रायपुर. छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए वीएसके (VSK) ऐप या आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है. लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने समग्र शिक्षा आयुक्त को जारी निर्देशों में कहा है कि जिन कर्मचारियों की जुलाई माह की उपस्थिति वीएसके ऐप में दर्ज नहीं होगी, उनका वेतन रोका जाए.
डीपीआई ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों में डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही संचालनालय कोष एवं लेखा से प्राप्त तकनीकी जानकारी के आधार पर वेतन भुगतान प्रक्रिया को वीएसके ऐप से जोड़ा जा रहा है. एक अगस्त तक वीएसके ऐप में अपंजीकृत कर्मचारियों की सूची तथा जुलाई माह के कार्य दिवसों के अनुसार उपस्थिति और अनुपस्थिति का डीडीओ-वार विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
हालांकि, इस फैसले का शिक्षक संगठनों ने विरोध किया है. शालेय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे का कहना है कि तकनीकी खामियों के कारण यदि किसी शिक्षक की उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, तो उसे अनुपस्थित मानना उचित नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक डिजिटल उपस्थिति प्रणाली के विरोध में नहीं हैं, बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जो भरोसेमंद और बिना तकनीकी बाधाओं के काम करे.
शिक्षकों के अनुसार वीएसके ऐप में जीपीएस लोकेशन की त्रुटि, कमजोर नेटवर्क, सर्वर की धीमी गति, ऐप का हैंग होना और लॉगिन संबंधी समस्याओं के कारण समय पर उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती. ऐसे में केवल ऐप की तकनीकी गड़बड़ी के आधार पर वेतन रोकना कर्मचारियों के साथ अन्याय होगा.
शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि ऐप में तकनीकी समस्या होने की स्थिति में स्कूल की उपस्थिति पंजी को भी वैध प्रमाण माना जाए, दूरस्थ क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए तथा किसी भी कार्रवाई से पहले वास्तविक उपस्थिति का सत्यापन अनिवार्य किया जाए.
इस संबंध में समग्र शिक्षा आयुक्त किरण कौशल से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका.
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