छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: प्रशासनिक तबादले से नहीं छीनी जा सकती कर्मचारी की वरिष्ठता, वन विभाग का सर्कुलर असंवैधानिक घोषित

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: प्रशासनिक तबादले से नहीं छीनी जा सकती कर्मचारी की वरिष्ठता, वन विभाग का सर्कुलर असंवैधानिक घोषित

प्रेषित समय :16:11:12 PM / Fri, Aug 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य के शासकीय कर्मचारियों के हितों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि केवल प्रशासनिक कारणों से किए गए तबादले (Administrative Transfer) के आधार पर किसी भी कर्मचारी की वर्षों से अर्जित वरिष्ठता (Seniority) को समाप्त नहीं किया जा सकता.

मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति (Justice) रविंद्र कुमार अग्रवाल की युगल पीठ ने वन विभाग द्वारा जारी 31 जुलाई 2014 के उस विवादित सर्कुलर की संबंधित शर्त को सीमित सीमा तक असंवैधानिक (Unconstitutional) करार देकर निरस्त कर दिया है. इस शर्त के तहत एक वन वृत्त (Circle) से दूसरे वन वृत्त में स्थानांतरित होने वाले कर्मचारियों को नई वरिष्ठता सूची में सबसे निचले पायदान पर रख दिया जाता था.

क्या था पूरा विवाद?
वर्ष 2013 में प्रत्यक्ष भर्ती (Direct Recruitment) प्रक्रिया के माध्यम से कई वनरक्षकों (Forest Guards) की नियुक्ति हुई थी. बाद में प्रशासनिक कारणों और शासकीय आवश्यकता के तहत उनका स्थानांतरण एक वन वृत्त से दूसरे वन वृत्त में कर दिया गया.

स्थानांतरण के पश्चात, वन विभाग ने भर्ती प्रक्रिया में प्राप्त की गई मूल मेरिट को नजरअंदाज करते हुए इन कर्मचारियों को नई वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे (Bottom Seniority) रख दिया. इससे कर्मचारियों के पदोन्नति (Promotion) के भावी अवसर गंभीर रूप से प्रभावित हुए.

इसके खिलाफ कर्मचारियों ने पूर्व में अभ्यावेदन दिया था, जिसे 25 सितंबर 2025 को राज्य सरकार ने खारिज कर दिया. इसके बाद पीड़ित कर्मचारियों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई.

अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें
याचिकाकर्ताओं का पक्ष: कर्मचारियों की ओर से तर्क दिया गया कि उनका तबादला पूरी तरह से प्रशासनिक कारणों से हुआ था, न कि उनके स्वयं के अनुरोध पर. वैधानिक भर्ती नियमों को दरकिनार कर केवल एक कार्यपालिक आदेश (Executive Circular) के जरिए उनकी मूल मेरिट और वरिष्ठता को खत्म करना असंवैधानिक और अन्यायपूर्ण है.

राज्य शासन का पक्ष: सरकार की ओर से दलील दी गई कि 31 जुलाई 2014 के सर्कुलर और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1961 के प्रावधानों के तहत अंतर-वृत्त (Inter-circle) स्थानांतरण पर कर्मचारी को नई जगह की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे ही रखा जाता है. इसलिए अभ्यावेदन निरस्त करने का निर्णय नियमानुसार था.

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणियां और फैसला
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य शासन की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि:

तबादला कोई दंड नहीं: याचिकाकर्ता स्थानांतरण के जरिए नियुक्त कर्मचारी नहीं हैं; उनकी नियुक्ति प्रत्यक्ष भर्ती की मेरिट के आधार पर हुई थी. प्रशासनिक तबादला सेवा की एक सामान्य प्रक्रिया है और इसे दंड का आधार बनाकर किसी की भर्ती मेरिट समाप्त नहीं की जा सकती.

संविधान का उल्लंघन: कोर्ट ने वन विभाग के 31 जुलाई 2014 के सर्कुलर की संबंधित शर्त को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (अवसर की समानता) के विपरीत माना.

प्रतिकूल नागरिक परिणाम नहीं: जब तक किसी वैधानिक अधिनियम या प्रावधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख न हो, प्रशासनिक स्थानांतरण के कारण कर्मचारी को कोई प्रतिकूल नागरिक परिणाम (Adverse Civil Consequences) नहीं भुगतने दिए जा सकते.

90 दिनों के भीतर वरिष्ठता पुनर्निर्धारित करने का आदेश
अदालत ने याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन खारिज करने संबंधी 25 सितंबर 2025 के शासकीय आदेश को रद्द कर दिया है.

हाईकोर्ट ने राज्य शासन और संबंधित विभाग को कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी याचिकाकर्ता कर्मचारियों की वरिष्ठता का निर्धारण उनकी मूल भर्ती मेरिट (Original Recruitment Merit) और लागू वैधानिक नियमों के आधार पर 90 दिनों (तीन माह) के भीतर पुनः तय किया जाए. कोर्ट के इस निर्णय से राज्य के हजारों कर्मचारियों को अपने वरिष्ठता अधिकारों की सुरक्षा को लेकर बड़ी राहत मिली है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-