रांची. झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है. अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने जांच का दायरा और विस्तृत करते हुए प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित सभी 2204 अभ्यर्थियों से उनकी ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा है. वहीं, आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से एक बार फिर पूछताछ की जा रही है. दूसरी ओर, अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों से मिले इनपुट के आधार पर जांच एजेंसी परीक्षा संचालन से जुड़े कई अधिकारियों और निजी एजेंसी की भूमिका की भी गहराई से पड़ताल कर रही है. जांच की दिशा से साफ संकेत मिल रहे हैं कि सीआईडी अब केवल तकनीकी गड़बड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे कथित भर्ती नेटवर्क की परत-दर-परत जांच कर रही है.
वर्ष 2025 में आयोजित झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम सामने आने के बाद कई अभ्यर्थियों और सामाजिक संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी, ओएमआर शीट में हेराफेरी तथा मेधा सूची को प्रभावित किए जाने के आरोप लगाए थे. शिकायतों के बाद सीआईडी थाना कांड संख्या 16/2026 दर्ज कर पूरे मामले की जांच शुरू की गई. प्रारंभिक जांच में कई ऐसे दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले, जिनके आधार पर जांच एजेंसी ने मामला आगे बढ़ाया और कई गिरफ्तारियां भी कीं.
जांच को मजबूत बनाने के लिए सीआईडी ने अब परीक्षा में सफल घोषित सभी 2204 अभ्यर्थियों से सहयोग मांगा है. सार्वजनिक नोटिस जारी कर अभ्यर्थियों से कहा गया है कि वे 30 जुलाई से 5 अगस्त के बीच पेपर-1 और पेपर-2 की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी का फोटो अथवा पीडीएफ जांच एजेंसी को उपलब्ध कराएं. इसके लिए सीआईडी ने आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर और ई-मेल आईडी भी जारी की है, ताकि अभ्यर्थी आसानी से अपने दस्तावेज भेज सकें. जिन अभ्यर्थियों के पास कार्बन कॉपी उपलब्ध नहीं है, उन्हें भी रोल नंबर के साथ उसका कारण लिखित रूप में भेजने को कहा गया है.
सीआईडी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यदि कोई अभ्यर्थी निर्धारित समय सीमा 5 अगस्त तक आवश्यक दस्तावेज अथवा स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं कराता है, तो उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जा सकती है. अधिकारियों के अनुसार बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने दस्तावेज भेजने शुरू भी कर दिए हैं और उनकी तकनीकी जांच की जा रही है.
इधर, जांच के केंद्र में झारखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एल. खियांग्ते भी हैं. सीआईडी उन्हें कई बार पूछताछ के लिए बुला चुकी है और एक बार फिर उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है. जांच एजेंसी परीक्षा संचालन, टेंडर प्रक्रिया, शिकायतों के निस्तारण, ओएमआर सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा के दौरान अपनाई गई प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े अनेक बिंदुओं पर उनसे जवाब मांग रही है.
सीआईडी विशेष रूप से यह जानने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी टीडीपीएल (TSR Data Processing Private Limited) को किन परिस्थितियों में सौंपी गई. जांच में यह पहलू भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि यदि संबंधित एजेंसी पहले विवादों में रही या ब्लैकलिस्ट थी, तो उसे जेपीएससी जैसी संवैधानिक संस्था की परीक्षा का कार्य कैसे और किस स्तर की स्वीकृति से मिला. एजेंसी टेंडर प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेजों और अनुमोदनों की जांच कर रही है.
पूरे मामले में अब तक उप परीक्षा नियंत्रक सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. गिरफ्तार आरोपियों में परीक्षा संचालन एजेंसी के निदेशक, मार्केटिंग मैनेजर, तकनीकी कर्मी और अन्य कर्मचारी शामिल हैं. इनमें से कई आरोपियों से रिमांड पर पूछताछ की जा रही है. सीआईडी का कहना है कि पूछताछ के दौरान डेटा टेंपरिंग, ओएमआर शीट में कथित हेराफेरी तथा परीक्षा संचालन से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं.
जांच एजेंसी अब जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, परीक्षा संचालन एजेंसी से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों तथा अन्य आरोपियों को दोबारा रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है. सीआईडी का मानना है कि अब तक जब्त किए गए दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और आरोपियों के बयानों को आमने-सामने रखकर पूछताछ करने से कई नई जानकारियां सामने आ सकती हैं.
सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ के दौरान जेपीएससी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. हालांकि सीआईडी फिलहाल इन आरोपों का स्वतंत्र सत्यापन कर रही है. जांच एजेंसी का कहना है कि बिना पर्याप्त साक्ष्य के किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा.
जांच के दौरान सीआईडी ने परीक्षा संचालन एजेंसी के कार्यालय से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर सिस्टम, सर्वर डेटा और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं. इसके अलावा जेपीएससी कार्यालय से भी ओएमआर शीट, परीक्षा अभिलेख और विभिन्न प्रशासनिक फाइलें अपने कब्जे में लेकर उनकी तकनीकी और फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है. जांच एजेंसी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित गड़बड़ियां परीक्षा के किस चरण में और किस स्तर पर हुईं.
सीआईडी पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते की विदेश यात्राओं और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है. इसी क्रम में उनका पासपोर्ट जब्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है. जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं कथित अनियमितताओं से अर्जित किसी अवैध लाभ का संबंध वित्तीय लेन-देन या विदेश यात्राओं से तो नहीं है. हालांकि इन पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.
फिलहाल जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ा यह मामला झारखंड की सबसे चर्चित भर्ती जांचों में शामिल हो चुका है. सफल अभ्यर्थियों से मांगे गए साक्ष्य, पूर्व अध्यक्ष से लगातार पूछताछ, परीक्षा संचालन एजेंसी की भूमिका, गिरफ्तार आरोपियों के खुलासे और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच से स्पष्ट है कि सीआईडी इस पूरे मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी है. अब 5 अगस्त की समय-सीमा, अभ्यर्थियों से मिलने वाले दस्तावेज और आगामी पूछताछ इस बहुचर्चित मेधा घोटाले की जांच को नई दिशा दे सकते हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

