नई दिल्ली. आंतों की सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए केवल पौष्टिक भोजन और नियमित व्यायाम पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं है. रोजमर्रा की कुछ छोटी-छोटी आदतें भी पाचन तंत्र और समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं. खाने के दौरान मोबाइल चलाना, बिना योजना के भोजन छोड़ना, हर भोजन के बाद मीठा खाना, दर्द की मामूली शिकायत पर बार-बार दर्द निवारक दवा लेना, दिनभर पर्याप्त पानी न पीना और रात में देर से खाना जैसी आदतों को लेकर विशेषज्ञ लगातार सावधानी बरतने की सलाह देते हैं.
हाल ही में आंतों की सेहत से जुड़े एक विशेषज्ञ के सोशल मीडिया पोस्ट में ऐसी आठ आदतों की ओर ध्यान दिलाया गया, जिन्हें लोग सामान्य दिनचर्या का हिस्सा मान लेते हैं. हालांकि, इन सभी आदतों के स्वास्थ्य पर प्रभाव को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण समान स्तर के नहीं हैं. भोजन के समय, खाने की आवृत्ति और बीच-बीच में कुछ खाने जैसी आदतों पर उपलब्ध शोध में कई जगह मिले-जुले परिणाम सामने आए हैं.
खाना खाते समय मोबाइल फोन पर लगातार ध्यान देना पहली आदत है, जिस पर विशेषज्ञ ने सावधानी बरतने को कहा है. भोजन के दौरान वीडियो देखने, संदेश पढ़ने या इंटरनेट पर लगातार स्क्रॉल करने से व्यक्ति का ध्यान खाने से हट सकता है. ऐसे में वह यह महसूस करने में देर कर सकता है कि पेट भर चुका है. इसलिए भोजन करते समय मोबाइल और अन्य स्क्रीन से दूरी बनाकर धीरे-धीरे और ध्यानपूर्वक खाना बेहतर आदत मानी जाती है.
दूसरी आदत है बिना किसी निश्चित योजना के नाश्ता छोड़ देना. सोशल मीडिया पर इन दिनों उपवास या समय-सीमित भोजन को लेकर काफी चर्चा होती है, लेकिन सामान्य तौर पर नाश्ता छोड़ देना और व्यवस्थित तरीके से अपनाई गई उपवास पद्धति को एक जैसा नहीं माना जा सकता. भोजन के समय और अंतराल का स्वास्थ्य पर असर व्यक्ति की उम्र, जीवनशैली, स्वास्थ्य स्थिति और कुल आहार पर निर्भर कर सकता है. शोध में भी भोजन के पैटर्न और अंतराल को लेकर निष्कर्ष पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं.
तीसरी आदत है हर भोजन के बाद कुछ मीठा खाने की नियमित इच्छा. भोजन के बाद मिठाई, मीठे पेय या अन्य शर्करायुक्त खाद्य पदार्थ लेने की आदत से कुल चीनी का सेवन बढ़ सकता है. इसलिए रोजाना भोजन खत्म करने के लिए मीठे पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार और उचित मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है. खासकर ऐसे लोगों को अपनी खान-पान की आदतों पर ध्यान देना चाहिए जिन्हें पहले से रक्त शर्करा या वजन से जुड़ी समस्या है.
चौथी आदत मामूली सिरदर्द या शरीर में हल्के दर्द की स्थिति में बार-बार दर्द निवारक दवाएं लेना है. इबुप्रोफेन जैसी कुछ दर्द निवारक दवाएं गैर-स्टेरॉयड सूजनरोधी दवाओं की श्रेणी में आती हैं. इनका अनुचित या लंबे समय तक इस्तेमाल पेट और आंतों में अल्सर तथा रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है. अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन भी ऐसी दवाओं के इस्तेमाल से जुड़े पेट में रक्तस्राव के जोखिम को लेकर चेतावनी देता है.
पांचवीं आदत पूरे दिन पर्याप्त पानी न पीकर रात में एक साथ ज्यादा पानी पीना है. शरीर को पानी की जरूरत दिनभर बनी रहती है. इसलिए केवल रात में बड़ी मात्रा में पानी पीने के बजाय पूरे दिन नियमित अंतराल पर पर्याप्त तरल लेना अधिक व्यावहारिक तरीका है. हालांकि पानी की वास्तविक जरूरत मौसम, शारीरिक गतिविधि, उम्र और स्वास्थ्य जैसी परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है.
छठी आदत शौच की इच्छा को बार-बार रोकना है. व्यस्तता, यात्रा या अन्य कारणों से लोग कई बार शरीर के प्राकृतिक संकेत को नजरअंदाज कर देते हैं. लंबे समय तक ऐसा करने से कब्ज जैसी समस्या बढ़ सकती है. पर्याप्त पानी, फाइबर युक्त भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय पर शौच की आदत पाचन तंत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है.
सातवीं आदत है भोजन के बीच लगातार कुछ न कुछ खाते रहना. बार-बार स्नैकिंग से दिनभर में कुल कैलोरी का सेवन बढ़ सकता है और व्यक्ति को यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि उसने वास्तव में कितना भोजन किया. हालांकि स्नैकिंग का प्रभाव हर व्यक्ति में समान नहीं होता और उपलब्ध शोध में इसके स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर मिश्रित परिणाम मिले हैं. इसलिए स्नैकिंग को पूरी तरह गलत मानने के बजाय भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और व्यक्ति की वास्तविक जरूरत को ध्यान में रखना अधिक उचित है.
आठवीं आदत सोने से ठीक पहले भोजन करना है. देर रात भारी भोजन करने से कुछ लोगों को अपच, पेट में भारीपन या एसिडिटी जैसी परेशानी हो सकती है. भोजन और सोने के बीच पर्याप्त अंतर रखने से शरीर को भोजन पचाने के लिए समय मिल सकता है. हालांकि भोजन का सही समय व्यक्ति की दिनचर्या और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है.
विशेषज्ञों की सलाह का मूल संदेश यही है कि आंतों की सेहत के लिए किसी एक आदत पर निर्भर रहने के बजाय पूरे दिन की जीवनशैली पर ध्यान देना चाहिए. नियमित और संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी, फाइबर युक्त आहार, शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय सलाह पाचन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं.
यह भी समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति के लिए भोजन का सही समय और तरीका एक जैसा नहीं हो सकता. इंटरमिटेंट फास्टिंग, नाश्ता छोड़ने या भोजन के अंतराल को लेकर उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण अभी भी कई पहलुओं पर मिश्रित हैं. इसलिए केवल सोशल मीडिया पर देखी गई किसी सलाह के आधार पर अपनी खानपान की दिनचर्या में बड़ा बदलाव करना उचित नहीं है. किसी बीमारी, लगातार कब्ज, पेट दर्द, रक्तस्राव, वजन में अचानक बदलाव या लंबे समय से पाचन संबंधी परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

