जबलपुर. सिहोरा के खितौला थाना क्षेत्र में 56 किलो 236 ग्राम गांजा जब्ती प्रकरण में विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस एक्ट की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए वाहन स्वामी रज्जू सिंह उर्फ राजू सिंह लोधी को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है. न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के विरुद्ध आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल किसी वाहन का स्वामी होना अपने आप में आपराधिक दायित्व सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता, जब तक उसकी संलिप्तता ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से प्रमाणित न हो.
विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट प्रबेन्द्र कुमार सिंह की अदालत में इस मामले की सुनवाई करीब ढाई वर्ष तक चली. अभियोजन के अनुसार 20 फरवरी 2024 को खितौला थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बोलेरो वाहन से 56 किलो 236 ग्राम गांजा बरामद किया था. इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने वाहन स्वामी रज्जू सिंह उर्फ राजू सिंह लोधी को भी अवैध मादक पदार्थ के परिवहन और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप में आरोपी बनाया था.
सुनवाई के दौरान वाहन स्वामी की ओर से अधिवक्ता संदीप जैन ने अदालत में विस्तृत पक्ष रखा. बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पुलिस की विवेचना, जब्ती की वैधानिक प्रक्रिया तथा साक्ष्यों की श्रृंखला में कई गंभीर त्रुटियां हैं. अधिवक्ता ने अदालत का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि अभियोजन ऐसा कोई प्रत्यक्ष या विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे यह साबित हो सके कि वाहन स्वामी को कथित गांजा परिवहन की जानकारी थी या वह इस अपराध में किसी भी रूप में शामिल था.
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि किसी व्यक्ति को केवल इस आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता कि वह संबंधित वाहन का पंजीकृत स्वामी है. आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए अभियोजन को आरोपी की संलिप्तता संदेह से परे प्रमाणित करनी होती है, जो इस मामले में नहीं हो सकी. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि अभियोजन उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर रज्जू सिंह के विरुद्ध आरोपों को कानूनी कसौटी पर सिद्ध करने में विफल रहा.
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि जब किसी आरोपी की संलिप्तता के संबंध में ठोस और विश्वसनीय प्रमाण उपलब्ध न हों तो उसे केवल अनुमान या परिस्थितियों के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता. इसी सिद्धांत के आधार पर अदालत ने रज्जू सिंह उर्फ राजू सिंह लोधी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया. इस फैसले को एनडीपीएस मामलों में साक्ष्यों की विश्वसनीयता और विधिक प्रक्रिया के पालन के महत्व के रूप में देखा जा रहा है, जहां अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन को प्रत्येक आरोप को कानूनी मानकों के अनुरूप प्रमाणित करना अनिवार्य है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

