नियुक्ति का इंतजार कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों ने खाई घास, केरल सचिवालय के बाहर 34 दिन से प्रदर्शन

नियुक्ति का इंतजार कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों ने खाई घास, केरल सचिवालय के बाहर 34 दिन से प्रदर्शन

प्रेषित समय :22:41:00 PM / Sat, Aug 8th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

तिरुवनंतपुरम. केरल में निम्न प्राथमिक विद्यालय शिक्षक पद के लिए चयनित रैंक धारकों का नियुक्ति में देरी के खिलाफ चल रहा आंदोलन शनिवार को उस समय चर्चा में आ गया, जब प्रदर्शनकारियों ने राज्य सचिवालय के बाहर घास खाकर विरोध जताया. केरल लोक सेवा आयोग की रैंक सूची में शामिल अभ्यर्थी पिछले 34 दिनों से नियुक्ति आदेश जारी करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से नाराज अभ्यर्थियों ने विरोध के इस अनोखे तरीके के जरिए अपना आक्रोश जताया.

शनिवार को सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी कतार में बैठे दिखाई दिए. उनके सामने कागज पर घास रखी हुई थी और प्रदर्शनकारियों ने घास की तिनकियां खाकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सभी लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफल होकर रैंक सूची में स्थान हासिल कर चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति आदेश के लिए लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है. उनका आरोप है कि सरकार उनकी मांग पर गंभीरता से विचार नहीं कर रही है.

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के अनुसार उनका आंदोलन अब 34 दिन से जारी है. इस दौरान उन्होंने सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए, लेकिन अभी तक नियुक्ति को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है. शनिवार को घास खाने का विरोध भी इसी नाराजगी का प्रतीक था. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे योग्य होने के बावजूद नौकरी की प्रतीक्षा में हैं और सरकार की ओर से उन्हें केवल आश्वासन मिल रहा है.

प्रदर्शन में शामिल एक अभ्यर्थी ने समाचार एजेंसी को बताया कि वे निम्न प्राथमिक विद्यालय शिक्षक पद के रैंक धारक हैं और 34 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से अब तक कोई अच्छी खबर नहीं मिली है. प्रदर्शनकारी के अनुसार सरकार ने नियुक्ति आदेश जारी करने के लिए दो महीने का समय मांगा है. उन्होंने सवाल उठाया कि नियुक्ति आदेश जारी करने के लिए सरकार को दो महीने का समय क्यों चाहिए.

अभ्यर्थी ने कहा कि वे अपनी मांग को लेकर अलग-अलग तरह से विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है. उनका आरोप है कि सरकार उनके आंदोलन की अनदेखी कर रही है और उनसे दूरी बनाए हुए है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे हैं और लगातार आंदोलन करने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है.

केरल लोक सेवा आयोग की संबंधित रैंक सूची पिछले वर्ष 31 मई को प्रकाशित की गई थी. रैंक सूची में शामिल अभ्यर्थियों का कहना है कि चयन प्रक्रिया में सफलता हासिल करने के बाद उन्हें नियुक्ति की उम्मीद थी, लेकिन नियुक्ति आदेश जारी होने में लगातार हो रही देरी के कारण उनकी चिंता बढ़ती जा रही है. कई अभ्यर्थियों के लिए यह मामला रोजगार और भविष्य से सीधे जुड़ा हुआ है.

मामले को लेकर सरकार की ओर से नियुक्ति में देरी के पीछे की स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी दिए जाने की मांग भी प्रदर्शनकारियों ने की है. उनका कहना है कि यदि नियुक्ति में कोई प्रशासनिक या कानूनी बाधा है तो सरकार को उसके बारे में अभ्यर्थियों को स्पष्ट रूप से जानकारी देनी चाहिए. इसके बजाय उन्हें इंतजार करने के लिए कहा जा रहा है. इसी वजह से आंदोलन लगातार लंबा खिंचता जा रहा है.

इस बीच मामले का एक अन्य पहलू भी सामने आया है. केरल पुलिस ने पिछले महीने एक विशेष जांच दल गठित कर कथित अनियमितताओं की जांच का निर्णय लिया था. पुलिस के अनुसार यह जांच केरल लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित कुछ परीक्षाओं के मूल्यांकन में कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोपों के संबंध में की जा रही है. पुलिस की ओर से जारी आदेश में मामले की गंभीरता और त्वरित जांच सुनिश्चित करने की आवश्यकता का उल्लेख किया गया है.

पुलिस के आदेश के अनुसार सरकार ने हाल में सामने आए आरोपों के संबंध में व्यापक जांच के लिए अपराध शाखा को निर्देश दिया था. इसके बाद विशेष जांच दल गठित किया गया. विशेष जांच दल की अध्यक्षता पुलिस महानिरीक्षक एस. अजिता बेगम को सौंपी गई है. वह आर्थिक अपराध शाखा मुख्यालय, तिरुवनंतपुरम में पुलिस महानिरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं. पुलिस के अनुसार कथित अनियमितताओं की गंभीरता को देखते हुए जांच को विशेष जांच दल के माध्यम से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया.

पुलिस द्वारा विशेष जांच दल के गठन के बावजूद नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे रैंक धारकों की नाराजगी कम नहीं हुई है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जांच अपनी जगह है, लेकिन जिन अभ्यर्थियों ने निर्धारित चयन प्रक्रिया में सफलता हासिल कर रैंक सूची में स्थान प्राप्त किया है, उनके भविष्य को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए. वे सरकार से नियुक्ति की स्थिति स्पष्ट करने और जल्द आदेश जारी करने की मांग कर रहे हैं.

सचिवालय के बाहर जारी आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की. उनका कहना है कि वे कई दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे हैं. इसके बावजूद जब कोई ठोस पहल नहीं हुई तो उन्होंने विरोध का अलग तरीका अपनाया. घास खाने का प्रदर्शन इसी असंतोष को प्रतीकात्मक रूप से सामने रखने के लिए किया गया. प्रदर्शनकारियों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि नौकरी के लिए चयनित होने के बाद भी उन्हें जिस तरह लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है, वह उनके लिए बेहद निराशाजनक है.

अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि सरकार की ओर से दो महीने में नियुक्ति आदेश जारी करने की बात कही गई है, लेकिन उन्हें इस समयसीमा को लेकर भरोसा नहीं है. उनका कहना है कि आंदोलन शुरू हुए 34 दिन हो चुके हैं और अभी तक नियुक्ति की दिशा में स्पष्ट प्रगति दिखाई नहीं दे रही है. ऐसे में वे अपना आंदोलन जारी रखने के लिए मजबूर हैं.

मामले में अब सरकार की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी. एक तरफ लोक सेवा आयोग की रैंक सूची में शामिल अभ्यर्थी नियुक्ति आदेश की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया जा चुका है. ऐसे में अभ्यर्थियों की मांग है कि जांच की प्रक्रिया के साथ-साथ नियुक्ति से संबंधित स्थिति भी स्पष्ट की जाए.

फिलहाल सचिवालय के बाहर 34 दिनों से चल रहा प्रदर्शन केरल में चयनित अभ्यर्थियों की बढ़ती नाराजगी को सामने ला रहा है. शनिवार को घास खाकर किया गया विरोध इस आंदोलन का सबसे प्रतीकात्मक प्रदर्शन रहा. अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक नियुक्ति को लेकर सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं आता, उनका आंदोलन जारी रहेगा. अब देखना होगा कि सरकार रैंक धारकों की मांग पर क्या निर्णय लेती है और नियुक्ति आदेश जारी करने की प्रक्रिया कब आगे बढ़ती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-