जबलपुर. एमपी में खाद वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था को हरी झंडी देते हुए हाईकोर्ट ने इसके खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है. मंगलवार को जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने मध्य प्रदेश में लागू ई-विकास (डिस्ट्रीब्यूशन एंड एग्रीकल्चर फर्टिलाइजर सप्लाई सॉल्यूशन सिस्टम) को सही ठहराया है.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और गैर-कृषि उपयोग रोकने के लिए बनाई गई यह व्यवस्था केंद्र सरकार का नीतिगत निर्णय है, जिसमें न्यायालय सीमित परिस्थितियों में ही हस्तक्षेप कर सकता है. कृषि आदान विक्रेता संघ की ओर से दायर याचिका में दलील दी गई थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर रहती है, जिसके चलते खाद वितरण के दौरान किसानों को परेशानी होती है.
ई-टोकन प्रणाली लागू होने से इंटरनेट और तकनीकी जानकारी के अभाव में किसानों और उर्वरक विक्रेताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. साथ ही इसे उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के विपरीत बताया गया. याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल के साथ अधिवक्ता अमन गुप्ता ने पैरवी की. राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली, जबकि केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता सुयश ठाकुर उपस्थित हुए.
पिछली सुनवाई में राज्य सरकार का तर्क-
इससे पहले मामले में 10 मार्च 2026 को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने अदालत को बताया था कि पुरानी व्यवस्था में खेती नहीं करने वाले लोग भी सब्सिडी वाली खाद खरीदकर उसकी कालाबाजारी करते थे या गैर-कृषि कार्यों में उसका उपयोग करते थे. सरकार ने बताया कि ई-विकास प्रणाली में अब किसानों को उनकी भूमि के रिकॉर्ड के आधार पर ही खाद उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अवैध भंडारण और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगेगी. वहीं, बटाई या किराए पर खेती करने वाले किसान एसडीएम से सत्यापन कराकर ई-टोकन के माध्यम से खाद प्राप्त कर सकते हैं.
परिस्थिति अनुसार कलेक्टर लेंगे निर्णय-
10 मार्च को हुई सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. हाईकोर्ट ने सुनाए अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि ई-विकास प्रणाली के क्लॉज 18.9 के तहत यदि किसी जिले में इंटरनेट या अन्य तकनीकी समस्या उत्पन्न होती है, तो संबंधित जिला कलेक्टर परिस्थितियों के अनुसार पुरानी ऑफलाइन व्यवस्था लागू करने का निर्णय ले सकते हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

