर भड़के प्राध्यापक, नई वरिष्ठता सूची के खिलाफ प्रदेशभर में बढ़ा विरोध

प्रेषित समय :19:13:21 PM / Fri, Jul 24th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. उच्च शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में जारी की गई सहायक प्राध्यापकों की वरिष्ठता सूची को लेकर प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में असंतोष गहराता जा रहा है. विभाग की ओर से जारी सूची में केवल वर्ष 2012 तक नियुक्त सहायक प्राध्यापकों को शामिल किए जाने पर शिक्षकों ने कड़ी नाराजगी जताई है. प्राध्यापकों का आरोप है कि विभाग की धीमी कार्यप्रणाली और लंबित प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण हजारों शिक्षक वर्षों से पदोन्नति और सेवा संबंधी लाभों से वंचित हैं. इसी मुद्दे को लेकर प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ, जबलपुर संभाग की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई.

बैठक की अध्यक्षता संभागीय अध्यक्ष प्रो. अरुण शुक्ल ने की. उन्होंने कहा कि प्रदेश के अन्य विभागों में पदोन्नति नियम-2025 के तहत पात्र अधिकारियों और कर्मचारियों को वर्ष 2025 तक के सभी लाभ दिए जा रहे हैं, जबकि उच्च शिक्षा विभाग अब भी 10 से 15 वर्ष पुराने लंबित मामलों का ही निराकरण नहीं कर पाया है. उनका कहना था कि विभाग की इस सुस्ती और उदासीनता का सीधा असर शिक्षकों के सेवा अधिकारों पर पड़ रहा है. समय पर वरिष्ठता सूची और पदोन्नति प्रक्रिया पूरी नहीं होने से बड़ी संख्या में प्राध्यापक अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित हो रहे हैं.

प्राध्यापक संघ ने आरोप लगाया कि विभागीय स्तर पर निर्णय लेने में हो रही लगातार देरी के कारण शिक्षकों को न्याय पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है. उनका कहना है कि यदि विभाग समयबद्ध तरीके से वरिष्ठता निर्धारण और पदोन्नति संबंधी प्रक्रियाएं पूरी करे तो अनावश्यक न्यायिक विवादों से भी बचा जा सकता है. संघ के पदाधिकारियों ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा कि वर्षों से लंबित मामलों का समाधान नहीं होने के कारण शिक्षकों में गहरा असंतोष व्याप्त है.

बैठक में डॉ. शैलेन्द्र श्रीवास्तव, डॉ. राजीव मिश्रा, डॉ. ए.सी. तिवारी, डॉ. रामेश्वर झारिया, डॉ. शिवचंद्र वल्के, डॉ. रविश तमन्ना ताजिर तथा डॉ. जागेश्वर प्रजापति सहित अनेक वरिष्ठ प्राध्यापक उपस्थित रहे. सभी ने एक स्वर में विभाग की वर्तमान व्यवस्था पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि वरिष्ठता सूची अधूरी होने से पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित होगी और इसका नुकसान बड़ी संख्या में शिक्षकों को उठाना पड़ेगा.

संघ के अनुसार, समय पर पदोन्नति नहीं मिलने से प्राध्यापकों को केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं हो रहा, बल्कि उनका मनोबल भी प्रभावित हो रहा है. वेतनमान और पदोन्नति से जुड़े लाभ वर्षों तक लंबित रहने के कारण शिक्षकों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है. उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि शिक्षकों की सेवा संबंधी समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए.

प्राध्यापक संघ ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने की अपील की है. संघ का कहना है कि पदोन्नति नियम-2025 के प्रावधानों के अनुरूप सभी पात्र प्राध्यापकों को निर्धारित मानदंडों के आधार पर शीघ्र पदोन्नति का लाभ दिया जाए. साथ ही, वरिष्ठता निर्धारण और पदोन्नति प्रक्रिया में आवश्यक सुधार कर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे भविष्य में वर्षों तक लंबित रहने जैसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो.

फिलहाल उच्च शिक्षा विभाग की ओर से इस विरोध पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. हालांकि प्राध्यापक संघ ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा सकती है. ऐसे में वरिष्ठता सूची और पदोन्नति का यह विवाद आने वाले दिनों में प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-