एमपी हाईकोर्ट ने जमानत रद्द कराने की मांग वाली याचिका को किया खारिज, कहा- जमानत निरस्त करना आसान नहीं

एमपी हाईकोर्ट ने जमानत रद्द कराने की मांग वाली याचिका को किया खारिज, कहा- जमानत निरस्त करना आसान नहीं

प्रेषित समय :18:00:41 PM / Sat, Aug 8th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. एमपी हाईकोर्ट ने एक अपराधिक मामले में आरोपी को मिली जमानत को रद्द कराने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश आरके चौबे की एकलपीठ ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि किसी आरोपी को जमानत देने और पहले से मंजूर जमानत को रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया और कसौटियां पूरी तरह से भिन्न हैं.

यह याचिका नर्मदापुरम के निवासी सचिन ठाकुर द्वारा दायर की गई थी. याचिका में उल्लेख किया गया था कि निचले जिला न्यायालय ने प्रकरण के अनावेदक राकेश रघुवंशी को जमानत का लाभ दिया था. जिला अदालत ने यह राहत इस आधार पर दी थी क्योंकि मामले के एक अन्य सह-आरोपी को उच्च न्यायालय से पहले ही जमानत मिल चुकी थी. जमानत की मंजूरी देते वक्त अदालत ने यह शर्त तय की थी कि अभियुक्त भविष्य में किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में लिप्त नहीं होगा.

चिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि जेल से बाहर आने के बाद अनावेदक ने पुन: अपराध घटित कर अदालत द्वारा लगाई गई शर्त का उल्लंघन किया है. अत: उसकी जमानत तुरंत निरस्त की जानी चाहिए. हालांकि, सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि याचिकाकर्ता ने इससे पहले जिला न्यायालय में भी यही गुहार लगाई थी. उस समय जिला अदालत ने याचिका को यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि जमानत रद्द करने के लिए ठोस और विशेष कारणों का होना आवश्यक है. हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पूरी तरह से उचित और कानूनसम्मत ठहराया. एकलपीठ ने कहा कि मात्र आरोपों के आधार पर जमानत निरस्त नहीं की जा सकती. मामले में निरस्तीकरण के लिए कोई पर्याप्त और विधिक आधार न पाते हुए उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-