जबलपुर. सरकारी कार्यालयों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न निवारण कानून के तहत आंतरिक शिकायत समितियों के गठन की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट से वापस ले लिया गया. सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से याचिकाकर्ता के खिलाफ वर्ष 2024 में दर्ज एक महिला कर्मचारी की शिकायत का उल्लेख किए जाने के बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए जनहित याचिका को निरस्त कर दिया.
मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ के समक्ष हुई. जनहित याचिका मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी संजीव कुमार मेहरा द्वारा दायर की गई थी. याचिका में प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों के प्रभावी निवारण के लिए कानून के अनुरूप आंतरिक शिकायत समितियों के गठन और उनके सुचारु संचालन की मांग की गई थी.
सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता संजीव कुमार मेहरा वर्ष 2024 में सिंगरौली में पदस्थ थे. उसी दौरान एक महिला कर्मचारी ने उनके विरुद्ध यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायत दर्ज कराई थी. बोर्ड के अनुसार शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद 8 अगस्त 2024 को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसके आधार पर बोर्ड के अध्यक्ष ने विभागीय जांच की अनुशंसा की थी.
बोर्ड की ओर से यह तथ्य अदालत के समक्ष रखे जाने के बाद सुनवाई के दौरान परिस्थितियां बदल गईं. इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से जनहित याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी गई. युगलपीठ ने अनुमति प्रदान करते हुए याचिका को वापस लिए जाने के आधार पर निरस्त कर दिया. अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की और केवल याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए प्रकरण का निस्तारण कर दिया.
यह जनहित याचिका कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों के निवारण के लिए बनाए गए कानूनी प्रावधानों के पालन को लेकर दायर की गई थी. इसमें मांग की गई थी कि प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों में 'कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं निवारण) अधिनियम' के अनुरूप आंतरिक शिकायत समितियों का गठन सुनिश्चित किया जाए तथा उनकी कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाया जाए.
सुनवाई के दौरान बोर्ड द्वारा याचिकाकर्ता के खिलाफ पूर्व में दर्ज शिकायत का उल्लेख किए जाने के बाद मामला नया मोड़ ले गया. इसके पश्चात याचिकाकर्ता ने स्वयं जनहित याचिका वापस लेने का निर्णय लिया. हाई कोर्ट द्वारा अनुमति दिए जाने के साथ ही यह जनहित याचिका समाप्त हो गई. फिलहाल अदालत ने इस मामले में किसी भी पक्ष के आरोपों या शिकायतों की सत्यता पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

